यौन उत्पीड़न के 8 मामलों में जेएनयू प्रोफ़ेसर को सवा घंटे में ज़मानत, पुलिस को लानत !

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यौन उत्पीड़न के आरोपी जेएनयू के प्रोफेसर अतुल जौहरी को आख़िरकार आज गिरफ़्तार कर लिया गया। लेकिन यह एक मामूली हिरासत ही साबित हुई क्योंकि बमुश्किल सवा घंटे के अंदर वे ज़मानत पर बाहर आ गए।

दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट से पुलिस कस्टडी जैसी कोई माँग नहीं की जबकि प्रो.जौहरी पर आठ छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पुलिस तो एक एफआईआर पर ही मामला सलटा देना चाहती थी,लेकिन जेएनयू के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को लगातार हफ़्ते भर से आंदोलन करना, यहाँ तक कि रात में भी थाना घेरेने की वजह से ऐसा मुमकिन नहीं हुआ और आख़िरकार पुलिस को जौहरी के ख़िलाफ़ आठ एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।

बहरहाल, प्रो.जौहरी जैसे सबकुछ तय होने के बाद मंगलवार को पुलिस के सामने हाज़िर हुए। उन्हें पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। प्रो.साहब ने अपनी प्रतिष्ठा का हवाला दिया। पुलिस ने सर हिलाया और अदालत ने ज़मानत दे दी। शाम पौने छह बजे से लेकर सात बजे के बीच सब हो गया।  उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली आठ छात्राओं की प्रतिष्ठा बीच बहस नहीं थी।

अब ज़रा याद कीजिए जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के मामले में पुलिस का क्या रुख था। देशविरोधी नारों के आरोप में दिल्ली पुलिस ने कन्हैया को 12 फरवरी 2016 को गिरफ्तार किया था और लगातार ज़मानत का विरोध करती रही। कन्हैया 19 दिन तक जेल में रहे। बाद में यह साबित हुआ कि नारेबाज़ी का वीडियो गढ़ा गया था। यह संयोग नहीं कि देश तोड़ने वाले नारे लगा रहे नकाबपोशों को पुलिस ने आज तक नहीं पकड़ा।

अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री केजरीवाल की उपस्थित में पिटाई का आरोप लगाने वाले मुख्य सचिव अंशु प्रकाश की शिकायत पर पुलिस ने आम आदमी पार्टी के दो विधायकों को बिजली की तेज़ी से गिरफ़्तार किया और अदालत से उसने लगातार पुलिस कस्टडी की माँग की। बहरहाल दोनो विधायक न्यायिक हिरासत में भेजे गए और काफी दिनों बाद उन्हें ज़मानत मिल सकी। अंशु प्रकाश के साथ जो भी हुआ हो, वे मुख्यमंत्री आवास से बेशिकन सूट के साथ निकलते देखे गए थे। उनका चश्मा भी उनकी आँख पर था जिसके गिरने का आरोप उन्होंने लगाया था।

इस पूरे घटनाक्रम ने फिर साबित किया है कि दिल्ली पुलिस वर्दीधारी ग़ुलामों का गिरोह भर है। छात्र-छात्राएँ लगातार प्रो.जौहरी की गिरफ्तारी की माँग कर रहे थे दिल्ली पुलिस को जैसे लकवा मारा रहा। उसे पता था कि प्रो.जौहरी  प्रशासन के चहेते हैं और प्रशासन इन दिनों सीधे केंद्र सरकार से नियंत्रित हो रहा है, जो उसकी भी माई-बाप है।

जेएनयूएसयू की अध्य्क्ष गीता कुमारी ने यूँ ही नहीं आरोप लगाया था कि पुलिस जौहरी को बचा रही है। उन्होंने कहा था कि जौहरी से पूछताछ में जानबूझकर देरी की जा रही है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है जबकि उनके ख़िलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

प्रोफेसर जौहरी के खिलाफ 16 मार्च को लैंगिक उत्पीड़न की शिकायत की गई थी. सीआरपीसी की धारा 164 के तहत चार छात्राओं ने अपने बयान पुलिस में दर्ज कराया था। उन्हें हाथ लगाने में पुलिस को चार दिन लग गए वह भी इस गारंटी के साथ कि आठ लड़कियों के यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहा प्रोफेसर आठ घंटे भी जेल में न रहे।

 



 


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