बिहार में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में हुई मौतें- दीपंकर


माले की बैठक में तय हुआ कि पूरे राज्य और खासकर माले की जीती हुई विधानसभा सीटों में एक सप्ताह के अंदर कोविड काल में हुई सभी मौतों की सूची बनाकर सरकार के झूठ का पर्दाफाश किया जाएगा, क्योंकि सरकार जानबूझकर मौतों का आंकड़ा कम बता रही है. कोविड काल में मारे गए सभी लोगों के लिए चाहे वे कोविड से मौत के शिकार हुए हों, अथवा अन्य दूसरे कारणों से उनके परिजनों के लिए 4 लाख रु. मुआवजे के सवाल को प्रमुखता से उठाया जाएगा.


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पटना 10 जून 2021..भाकपा-माले की बिहार राज्य कमेटी की जूम एप पर हुई बैठक को संबोधित करते हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि सरकारें कोविड काल में मारे गए लोगों का आंकड़ा छुपा रही है. हम सही आंकड़े को सामने लाने का काम करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को निःशुल्क वैक्सीन देने की घोषणा देर से की गयी घोषणा है. प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडलीय सहयोगी और एनडीए के मुख्यमंत्री, इसके लिए उनका आभार प्रकट कर रहे हैं. लेकिन आम जनता की राय में धन्यवाद तो उच्चतम न्यायालय का है, जिसने केंद्र सरकार की मनमानी और अतार्किक वैक्सीन नीति पर तीखा प्रहार किया, जिसके दबाव में एक हफ्ते बाद उन्हें नीतिगत बदलाव करने पड़े.

उन्होंने कहा कि सबके टीकाकरण का एक तीव्र अभियान वक्त की जरूरत है, लेकिन मोदी के भाषण में इस मामले में कोई आश्वस्तकारी रोडमैप नहीं था. कोविड काल में लोगों की बड़ी संख्या में हुई मौतों का कारण लचर स्वास्थ्य व्यवस्था है. बिहार की हालत तो और खराब है. ये मौतें सरकार की लापरवाही का नतीजा है. केंद्र व राज्य सरकार के नकारेपन के खिलाफ स्वास्थ्य को एक मुद्दा बनाकर व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा. यदि समय पर सबके टीकाकरण की व्यवस्था नहीं की गई तो इसकी सबसे अधिक मार गरीबों पर पड़ेगी और वे ही लोग ज्यादा मौत के शिकार होंगे.

बैठक में उनके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा, अमर व राजाराम सिंह सहित राज्य कमिटी के सभी सदस्य, सभी विधायक, जिला संयोजक और सोशल मीडिया के जिला प्रभारी शामिल थे. बैठक में पार्टी की पोलित ब्यूरो की सदस्य व देश की चर्चित महिला नेता कविता कृष्णन और पार्टी की केंद्रीय कमिटी के सदस्य व कर्नाटक के राज्य सचिव काॅमरेड क्लिफटन भी शामिल थे.

बैठक में तय हुआ कि पूरे राज्य और खासकर माले की जीती हुई विधानसभा सीटों में एक सप्ताह के अंदर कोविड काल में हुई सभी मौतों की सूची बनाकर सरकार के झूठ का पर्दाफाश किया जाएगा, क्योंकि सरकार जानबूझकर मौतों का आंकड़ा कम बता रही है. कोविड काल में मारे गए सभी लोगों के लिए चाहे वे कोविड से मौत के शिकार हुए हों, अथवा अन्य दूसरे कारणों से उनके परिजनों के लिए 4 लाख रु. मुआवजे के सवाल को प्रमुखता से उठाया जाएगा.

बैठक में देश भर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा साझे रूप से कोविड-19 और अन्य सन्दर्भों में मारे गए लोगों का शोक मनाने के चल रहे अभियान पर चर्चा हुई. विदित हो कि विगत 6 फरवरी से पूरे देश में ‘अपनों की याद, हर मौत को गिनें – हर गम को बाँटें’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसे हर रविवार को आयोजित करना है. बैठक में तय हुआ कि कोविड के कारण मारे गए लोगों के साथ-साथ पिछले साल लॉकडाउन में पैदल घर लौटते हुए मारे गए मजदूर, भूख से खत्म हुए बच्चे व बुजुर्ग, नफरत या झूठ से उकसाये गई भीड़ की हिंसा में मारे गए लोग, साम्प्रदायिक, जातिगत या पितृसत्तात्मक हिंसा में मारे गए लोग, पुलिस दमन में मारे गए लोग, सीवर की सफाई करते हुए मारे गए सफाई कर्मी आदि लोगों की याद में आपसी संवाद स्थापित करते हुए एक व्यापक अभियान चलाना है.

इस अभियान का मकसद होगा – आने वाले दिनों में हमारे अपनों को ऑक्सीजन, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, अन्न के अभाव में मरना न पड़े, प्राकृतिक हादसों और महामारी से जीवन और जीविका के बचाव का काम समय पर हो; उत्पीड़न, अन्याय, नफरत और हिंसा से किसी की जान न जाए; जो मारे गए उन सब को न्याय मिले. हर रविवार को घर, मुहल्ले, गांव, कस्बे और दफ्तर, कारखघने, अस्पताल आदि में शाम में ‘अपनों की याद’ में परिवार, मुहल्ले, कॉलोनी, गांव के लोगों को जोड़ते हुए मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी.

माले राज्य सचिव कुणाल ने बैठक में कहा कि तीन महीने के अंदर हर आयु समूह के लोगों के टीकाकरण की गारंटी सरकार को करनी चाहिए और इसके लिए जो भी आवश्यक कदम हों, उसे तत्काल उठाया जाए. जरूरत के हिसाब से विदेशों से भी टीका आयात किया जाए.

टीकाकरण प्रक्रिया का पंचायत स्तर तक विस्तार किया जाए और स्कूल, वार्ड, आंगनबाड़ी केंद्रों व चलंत टीका केन्द्रों के जरिए इसे हर हाल में पूरा किया जाए. इसको लेकर हम व्यापक अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं.

सरकार को जनता के बीच जागरुकता पैदा करने का भी गंभीर प्रयास करना चाहिए. जनता में गाय, गोबर, गोमूत्र से कोरोना के उपचार जैसे अंधविश्वासों का प्रचार करनेवालों, भ्रम, अंधविश्वास और अवैज्ञानिक सोच फैलाने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं.

कुमार परवेज
राज्य कार्यालय, भाकपा-माले, बिहार


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