कर्नाटकः 5000 गारमेंट फ़ैक्ट्री मज़दूर पुलिस से भिड़े, लाठी चार्ज, हवाई फ़ायरिंग

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कर्नाटक में हिमतसिंगका गार्मेंट फ़ैक्ट्री के मज़दूरों और पुलिस में झ़ड़प में सात पुलिस कर्मी और दर्जनों मज़दूर घायल हो गये हैं।मज़दूरों ने फैक्ट्री के अंदर मैनेजमेंट की ओर से होने वाले उत्पीड़न और शोषण के ख़िलाफ़ बुधवार को शांतिपूर्ण रैली निकाली।शुरू में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण मार्च के रूप में था। लेकिन जल्द ही नारेबाज़ी के शोर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा फैल गई। इस झड़प में सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं जबकि 10 दोपहिया वाहन और पुलिस की एक गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई।फैक्ट्री का रिसेप्शन और कांच की खिड़कियां पत्थरबाज़ी में टूट गई हैं।

पुलिस ने मज़दूरों को कंट्रोल करने के लिए पहले लाठी चार्ज किया फिर हवाई फ़ायरिंग की।बाद में पुलिस ने 100 मज़दूरों को हिरासत में ले लिया जो सभी उत्तर भारत के हैं।
रेडीमेड गार्मेंट यूनिट में असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य जगहों के क़रीब 5,000 मज़दूर काम करते हैं। मज़दूरों ने शिकायत की है कि मैनेजमेंट और सुपरवाइज़र उन्हें प्रताड़ित करते हैं और थप्पड़ तक मार देते हैं।

मज़दूरों के अनुसार, “अगर हम विरोध करते हैं तो हमें निशाना बनाकर हमारा उत्पीड़न किया जाता है। फैक्ट्री उन्हें ठीक से सैलरी तक नहीं देती है। कुछ मज़दूरों को तो ग़ायब तक कर दिया गया। उनका पता लगाना चाहिए।  फैक्ट्री मैनेजमेंट को यहां आना चाहिए और इस पर सफ़ाई देनी चाहिए।”
एडिशनल एसपी नंदिनी ने घटनास्थल पर पहुंच कर हालात का जायजा लिया है। उन्होंने और अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के आदेश दिए हैं।

मैनेजमेंट ने मज़दूरों के आरोपों का खंडन किया है। लेकिन सोचने वाली बात ये है कि बिना सिर से पानी गुजरने के मज़दूर ऐसा भीषण कदम नहीं उठा सकते।
अभी तक ये नहीं पता चला है कि लेबर डिपार्टमेंट क्या श्रम क़ानूनों के उल्लंघन को लेकर फैक्ट्री की जांच की थी या नहीं।


वर्कर्स यूनिटी से साभार 


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