हाईकोर्ट के चाबुक का असर: यूपी में कोरोना से मरे मतदान अधिकारियों को 30 लाख मुआवज़ा

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पंचायत चुनाव के दौरान बरती गयी लापरवाही को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गये नोटिस के कुछ दिन बाद यूपी सरकार ने मृतक मतदान अधिकारियों के परिजनों को तीस लाख रुपये मुआवज़ा देने का फ़ैसला किया है।

दरअसल, हाईकोर्ट ने कोविड के कारण 135 शिक्षकों की मौत की खबर का संज्ञान लेते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था। शुक्रवार को जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमारी की खंडपीठ को राज्य सरकार ने मुआवज़ा देने की बाबत सूचित किया।

कोर्ट की नोटिस में कहा गया था कि- “ऐसा प्रतीत होता है कि न तो पुलिस और न ही चुनाव आयोग ने चुनाव ड्यूटी पर लोगों को इस घातक वायरस से संक्रमित होने से बचाने के लिए कुछ किया है।” हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेश में कोविड के प्रोटकॉल का कितना पालन हुआ, यह देखने के लिए मतगणना क्षेत्रों का सीसीटीवी फुटेज माँगा था। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

पिछले दिनों उ.प्र.शिक्षक महासंघ ने करीब 700 शिक्षकों की सूची जारी की थी जिनकी मतदान ड्यूटी के दौरान हुए संक्रमण से मौत हुई। बाद में इस संख्या के एक हज़ार तक पहुँचने का दावा किया गया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला करते हुए मृतक शिक्षकों के परिजनों को पचास लाख रुपये देने की माँग की थी।


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