गोरखपुर: पंचायत ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित 20 प्राथमिक शिक्षकों की मौत!

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यूपी की योगी सरकार पंचायत चुनाव के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने का दावा कर रही है, लेकिन हक़ीक़त ये है कि ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह ज़िले गोरखपुर के 20 प्राथमिक शिक्षक पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जान गँवा चुके हैं।

यह कोई आरोप नहीं है, उ.प्र.प्राथमिक शिक्षक संघ की गोरखपुर इकाई ने बुधवार को इन शिक्षकों का नाम जारी करते हुए ज़िला प्रशासन से उन प्राथमिक शिक्षकों की आरटी-पीसीआर जाँच कराने और उन्हें पीपीटी किट उपलब्ध कराने की माँग की जिनकी 2 मई की मतगणना में ड्यूटी लगायी गयी है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण से मृत्यु होने पर कोरोना वारियर के रूप में 50 लाख रुपये की सहायता और सभी अन्य सुविधाएँ देने की माँग भी की गयी है।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के गोरखपुर इकाई के अध्यक्ष राजेश धर दुबे और जिला मंत्री श्रीधर मिश्र ने 28 अप्रैल को गोरखपुर के जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में कहा है कि ‘कई शिक्षक अभी गंभीर हालत में हैं. चुनाव ड्यूटी से लौटे जनपद के 20 शिक्षकों की कोरोना संक्रमण से हुए आकस्मिक निधन से शिक्षक समुदाय में भयंकर आक्रोश, क्षोभ व शोक व्याप्त है। यह जीवन के संकट का मामला है। अब हम सब अपने और साथियों को खोने की स्थिति में कतई नहीं हैं, चाहे इसके लिए कुछ भी क्यों न करना पड़े।’

पत्र में कहा गया है कि ‘चुनाव ड्यूटी करते समय बहुतायत शिक्षक कोरोना संक्रमित हो गए हैं. चुनाव ड्यूटी से लौटने पर हजारों शिक्षक बुखार, सर्दी व खांसी से ग्रस्त होकर घर में ही आइसोलेट होकर इलाज करवा रहे हैं। कुछ शिक्षकों के बच्चे, पत्नी, माता-पिता कोरोना संक्रमित हो गए हैं। वे अपने इलाज के साथ-साथ अपने परिवार के लोगों की भी देखभाल कर रहे हैं।’

शिक्षक संघ ने जान गँवाने वाले शिक्षकों की सूची जारी की है और इस पत्र की प्रति गोरखपुर के कमिश्नर, मुख्य विकास अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक को भी भेजा है।

उत्तर प्रदेश में चार चरणों में पंचायत चुनाव कराया गया है। गोरखपुर में पंचायत चुनाव पहले चरण में 15 अप्रैल को हुए थे। अब तक तीन चरण के चुनाव हो चुके हैं। आखिरी चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होना है।

ग़ौरतलब है कि यूपी में पंचायत चुनाव के दौरान बरती गयी लापरवाहियों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को कठघरे में खड़ा किया है और पूछा है कि ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ क्यों कार्रवाई न की जाये। यही नहीं, उसने योगी सरकार द्वारा इस संबंध में दाखिल की गयी कार्ययोजना को भी खारिज कर दिया है।

 


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