फे़सबुक ने माना, यूजर्स को 10 हज़ार सामग्री में मिलती हैं 15 धमकियां, 5 भड़काऊ और 3 नफरत फैलाने वाली पोस्ट!

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फेसबुक ( meta) की लेटेस्ट सामुदायिक मानक अनुपालन रिपोर्ट (Community Standards Compliance Report) में पहली बार मेटा ने माना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को धमकाया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है। यह रिपोर्ट 2021 की तीसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच की है जिसके हिसाब से फेसबुक प्लेटफॉर्म पर जब एक औसत उपयोगकर्ता 10,000 सामग्री देखता है, तो इनमें से लगभग 15 सामग्री ऑनलाइन बदमाशी करने वालों की धमकियों की होती है।

92 लाख बार लोगों को मिली धमकियां…

रिपोर्ट के अनुसार, 10 हजार में हिंसा और भड़काऊ प्रकृति की पांच सामग्री और नफरत फैलाने वाली तीन अन्य सामग्री भी यूजर्स द्वारा बर्दाश्त करनी पड़ रही है। यानी साफ है कि….

  • हर 10 हज़ार में तीन सामग्री नफरत भरी है। पिछली तिमाही में यह संख्या पांच थी।
  •  हिंसा और भड़काने वाली सामग्री भी चार से पांच प्रति 10 हजार के हिसाब से मिली है।
  • फेसबुक ने माना है कि प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को तीन महीने में 92 लाख बार धमकाया और परेशान किया जा चुका है।

1.36 करोड़ कंटेंट को हटाया गया…

हालांकि फेसबुक ने जो सामग्री हटाई उसी के आंकड़े दिए हैं। जो सामग्री नहीं हटाई गई, उसका आंकड़ा नहीं दिया है। हालांकी, विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि कुछ तकनीकी कमियों और क्षेत्रीय समझ की कमी के कारण बड़ी संख्या में ऐसी सामग्री फेसबुक की नजर में आए बिना प्लेटफॉर्म पर बनी रहती है। फेसबुक ने ऐसे 1.36 करोड़ कंटेंट को हटाया। इनमें केवल 3.3 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं द्वारा रिपोर्ट किए गए थे, बाकी फेसबुक के निगरानी सॉफ्टवेयर द्वारा पकड़े गए थे।

फेसबुक 14 मानकों पर परख रहा सामग्री..

मेटा ने खुद माना है कि ऐसी सामग्री को हटाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उनके क्षेत्रीय संदर्भ और परिप्रेक्ष्य को समझना मुश्किल है। मेटा फेसबुक पर 14 मानकों पर अलग-अलग कंटेंट की टेस्टिंग कर रही है। आपको बता दें कि फेसबुक अपने मानकों के उल्लंघन का पता लगाने के लिए केवल 70 भाषाओं में सामग्री को मापता है। इनमें से भारतीय भाषाएं केवल पांच हैं। जबकि इसके प्लेटफॉर्म पर 160 भाषाओं का संचार किया जा रहा है। इसलिए उनका सिस्टम फेल साबित हो रहा है।

फेसबुक संवेदनशील श्रेणी के विज्ञापन रोकेंगे..

फेसबुक का कहना है कि वह स्वास्थ्य, नस्ल, राजनीतिक झुकाव, धर्म या लैंगिक रुचि जैसे संवेदनशील विषयों पर टार्गेटेड विज्ञापन नहीं देगी। इसकी शुरुआत अगले साल 19 जनवरी से होगी। वर्तमान में, वह इन विषयों से संबंधित मुद्दों में रुचि रखने वाले लोगों, संगठनों को टार्गेटेड विज्ञापन देती है।