सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को दी बड़ी राहत, दी जमानत

कपिल शर्मा कपिल शर्मा
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सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सेतलवाड़ को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी. तीन जजों की बेंच ने फैसला किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीस्ता 25 जून 2022 को गिरफ्तार की गई थीं और अब तक हिरासत में हैं. FIR में सुप्रीम कोर्ट के 24 जून के फैसले समेत कई कार्रवाइयों का जिक्र है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिर उसने जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट में अर्जी लगाई. अर्जी खारिज कर दी. ऐसी ही जमानत अर्जी आरबी श्रीकुमार ने भी दाखिल की. ट्रायल कोर्ट ने 13 जुलाई को दोनों जमानत अर्जी खारिज कर दीं. फिर तीस्ता ने गुजरात हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के होने की बात करते हुए कहा कि वे हिरासत में हैं। जो मामला है वो 2002-2010 के बीच के दस्तावेज का है. जांच मशीनरी को सात दिनों तक उससे हिरासत में पूछताछ का मौका मिला होगा. रिकॉर्ड में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए हमारा विचार है कि हाईकोर्ट को मामले के लंबित रहते समय अंतरिम जमानत पर विचार करना चाहिए था.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में CJI यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस सुधांशु भट थे। गुजरात राज्य की तरफ से एस जी तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में वही किया जो आम तौर पर मामलों में करता है. उन्होंने कहा कि तीन अगस्त को हाईकोर्ट के पास 168 केस लगे थे. उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले से एक हफ्ते पहले 124 मामले थे. इस आदेश की तारीख को 168 मामले थे. गुजरात हाईकोर्ट के CJ ने ऑटो लिस्ट पद्धति शुरू की है, जहां जमानत आवेदनों में कुछ दस्तावेज आदि दायर किए जाते हैं. जेल में बंद व्यक्ति को पता नहीं होता है इसलिए ऑटो सूची मदद करती है.

तुषार मेहता ने गुजरात राज्य की ओर से कहा कि तीस्ता ने 2002 से लेकर अभी तक राज्य सरकार से लेकर न्याय पालिका समेत सभी संस्थानों की छवि धूमिल की है. याचिकाकर्ता ने पूरे राज्य को राज्य के हर गणमान्य व्यक्ति को बदनाम किया है. उसके लिए कोई भी भरोसेमंद नहीं है. बदनामी अंतहीन रूप से चली आ रही है. अब वो उस जज पर भी बोल रही है. उनका पूरा ज़ोर इस बात पर था कि तीस्ता सेतलवाड़ ने धोखाधड़ी की है, और राज्य को बदनाम किया है, इसलिए इस मामले राहत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि उनके पास एसआईटी की एक रिपोर्ट है, जिसमे एसआईटी ने कहा है वे कि 21 मामलों में वे कहते हैं कि हम जांच करना चाहते हैं. तुषार मेहता ने ये भी कहा कि, याचिकाकर्ता द्वारा कुल 8 करोड़ जमा किए गए जिसमें से शराब, दुबई की दुकानों से खरीदारी हुई. ऐसा नहीं है कि यह बिना सबूत का मामला है, यह सबूत का मामला है. लेकिन सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल देना चाहिए. ज़मानत में हुई देरी के जवाब में तीस्ता सेतलवाड़ के ऊपर लगे आरोपों को फिर से दोहराते रहने के आलावा तुषार मेहता ने कुछ नया है कहा, वो इस बात का भी कोई जवाब नहीं दे पाए कि सात दिन की पुलिस हिरासत में उन्हें क्या मिला।

दूसरी तरफ तीस्ता सीतलवाड की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि, 124 लोगों को उम्रकैद हुई है. ये कैसे कह सकते हैं कि गुजरात में कुछ नहीं हुआ. ये सब एक उद्देश्य के लिए है. ये चाहते हैं कि तीस्ता ताउम्र जेल से बाहर ना आए. सिब्बल ने कहा कि, 20 साल से सरकार क्या करती रही. ये हलफनामे 2002-2003 के हैं. तो ये जालसाजी कैसे हो गए? ये हलफनामे इस केस में दाखिल नहीं किए गए. ये पहले के केसों में फाइल किए गए थे.

कपिल सिब्बल ने कहा कि, मैंने जज, न्यायपालिका पर आरोप नहीं लगाया है. मैं कुछ भी नहीं कर रहा हूं. मुझे कानून अधिकारी से इसकी उम्मीद नहीं है. यह सब प्रेरित है. अगर वे टाइप किए हुए भी हैं, तो इसमें जालसाजी कैसे आ सकती है? यदि जालसाजी आती है तो जालसाजी की शिकायत करने वाले व्यक्ति को न्यायालय अवश्य आना चाहिए. लेकिन राज्य यहां आकर कह रहा है. यह दुर्भावनापूर्ण है, प्रेरित है और मैंने जो किया वह जनता के बड़े हित में है. इस वजह से मेरी गिरफ्तारी हुई है. ये हलफनामे कुछ अन्य मामलों में दायर किए गए हैं. यह कुछ अन्य मामलों में NHRC के समर्थन में SC के समक्ष दायर हलफनामे हैं. तो क्या NHRC प्रेरित था, मैं प्रेरित. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मामला इस अदालत के सामने आया और अदालत ने मुझे कुछ राहत दी.

सिब्बल ने कहा, सभी मामलों में उन्होंने मुझे निशाना बनाया है. मैं राज्य की नंबर 1 दुश्मन हूं. और वो कहते हैं कि मैं एक शक्तिशाली व्यक्ति हूं. मैं राज्य से शक्तिशाली कैसे हो सकती हूं. वह 60 साल की है, वह क्या कर सकती है? सिब्बल ने कहा- ये अभियोजन नहीं अत्याचार है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, हाईकोर्ट ने तीन अगस्त को नोटिस जारी किया और सुनवाई 19 सितंबर को तय की. तीस्ता की अंतरिम जमानत की मांग नहीं मानी गई. दोनों फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.

सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देते हुए कहा कि तीस्ता को जल्द से जल्द संबंधित ट्रायल कोर्ट में पेश किया जाए. ट्रायल कोर्ट जमानत की शर्तें तय कर जमानत दे. तीस्ता को पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया और कहा कि तीस्ता जांच में सहयोग करेंगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, हमने सिर्फ अंतरिम बेल पर मामले में विचार किया है. हमने मेरिट पर कोई राय नहीं दी है. हाईकोर्ट मेरिट पर स्वतंत्रता से विचार करेगा. वो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पिणियों से प्रभावित नहीं होगा. ये फैसला मामले के इस तथ्य कि वो एक महिला है, इसका असर मामले के दूसरे आरोपियों पर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने कहा कि, ये ट्रायल कोर्ट के लिए खुला होगा कि वो जमानत के लिए बॉन्ड के लिए कैश पर विचार करे, लोकल श्योरटी पर जोर ना दे.