नगालैंड हिंसा में अब तक 14 लोगों की मौत, पुलिस ने किया दावा- नागरिकों की हत्या ही था जवानों का इरादा!

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उत्तर पूर्वी राज्य नागालैंड के मोन जिले में रविवार की रात को सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम एक जवान समेत 14 लोगों की मौत हो गई। यह इलाका म्यांमार की सीमा के करीब है। नागालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों पर की गई गोलीबारी के मामले में पुलिस ने भारतीय सेना के 21 पैरा स्पेशल फोर्सेज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। नागालैंड पुलिस ने सेना इकाई के खिलाफ अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि सेना के 21 पैरा स्पेशल फोर्स ने असम सीमा के पास नागालैंड के मोन जिले के ओटिंग में अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें 13 ग्रामीणों की मौत हो गई। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों का इरादा “नागरिकों को मारना और घायल करना” था।

TMC प्रतिनिधिमंडल के साथ हिंसा प्रभावित इलाके का करेगी दौरा..

नागालैंड में हुई हिंसा को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। इस घटना को लेकर जहां कई विपक्षी दल केंद्र सरकार पर हमले कर रहे हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आज हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा करेगी। टीएमसी प्रतिनिधिमंडल में सांसद प्रसून बनर्जी, सुष्मिता देव, अपरूपा पोद्दार, शांतनु सेन और पार्टी प्रवक्ता विश्वजीत देब शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने रविवार को शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भारतीय सेना द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियान की गहन जांच की मांग की। वहीं, इस घटना के बाद नागालैंड सरकार ने मारे गए 13 लोगों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

पूरा मामला..

शनिवार की रात गश्त कर रही सेना की एक टुकड़ी ने काम खत्म कर घर लौट रहे लोगों पर फायरिंग कर दी। कोयला खदान के कुछ मजदूर पिकअप वैन में गाना गाते हुए घर लौट रहे थे। सेना के जवानों को गैरकानूनी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-के (एनएससीएन-के) के युंग ओंग गुट के उग्रवादियों की आवाजाही की सूचना मिली थी और इस गलतफहमी में इलाके में सक्रिय सेना के जवानों ने कथित तौर पर वाहन पर फायरिंग कर दी, जिसमें छह मजदूरों की जान चली गई। वहीं, 11 अन्य घायल हो गए। इसके बाद गुस्साए स्थानीय लोग सेना से भिड़ गए जिसमें सात और नागरिक समेत सेना का एक जवान शहीद हो गया। पुलिस ने रविवार को बताया कि गोलीबारी की पहली घटना संभवत: गलत पहचान का मामला थी।

सुरक्षा बलों का इरादा नागरिकों की हत्या और घायल करना था..

वहीं, इस घटना को लेकर NDTV ने दावा किया है कि उसके पास FIR की कॉपी है। राज्य पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि घटना के समय कोई पुलिस गाइड नहीं था और न ही सुरक्षा बलों ने पुलिस थाने से आतंकवादियों के खिलाफ अपने अभियान के लिए गाइड प्रदान करने की मांग की थी। तो यह स्पष्ट है कि सुरक्षा बलों का इरादा नागरिकों को मारना और घायल करना था।” बता दें कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से पांच सदस्यीय विशेष एसआईटी टीम का गठन किया गया है।

इंटरनेट सेवाओं पर बैन..

नागालैंड सरकार ने एक अधिसूचना के माध्यम से, भड़काऊ वीडियो, फोटो या लिखित सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए जिले में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं के साथ-साथ कई एसएमएस पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, जिले में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध के बावजूद, भीड़ द्वारा मोन में कोन्याक यूनियन कार्यालय और असम राइफल्स कैंप में तोड़फोड़ करने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।


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