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‘मैं हूँ मुसलमान ! मैं हूँ हिंदुस्तान !’ – संसद मार्ग पर गूँजेगा, 13 की शाम !

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भारत लहुलूहान है. खामोश रहने का वक़्त खत्म हो चुका. पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मजदूर अफाराजुल इस्लाम की राजस्थान के राजसमन्द शहर में निर्मम हत्या के अलावा नफरती हमलों के ऐसे और भी हालिया मामले इस सच का एलान हैं कि आज के दौर में भारत में अल्पसंख्यक खासकर मुसलमान कितने असुरक्षित हैं. हत्यारा शम्भूलाल रेगर वीडियो पर हत्या को उचित ठहराते हुए यह कहता सुनाई देता है कि उसने यह कत्ल ‘लव जिहाद’ के नाम पर किया है. ‘लव जिहाद’ नाम के जहरीले हथियार के मार्फत नंफरत के सौदागर, ऐसे मुस्लिम पुरुषों को निशाने पर लेने का काम करते हैं, जिनके किसी हिन्दू महिला से सहमतिपूर्ण प्रेम सम्बन्ध हैं.

रेगर का एलान ठीक नाथूराम गोडसे के बयान जैसा मालूम होता है जिसमे गोडसे, महात्मा गाँधी की हत्या को उचित ठहराता है. दोनों ही नफरत के नाम पर की गई हत्या को उचित ठहराते हैं. दोनों को ही अपने घृणित अपराध पर गर्व है.

हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि बुधवार, 13 दिसंबर को शाम 5 बजे संसद मार्ग पर, भारत में विशेषकर राजस्थान में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ते हमलों के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में शामिल हों. आज, मुसलमानों को उन सभी अधिकारों से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है जो उन्हें एक नागरिक के तौर पर हासिल हैं, चाहे वह जीने का अधिकार हो या उनकी गरिमा और समानता का अथवा उनके धर्म या उनकी आस्था का. भारत के नागरिक के तौर हमें अपने साथी नागरिकों के समर्थन में खड़े होना होगा और एक आवाज़ में एलान करना होगा : मैं हूँ मुसलमान ! मैं हूँ हिंदुस्तान !

यह और भी भयानक और दुर्घटनापूर्ण है कि मुसलमानों की नृशंस हत्याओं पर मीडिया में चर्चा तर्कपूर्ण बहसों से हो रही है. हिंसा को किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता. हत्या किसी की भी हो, उसे ठीक कैसे करार दिया जा सकता है ? चुप रहने का समय नहीं रहा क्योंकि अब सिर्फ देश की एकता और अखंडता पर ही खतरा नहीं बल्कि इस मुल्क से इंसानियत नाम की चीज़ खत्म कर देने के कगार पर पहुँचा दी गई है. हम सबको मिलकर, एक-दूसरे का हाथ थामकर, देश की गली-गली में , चप्पे-चप्पे में इसका विरोध करना होगा.

हमारी मांग है की राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार को तुरंत बर्खास्त किया जाए. यह सरकार संविधान के पालन और आम नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करने की शपथ लेकर सत्ता में है. यह सरकार इस भयानक घटना के साथ-साथ अन्य बहुत से मसलों पर भी अपनी शपथ का पालन करने में न सिर्फ नाकाम रही है, बल्कि उससे भी बदतर यह कि इसने राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति हिंसा को बढ़ावा देने का काम किया है.

मीडिया की रिपोर्टों से पता चलता है मुसलमानों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में दायर मुकदमों को या तो बहुत हल्का बना दिया जाता है या फिर लटका दिया जाता है. शम्भूलाल रेगर जैसे हत्यारे हत्या को फिल्मा कर, उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने का दुस्साहस इसीलिये तो कर पाते हैं कि उन्हें कहीं न कहीं यकीन है कि एक ऐसा माहौल बन गया है कि ऐसा अपराध करके भी वे सजामुक्त रह सकते हैं. ऐसी किसी भी घटना पर जिम्मेदार पदों पर बैठे, राजस्थान और केंद्र के नेताओं के बयान इस कदर दोगले होते हैं कि वे आग में घी डालने का ही काम करते हैं. ऐसे लोग भी इन घृणित अपराधों के उतने ही दोषी हैं जितने कि वास्तविक हत्यारे. ये अपराध उस संविधान की आत्मा को तार-तार करते हैं जो अपने नागरिकों को समानता, जीवन के अधिकार और धर्म अथवा आस्था की स्वन्त्रता का वचन देता है.

आइये, 13 दिसम्बर, 2017 को हम सब नागरिक इकठ्ठा हों और एक आवाज में एलान करें कि मुसलमानों के प्रति हिंसा मेरे नाम पर नहीं है. नागरिक के तौर पर हम अपने साथी नागरिकों के समर्थन में खड़े हों और एकजुट हो कर कहें – मैं हूँ मुसलमान ! मैं हूँ हिंदुस्तान !
यह आम नागरिकों का विरोध-प्रदर्शन है. आप सभी का स्वागत है. कृपया किसी संगठन के बैनर अथवा चिन्ह अपने साथ न लायें.

NOT IN MY NAME की ओर  से जारी..