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झारखण्ड सरकार ने मजदूर संगठन समिति को माओवादी बताते हुए लगाया प्रतिबन्ध

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झारखण्‍ड सरकार ने मजदूर संगठन समिति नाम के संगठन को भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (माओवादी) का संबद्ध संगठन बताते हुए गैर-कानूनी और प्रतिबंधित करार दिया है। यूएनआइ द्वारा जारी एक खबर के मुताबिक मजदूर संगठन समिति को उसकी स्‍थापना की तारीख से ही सीपीआइ(माओवादी) का चेहरा बताते हुए उसे अवैध घोषित किया गया है।

यह फैसला आपराधिक कानून (संशोधन)अधिनियम 1908 की धारा 16 के अंतर्गत लिया गया है। सरकार का कहना है कि उसके पास खुफिया जानकारी है कि यह समिति वसूली करती थी, पुलिस की हरकतों पर निगाह रखती थी और कंगारू अदालतें लगाकर लोगों को दंडित करती थी।

ध्‍यान रहे कि पिछले दिनों इसी संगठन द्वारा रूसी क्रांति की 100वीं सालगिरह के जश्‍न पर काफी बवाल मचा था जिसकी खबर मीडियाविजिल ने प्रकाशित की थी। 7 नवंबर को रूस की अक्‍तूबर क्रांति की सौवीं वर्षगांठ पर झारखंड के गिरिडीह जिला अन्तर्गत चतरो में “महान बोल्शेविक क्रान्ति की शताब्दी समारोह समिति” झारखंड के तत्वावधान में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें क्षेत्र के लगभग दस हजार लोगों ने हिस्‍सा लिया। मंचीय कार्यक्रम के पूर्व एक रैली निकाली गई जो काफी शांतिपूर्ण तरीके से लगभग 5-6 कि.मी. की दूरी तय करते हुए वापस कार्यक्रम स्थल पर पहुंची और आयोजित समारोह भी शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ, जिसे सभी समाचार-पत्रों ने सहजता से छापा भी। बावजूद जिला प्रशासन ने रैली में शामिल लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज किया जिसमें 12 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था।

मजदूर संगठन समिति के महासचिव बच्‍चा सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति में उस वक्‍त कहा गया था, ”चूंकि महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह समिति, झारखंड में शामिल 13 संगठनों में मजदूर संगठन समिति भी शामिल है अतः मसंस के बहाने मजदूरों को मुकदमे में फंसाने की धमकी से डरा कर उन्हें चुप रखने की एक साजिश है और समारोह समिति द्वारा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित बोल्शेविक क्रांति के कार्यक्रमों को भी रोकने की साजिश का हिस्सा है।” उस वक्‍त सवाल उठे थे कि आखिर देश भर में रूसी क्रांति के सौवें साल पर कार्यक्रम हो रहे थे, फिर झारखण्‍ड के इस संगठन को ही क्‍यों रोका गया और गिरफ्तारी की गई।

झारखण्‍ड के प्रधान सचिव (गृह) के मुताबिक उनके पास ”खुफिया जानकारी थी कि समिति के सदस्‍यों ने सीपीआइ(माओवादी) से संबद्ध आरडीएफ के शीर्ष नेता वरवरा रव को नक्‍सलबाड़ी की पचासवीं सालगिरह मनाने के लिए न्‍योता दिया था ता‍कि इस बहाने गरीबों और आदिवासियों को लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था के खिलाफ भड़का कर संगठित किया जा सके।

राज्य में अब तक ऐसे 13 संगठन प्रतिबंधित किए जा चुके हैं।

4 COMMENTS

  1. Reference :9 November 2017 press release of pudr.org. (Gadchiroli…)….. SUPREME COURT SAID IN 2011 THAT BEING A MEMBER OF A BANNED ORGANISATION IS NO CRIME IN ITSELF ( IN INDIRA DAS VERSUS ASSAM STATE( 2011’3SCC 380) ALSO IN AAROOP BHUIYA VS ASSAM GOVERNMENT ( ) 2011,3 SCC 377). INDIA BEING A SOCIALIST COUNTRY AS PER CONSTITUTION, EVERYONE MUST BE EITHER A MARXIST – LENINIST OR A MAOIST. IT IS FUNDAMENTAL DUTIES( …. WE SHALL CHERISH IDEALS OF FREEDOM STRUGGLE…. and what’s that? Hsra and it’s most famous face Bhagat Singh!! HE AND HIS COMRADE WERE LENINIST.

  2. […] असंवैधानिक और गैर-कानूनी ढंग से प्रतिबंधित कर दिया था और संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार […]

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