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भारतीय मीडिया बना नकटों का गाँव! प्रत्यर्पण की फ़र्ज़ी ख़बर पर ज़ाकिर नायक का वीडियो !

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आज यह ख़बर अख़बारों में है कि विवादास्पद इस्लामी उपदेशक डॉ.ज़ाकिर नायक को फ़िलहाल भारत नहीं लाया जा सकता है। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने शुक्रवार को प्रत्यर्पण से इंकार कर दिया। डॉ.ज़ाकिर नायक 2016 से मलेशिया में शरण लिए हुए हैं। उन पर आरोप है कि उनके भाषणों ने तमाम युवकों को आतंकवाद के प्रति आकर्षित किया है। वे ‘हेट स्पीच’ मामले में वांछित हैं। भारत ने जनवरी में उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था।

बहरहाल, डॉ.ज़ाकिर नायक पर आरोप कितने सही या ग़लत हैं, यह एक अलग विषय है। अदालत में इसका फ़ैसला होगा। लेकिन भारतीय मीडिया ने 4 जुलाई को उनके बारे में ऐसी ख़बर चलाई थी कि मानों डॉ.ज़ाकिर नायक बस एक-दो दिन के अंदर भारत लाए जा सकते हैं। कुछ ने उनकी गिरफ़्तारी की ख़बर भी चला दी थी। हाल ये है कि एनडीटीवी जैसे साख के प्रति आग्रही कहे जाने वाला भी इस भेड़चाल में शामिल हो गया। कुछ नत्थी पत्रकारों और अख़बारों ने इस महान मोदी एफ़ेक्ट के रूप में पेश करना शुरू कर दिया था।

दो दिन बाद इन ख़बरों के फ़र्ज़ी साबित होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल ये कि क्या पूरे भारतीय मीडिया के कुएँ में भाँग पड़ी हुई है। क्या किसी के पास ख़बर के सही या ग़लत होने की पड़ताल का समय नहीं है? क्या भारतीय मीडिया में ख़बरें आसानी से प्लांट कराई जा सकती हैं?

ये संयोग नहीं कि इन दिनों सुपर हिट फ़िल्म संजू में मीडिया को सनसनी बेचने वाले धंधेबाज़ के रूप चित्रित करने वाले गाने पर जनता झूम रही है। यह हासिल है, पिछले कुछ वर्षों का। मीडिया सत्ता की नज़र में इस्तेंजा का पत्थर है तो जनता की नज़र में पैसे और सत्ताधीशों का ग़ुलाम।

शायद इसी को कहते हैं कि न माया मिली न राम।

पिछले दिनों कोबरा पोस्ट के स्टिंग आपरेशन में भारत के बड़े-बड़े मीडिया घराने नंगे हुए थे, लेकिन इस ख़बर को उपेक्षा की तलवार से हलाक़ करने कोशिश हुई। यह अलग बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मीडिया की थू-थू हुई। अल ज़ज़ीरा चैसे चैनल ने बाक़ायदा इस पर कार्यक्रम चलाया।

हद तो यह हो गई है कि तमाम गंभीर आरोपों से घिरे डॉ.ज़ाकिर नायक भारतीय मीडिया को नसीहत दे रहे हैं। उनकी गिरफ़्तारी और प्रत्यर्पण को लेकर की गई ख़बर पर उन्होंने एक वीडियो जारी किया है जो वायरल हो रहा है।

आप भी इसे देखिए और सिर पीटिए क्योंकि भारतीय मीडिया को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है। जब एनडीटीवी भी नकटों के गाँव में जा बसा है तो फिर कथित मुख्यधारा मीडिया में किसी की नाक कटने का बखान करने के लिए बचा ही कौन ?

 

 

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