सुधीर चौधरी को डिफेंड करते केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह खुद हो गए ट्रोल- जानिए पूरी कहानी

मयंक सक्सेना मयंक सक्सेना
मीडिया Published On :


गिरिराज सिंह, सुधीर चौधरी और ट्विटर पोल

गिरिराज सिंह केंद्रीय मंत्री हैं, भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री और अपने काम से ज़्यादा अपने भड़काऊ, सांप्रदायिक और पाकिस्तान भेजने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। बेगूसराय से सांसद हैं और ये सीट उनसे ज़्यादा – उनके ख़िलाफ़ कन्हैया कुमार के चुनाव लड़ने के कारण चर्चित हो गई थी। ट्विटर पर गिरिराज सिंह अपने गोत्र के नाम Shandilya Giriraj Singh के साथ सक्रिय हैं और खूब ट्वीट करते हैं। अमूमन उसमें उनके मंत्रालय के कामों का ज़िक्र कम होता है, जिस पर हम आगे बात करेंगे। फिलहाल बात उस ट्विटर पोल की, जिसको गिरिराज सिंह ने ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी के ख़िलाफ़ हुई एफआईआर के बचाव में शुरु किया, ट्विटर पर ट्रोल हो गए और फिर उनको अपना मान बचाने के लिए, अपना अकाउंट लॉक करना पड़ा।

सांप्रदायिक भाषा वाला ट्वीट और पोल

सबसे पहले तो पूरी ज़िम्मेदारी के साथ मीडिया विजिल की ओर से हम ये कहना चाहेंगे कि इस ट्वीट की भाषा भयानक आपत्तिजनक और सांप्रदायिक है। गिरिराज सिंह अपने चहेते या प्रिय पत्रकार को डिफेंड करें, इसमें कोई समस्या नहीं – लेकिन इसके बहाने वो किसी समुदाय के ख़िलाफ़ भड़काऊ टिप्पणी करें, इसका अधिकार भारत का संविधान और क़ानून उनको केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद नहीं देता है। इस ट्वीट को पढ़िए और समझिए कि कैसे इसमें एक समुदाय विशेष के प्रति वैमनस्य फैलाया गया है।

इस ट्वीट के साथ एक पोल भी था, जिसमें पूछा गया था कि कितने लोग सुधीर चौधरी और उनकी मुहिम (जो कि साफतौर पर एक संप्रदाय के विरोध में है) के साथ हैं। इस पोल को हाल ही में, ज़ी न्यूज़ और उसके संपादक के ख़िलाफ़ सांप्रदायिकता फैलाने के मामले पर दर्ज हुई एफआईआर के विरोध में किया गया था। इस ट्वीट के तुरंत बाद ही न केवल इसका विरोध शुरु हुआ, बड़े पैमाने पर इस ट्वीट पर वोट आने लगे। हालांकि निश्चित रूप से गिरिराज सिंह ने सोचा होगा कि इस पोल में बड़े पैमाने पर उनके, उनकी विचारधारा के समर्थक वोट करेंगे और ये पोल वो आसानी से अपने पक्ष में कर लेंगे। लेकिन पोल के जब साढ़े 7 घंटे ही बचे थे, इस मुहिम के ख़िलाफ़ वोट बढ़कर, लगभग बराबर पहुंच गए थे। (नीचे तस्वीर देखें)

जब गिरिराज सिंह को लगा कि ट्विटर पोल वे हार जाएंगे

लेकिन ट्विटर पोल – उल्टा पड़ गया!

और अब तक गिरिराज सिंह को अच्छी तरह समझ आ गया कि ट्विटर पर उनकी प्रतिष्ठा (जी, कम से कम वो और उनके समर्थक इसको प्रतिष्ठा ही मानते हैं) पर संकट आ गया है। गिरिराज सिंह को कुछ और समझ में नहीं आया तो उन्होंने हड़बड़ी में अपना अकाउंट लॉक कर दिया। यानी कि अब ये अकाउंट अचानक से पब्लिक नहीं रह गया था। मतलब कि उन्होंने पोल, जिस स्थिति में था – लगभग वहीं पर रोक दिया या फिर सिर्फ उनके पुराने फॉलोअर्स ही उस पर वोट कर सकते थे। मतलब पोलिंग का समय समाप्त होने से पहले ही पोलिंग बंद कर देना।

गिरिराज सिंह ने बीच पोल में अकाउंट लॉक किया

फिर हुई गिरिराज की ट्रोलिंग

लेकिन गिरिराज सिंह को ये अंदाज़ा नहीं था कि इसके बाद वो और अधिक ट्रोल होंगे। उनके पोल और अकाउंट लॉक करते ही ट्विटर पर उनको अलग-अलग नामों और मुहावरों से नवाज़ा जाने लगा। किसी ने उनको भगोड़ा कहा, तो हज़ारों ट्विटर यूज़र्स ने उनको ईवीएम हैक करने के ख़िताब से नवाज दिया।

मामला यहीं पर नहीं रुका, ट्विटर पर थोड़ी ही देर में हैशटैग ट्रेंड करने लगे, इनमें से कुछ हैशटैग ट्विटर पर इंडिया के टॉप ट्रेंडिंग में आ गए। ये हैशटैग थे – #गिरिराज_हैंडल_पब्लिक_कर, #गिरिराज_भगोड़ा_है, #गिरिराजजी_आप_कहाँ_हो और गिरिराज सिंह की तमाम कोशिशों के बाद, उनकी ये चालाकी, चारों ओर चर्चा का बायस बन गई।

अंत में – और ट्रोल हुए गिरिराज

इसके बाद पोल की अवधि समाप्त हुई, गिरिराज सिंह को लगा कि अब खुशी-खुशी अपना अकाउंट दोबारा सार्वजनिक किया जा सकता है। उन्होंने ट्विटर अकाउंट खोल दिया। अकाउंट खुला तो पोल सामने आया, जो कि बिना पूरी वोटिंग के पूरा हो चुका था। लेकिन पोल में लगभग उतने ही वोट थे, जितने अकाउंट को लॉक करते समय थे। सामने दिखते पोल में वोटिंग, गिरिराज सिंह के पक्ष में दिख रही थी – लेकिन चूंकि 7 घंटे पहले ही ये पोल बंद हो चुका था, इसके वोट और परसेंटेज साफ बता रहे थे कि गिरिराज सिंह ये पोल हार सकते थे। और फिर इसके बाद #गिरिराज_भगोड़ा_है ट्रेंड करने लगा।

हालांकि अब गिरिराज सिंह का ट्विटर अकाउंट पब्लिक है, वो लगातार ट्वीट भी कर रहे हैं। हालांकि अब वो अपने उस पोल को लेकर कोई ट्वीट नहीं कर रहे हैं, ये भी नहीं कह पा रहे हैं कि ज़्यादातर लोग उनके समर्थन में हैं। लेकिन ट्विटर पर ट्विटराटीज़ उनको छोड़ने के मूड में नहीं हैं। उनके अकाउंट के पब्लिक होते ही उस पर लगातार उनको फिर से ट्रोल किया जा रहा है। गिरिराज सिंह ने इस पोल में अपना अकाउंट लॉक कर के अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश तो की – लेकिन दरअसल लगता है कि ये हथकंडा बहुत काम नहीं आया है। अब देखना ये है कि आगे से गिरिराज सिंह कोई ऐसा पोल करेंगे या ऐसा करने से बचेंगे…


हमारी ख़बरें Telegram पर पाने के लिए हमारी ब्रॉडकास्ट सूची में, नीचे दिए गए लिंक के ज़रिए आप शामिल हो सकते हैं। ये एक आसान तरीका है, जिससे आप लगातार अपने मोबाइल पर हमारी ख़बरें पा सकते हैं।  

इस लिंक पर क्लिक करें
प्रिय साथियों,
हम सब कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहे हैं और अपने घरों में बंद रहने को मज़बूर हैं। इस आसन्न संकट ने समाज की गैर-बराबरी को भी सतह पर ला दिया है। पूरे देश में जगह-जगह मज़दूर फंसे हुए हैं। पहले उन्हें पैदल हज़ारों किलोमीटर की यात्रा करते हुए अपने गांव की ओर बढ़ते देखा गया था। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले ही चौपट हो चुकी है, फसलें खेतों में खड़ी सड़ रही हैं। लेकिन लॉकडाउन के कारण दूर दराज के इलाकों से कोई ग्राउंड रिपोर्ट्स नहीं आ पा रहीं। सत्ता को साष्टांग मीडिया को तो फ़र्क़ नहीं पड़ता, लेकिन हम चाहते हैं कि मुश्किलों का सामना कर रहा ग्रामीण भारत बहस के केंद्र में होना चाहिए। 
हमारी अपील आप लेखकों, पत्रकारों और सजग नागरिकों से है कि अपने-अपने गांवों में लोगों से बात करें, हर समुदाय की स्थितियां देखें और जो समझ आये उसकी रिपोर्ट बनाकर हमें mediavigilindia@gmail.com भेजें। कोशिश करें कि मोबाइल फोन से गांव की तस्वीरें खींचकर भी भेजें। इन रिपोर्ट्स को हम अपने फेसबुक पेज़ पर साझा करेंगे और जो रिपोर्ट्स हमें बेहतर लगेंगी उन्हें मीडिया विजिल की वेबसाइट पर भी जगह दी जायेगी। 

 


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

Related



मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।