वरिष्ठ पत्रकार एस. निहाल सिंह का निधन

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उर्मिलेश 

वरिष्ठ पत्रकार और द इंडियन एक्सप्रेस स्टेट्समैन  जैसे प्रमुख अंग्रेजी अखबारों के संपादक रहे एस. निहाल सिंह का सोमवार को निधन हो गया। सन् 1929 में जन्मे निहाल सिंह ने संपादक के रूप में निस्संदेह भारतीय पत्रकारिता को समृद्ध किया। अंग्रेजी के वह चंद संपादकों में थे, जिन्होंने इमरजेंसी के दिनों में वर्चस्ववादी सत्ताधारियों के समक्ष घुटने नहीं टेके। जिस दिन इमरजेंसी राज में ‘सेंसरशिप’ थोपी गई, उन्होंने संपादक के रूप में The Statesman के पहले पेज पर इस तथ्य को पाठकों के समक्ष पेश किया किया कि यह अंक सेंसरशिप में छप रहा है!

आज के राज की नीतियों, खासकर सांप्रदायिकता के फैलाव, मीडिया पर अंकुश लगाने की प्रवृत्ति और सत्ता के अन्य जनविरोधी हथकंडों के वह मुखर आलोचक थे। निहाल सिंह का व्यक्तित्व कई मामलों में अपने समकालीन बड़े अंग्रेजी संपादकों से कुछ अलग था। वह बहुत सहज, शालीन, खुशनुमा और बेबाक थे। विद्वता, पद या प्रसिद्धि को लेकर उनमें किसी तरह का ‘एरोगेंस’ कभी नहीं दिखा।

मेरा सौभाग्य है कि उन जैसे विद्वान और संजीदा संपादकों का मुझे भी सानिध्य मिला। जिन दिनों मैं राज्यसभा टीवी (RSTV) पर अपना साप्ताहिक कार्यक्रम “मीडिया मंथन” पेश करता था, वह कई बार मेरे अनुरोध पर पैनेलिस्ट के तौर पर शामिल हुए। कार्यक्रम के पहले या उसके बाद चाय-कॉफी पर गपशप भी की।

उनके निधन से भारतीय पत्रकारिता ने एक साहसी, संजीदा और समझदार संपादक खो दिया! एस निहाल सिंह, आप सचमुच हम सबको बहुत याद आयेंगे! सादर श्रद्धांजलि!


वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की फेसबुक दीवार से साभार 


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