राज्यसभा TV: राव साहब के इंटरव्यू बोर्ड में शामिल होने से राय साहब ने क्यों किया इनकार?

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मीडियाविजिल प्रतिनिधि 

राज्यसभा टीवी में दो दिन पहले 24 जुलाई को दो वरिष्ठ पदों के लिए इंटरव्यू हुए हैं। पूरे राज्यसभा सचिवालय और पत्रकार बिरादरी के बीच इसे लेकर तरह तरह की बातें चल रही हैं क्योंकि वरिष्ठ पत्रकार और IGNCA (इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र) के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने इस इंटरव्यू के बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया था। रामबहादुर राय का इनकार नियुक्ति प्रक्रिया की अनियमितताओं को लेकर था। चूंकि रामबहादुर राय अपनी पत्रकारीय तटस्थता और अखंडता के लिए ख्यात हैं लिहाजा यह खबर मामूली नहीं थी।

इसके बाद जब 24 जुलाई को इंटरव्यू हुआ तो अधूरा रहस्य भी खुल गया। पता चला कि कई वरिष्ठ पत्रकारों का आवेदन राज्यसभा ने खारिज कर दिया था और अपेक्षया जूनियर या कम अनुभव के लोगों को इंटरव्यू में बुला भेजा था। प्रधानमंत्री की नाक के नीचे राज्यसभा टेलीविजन के दफ्तर में नई भर्तियों में घपला हो गया और कानोकान किसी को आखिरी दम तक खबर नहीं हुई। गौरतलब है कि 7 मई 2018 को 28 पदों की भर्तियों के लिए विज्ञापन निकाला गया था जिनमें से दो पदों के लिए 24 जुलाई को इंटरव्यू किया गया।

पता चला है कि इन दोनों पदों के लिए जिन नामों को शार्टलिस्ट किया गया, उसमें कई ख्यातनाम पत्रकारों के आवेदन को नामंजूर और खारिज कर दिया गया। जिन पत्रकारों के आवेदन खारिज किये गए वे अनुभव और काम में बुलाये गए पत्रकारों से काफी वरिष्ठ हैं।

राज्यसभा में इन नियुक्तियों को देखने की ज़िम्मेदारी राज्यसभा सचिवालय में बतौर अतिरिक्त सचिव कार्यरत सूचना सेवा के वरिष्ठ अधिकारी ए ए राव की है। राज्यसभा टीवी की जिम्मेदारी संभाल रहे राव आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं और उनकी नजदीकी वेंकैया नायडू से है। नायडू जब बतौर मंत्री शहरी विकास मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे थे, उस वक्त राव अतिरिक्त महानिदेशक सूचना के तौर पर उनके साथ जुड़े थे। उसके पहले राव आंध्र प्रदेश से ही कांग्रेसी सांसद, फिल्म निर्माता और मनमोहन सरकार में कोयला मंत्री रहे दासारि नारायण राव के साथ भी तैनात रहे हैं।

अगर नियुक्तियों के विज्ञापन को देखें तो एक बड़ा घपला दिखाई देता है. एक्जीक्यूटिव एडिटर के पद की योग्यता में “अनिवार्य” के बजाय “इच्छित” योग्यता के तहत संसदीय प्रक्रिया की जानकारी रखने और प्रिंट/दृश्य माध्यम में कम से कम तीन साल की रिपोर्टिंग को शामिल किया गया है जबकि उससे नीचे के पद एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर इनपुट के लिए पांच साल की संसदीय रिपोर्टिंग के अनुभव को ”अनिवार्य” योग्यता के बतौर शामिल किया गया। यह कितना हास्यास्पद है कि वरिष्ठ पद के लिए सिर्फ संसदीय प्रक्रिया और रिपोर्टिंग की जानकारी होनी चाहिए (वो भी इच्छित यानी desired) और निचले पद के लिए संसदीय रिपोर्टिंग का अनुभव (अनिवार्य) होना चाहिए।

स्पष्ट है कि ये सारा घालमेल एग्जीक्यूटिव एडिटर के पद पर किसी ऐसे व्यक्ति को बैठाने के लिए किया गया जो संसदीय रिपोर्टिंग का पर्याप्त अनुभव नहीं रखता. सूत्रों की मानें तो टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पत्रकार दिवाकर के भाई विभाकर की नियुक्ति के लिए ऐसा किया गया है जो दूरदर्शन समाचार में बतौर सलाहकार कार्यरत हैं।

मामला केवल वरिष्ठ पत्रकारों के आवेदन खारिज करने का और योग्यता में घालमेल तक सीमित नहीं है बल्कि कुछ लोगों को रखने के लिए नियुक्ति के विज्ञापन में जबरन जगह भी बनायी गयी है यानी फर्जी पद विज्ञापित किये गए हैं। ऐसा ही एक घपला सीनियर एंकर के विज्ञापन में प्रथम द्रष्टया दिखता है। हिंदी के लिए एक सीनियर एंकर का पद विज्ञापित है लेकिन अंग्रेज़ी में दो सीनियर एंकर के विज्ञापन आये हैं। एक सीनियर एंकर का जो अतिरिक्त पद दिखता है उसमें Economy, Finance and Business लिखा हुआ है जबकि हिंदी में इन विषयों के जानकार एंकर की अलग से ज़रूरत नहीं है। इसकी दो ही व्याख्या हो सकती है- या तो हिंदी के चैनल को Economy, Finance and Business जानने वाले हिंदी एंकर की ज़रूरत नहीं, एक ही एंकर से सारा काम चल जायेगा या फिर अंग्रेजी में किसी बिज़नेस पत्रकार/एंकर को भरती करने के लिए जबरन पद बनाया गया है।

राज्यसभा के सूत्रों की मानें तो यहाँ भी सत्ता पक्ष से जुड़े किसी ख़ास पत्रकार को लाभान्वित करने की कोशिश की गयी है। इस पद पर अब तक इंटरव्यू कॉल नहीं गया है और न ही कोई लिस्ट आई है। माना जा रहा है कि आखिरी वक़्त में इस पद पर नियुक्ति लटक सकती है क्योंकि पद विज्ञापित किये जाने के पीछे जिस वरिष्ठ नौकरशाह का हाथ था पिछले दिनों उसका तबादला कर दिया गया है।

रामबहादुर राय को जब इस गोरखधंधे की जानकारी मिली तो उन्होंने इंटरव्यू बोर्ड में शामिल होने से साफ़ इनकार कर दिया। इसे लेकर राज्यसभा सचिवालय में हड़कंप मचा रहा। दिलचस्प यह है कि अपने चहेते लोगों को ऊंची पगार वाली नौकरियों पर रखने के लिए खुद राज्यसभा टीवी में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकारों के आवेदन को भी खारिज कर दिया गया है।


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