पहला पन्ना: संसद हंगामे की ख़बर भी पी गये, प्रधान प्रचारक की अपील छाप धन्य हुए!


इन सबके मुकाबले द टेलीग्राफ का शीर्षक आज भी हटकर है- “स्पाईवेयर इन टॉपलवेयर” यानी जासूसी के काम आने वाला सॉफ्टवेयर या माालवेयर पेगासुस सरकार गिराने के काम भी आता है। बेशक कर्नाटक में (और फिर शायद मध्य प्रदेश में भी) सरकार गिराकर भाजपा की सरकार बनाने का कारनामा पेगासुस की जासूसी से किए जाने की आशंका है। यह खबर पर्याप्त गंभीर है। लेकिन इसे पहले पन्ने पर नही छापने का मकसद आप समझ सकते हैं। इन्ही खबरों के आधार पर फ्रांस में जांच शुरू हो जाने की खबर भी भारत में छपी है लेकिन भारत में प्रधानमंत्री जो कर रहे हैं उसे भी द टेलीग्राफ ने लीड के साथ पहले पन्ने पर छापा है। शीर्षक है, पेरिस ब्रोब्स, पीएम प्रीन्स। 


संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
मीडिया Published On :


द टाइम्स ऑफ इंडिया आज भी सरकार की सेवा में समर्पित है। अखबार की लीड खबर है, 68% भारतीयों में कोविड एंटीबॉडीज हैं, एक तिहाई इसके शिकार हो सकते हैं। इसके बराबर की खबर का शीर्षक है, “फ्रांस ने पेगासुस जासूसी विवाद की जांच शुरू की और पहले पन्ने की तीसरी प्रमुख खबर है, “केंद्र ने कहा : राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी से किसी मौत की रिपोर्ट नहीं दी।”

आज टाइम्स ऑफ इंडिया में अधपन्ना नहीं है और विज्ञापनों के जैकेट के बाद खबरों  के पहले पन्ने पर मास्ट हेड के नीचे आठ कॉलम की तीन ईंच की करीब पट्टी है। यह सरकारी, बैक ऑफ बड़ौदा का विज्ञापन है। इसमें पेगासुस जासूसी को लेकर लोकसभा स्थगित, राज्यसभा बाधित जैसी हिन्दुस्तान टाइम्स के अधपन्ने की लीड खबर डबल कॉलम में नहीं है। सिंगल में कहीं हो तो मैं नहीं ढूंढ़ सका। सिंगल कॉलम की खबरों में इस खबर को ढूंढ़ते हुए एक खबर का शीर्षक मिला, “कल्याणकारी योजनाएं प्रचारित करें विपक्ष के कोविड हमले का मुकाबला करें।” सिंगल कॉलम की इस खबर के साथ प्रधानमंत्री की स्टांप साइज फोटो भी है।

मुझे लगा यह कोई नया 56 ईंची आदेश होगा लेकिन खबर पढ़ने से पता चला कि यह प्रधान चौकीदार का चौकीदारों के लिए संदेश है यानी प्रचारक प्रधानमंत्री ने अपने प्रचारकों को प्रचार में जुट जाने का आदेश दे दिया है। इसका असर एक हद तक हिन्दुस्तान टाइम्स में भी है। उसने सारी खबरों को अधपन्ने पर निपटा दिया है। खबरों के मुख्य पन्ने पर लीड वही है जो टाइम्स ऑफ इंडिया में अधपन्ने पर है। हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स ने आधे पन्ने से भी ज्यादा विज्ञापन होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट की इस चिन्ता को पहले पन्ने पर जगह दी है, कोई भी पार्टी राजनीति को ठीक करना नहीं चाहती है। जवाब में अच्छी पत्रकारिता का उदाहरण देते हुए तीन कॉलम में छापा है, “स्वास्थ्य पर राजनीति नहीं” : स्वास्थ्यमंत्री ने ऑक्सीजन, टीका और संरचना पर विपक्ष से बचाव किया। प्रचारकों के लिए प्रधानमंत्री के संदेश को हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी प्रमुखता से पर बिना फोटू के छापा है। यहां शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने भाजपा सांसदों से विपक्ष के आरोपों का मुकाबला करने के लिए कहते हुए कहा कि कांग्रेस कोमा में है। 

इसके मुकाबले द हिन्दू में लीड है, “पेगासुस जासूसी विवाद को लेकर संसद में हंगामा।” उपशीर्षक है, “बार-बार की बाधाओं के बीच लोकसभा स्थगित, राज्यसभा में कोविड-19 की स्थिति की चर्चा हुई।”यहां सेकेंड लीड का शीर्षक है, “सरकार बदलने से पहले कर्नाटक में भी जासूसी हुई थी”। इंडियन एक्सप्रेस में भी पेगासस विवाद पर “संसद में हंगामा, विपक्ष ने कहा लोकतंत्र संकट में है, सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराने की मांग शीर्षक खबर सेकेंड लीड है।  

द हिन्दू में आज एक दिलचस्प खबर है। इस खबर के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के दलबदलू विधायक जो तृणमूल छोड़कर इस समय भाजपा में हैं, और नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर विधायक बने हैं, के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक मामला दर्ज किया है। इस खबर के अनुसार बंगाल चुनाव के दौरान शुभेन्दु ने पार्टी समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था, आपमें से जिन लोगों के पास भतीजे (ममता बनर्जी के) के कार्यालय से फोन आता है उनका कॉल रिकार्ड और सारा विवरण मेरे पास है।” यह टिप्पणी दरअसल पुलिस अधिकारियों को संबोधित है और सुवेन्दु अधिकारी का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर घूम रहा है। पुलिस ने इसी आधार पर गोपनीयता कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया है अगर आपके पास राज्य सरकार है तो हमारे पास केंद्र सरकार है। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा है कि श्री अधिकारी की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि भाजपा ने विपक्षी नेताओं की जासूसी करवाई है।

इंडियन एकसप्रेस में पेगासुस से जुड़ी एक और खबर का शीर्षक है, इसे फोन में डालने का खर्च करोड़ों में है। कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसे में भारत में इतने सारे लोगों की जांच अगर भारत सरकार करवा रही है तो जनता के इतने पैसे क्यों खर्च कर रही है, उसका मकसद क्या है, बताना चाहिए। दूसरी ओर, अगर यह काम भारत सरकार नहीं करवा रही है तो भारत के नागरिकों से किसी को क्या सूचना मिल सकती है कि कोई उनपर इतनी बड़ी राशि खर्च कर रहा है। इसकी जांच और अगर यह गलत है तो इसकी रोकथाम का काम सरकार को ही करना चाहिए। पर प्रधानसेवक प्रचारकों से प्रचार करने के लिए कह रहे हैं और गोदी मीडिया खबरों की  जगह प्रचारकों से  प्रधान प्रचारक की अपील छापकर धन्य-धन्य हुआ जा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस में भी आज आधा पन्ना विज्ञापन है। और कर्नाटक की सरकार गिराने के लिए भी पेगासुस का उपयोग किए जाने की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। 

इन सबके मुकाबले द टेलीग्राफ का शीर्षक आज भी हटकर है- “स्पाईवेयर इन टॉपलवेयर” यानी जासूसी के काम आने वाला सॉफ्टवेयर या माालवेयर पेगासुस सरकार गिराने के काम भी आता है। बेशक कर्नाटक में (और फिर शायद मध्य प्रदेश में भी) सरकार गिराकर भाजपा की सरकार बनाने का कारनामा पेगासुस की जासूसी से किए जाने की आशंका है। यह खबर पर्याप्त गंभीर है। लेकिन इसे पहले पन्ने पर नही छापने का मकसद आप समझ सकते हैं। इन्ही खबरों के आधार पर फ्रांस में जांच शुरू हो जाने की खबर भी भारत में छपी है लेकिन भारत में प्रधानमंत्री जो कर रहे हैं उसे भी द टेलीग्राफ ने लीड के साथ पहले पन्ने पर छापा है। शीर्षक है, पेरिस ब्रोब्स, पीएम प्रीन्स। 

इसका मतलब हुआ, फ्रांस जांच कर रहा है और प्रधानमंत्री ‘प्रीन’ कर रहे रहे हैं। प्रीन का मतलब गूगल ने इन शब्दों में बताया है, Usage : Most of the teenagers preen themselves before going to any function. (उपयोग : किसी समारोह में जाने से पहले ज्यादातर किशोर खुद को प्रीन करते हैं) उदाहरण : पति-पत्नी दोनों को मिल-जुलकर विवाहित जीवन को संवारना होता है। अब यहां विवाहित जीवन की बात तो होनी नहीं है। आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि राजनीति सुधारने के लिए प्रधान प्रचारक को प्रचारकों के साथ मिलकर काम करना होता है। प्रचारक को आप चाहें तो प्रधानमंत्री के ही दिए विकल्प (उनका तो है ही नहीं) चौकीदार से बदल सकते हैं।

इस खबर में द टेलीग्राफ ने फ्रांस की तुलना भारत से करते हुए बताया है कि फ्रांस में आरोपों की जांच शुरू हो गई लेकिन भारत में जो हो रहा है वह आश्चर्यजनक तो है पर नया नहीं है या जाना-पहचाना है। रफाल सौदा विवाद में भी फ्रांस ने हाल में जांच के लिए जज की नियुक्ति कर दी है। पर भारत में मांग के बावजूद जांच का कोई  आदेश नहीं दिया गया है। द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर आज एक और खबर है जो दूसरे अखबारों में इतनी प्रमुखता से नहीं है। स्टैन स्वामी की याद में 28 जुलाई को सर्व धर्म न्याय दिवस के रूप में मनाने की अपील। नई दिल्ली डेटलाइन से जारी इस खबर में कहा गया है, …. मकसद मोमेनटम बनाए रखना है ताकि मानवाधिकार, आदिवासी अधिकार और जेल में बंद मानवाधिकार रक्षकों के प्रति लोगों की जागरूकता कायम रखी जा सके। एक तरह से, फादर स्टेन की विरासत को आगे ले जाने के लिए। इसे स्थानीय स्तर पर आयोजित किया जाएगा और प्रांतीय स्तर पर संयोजन किया जाएगा।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।


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