राजदीप समेत छह वरिष्ठ पत्रकारों पर राजद्रोह की FIR, एडिटर्स गिल्ड ने की निंदा!


दरअसल, 26 जनवरी को आईटीओ पर एक नौजवान प्रदर्शनकारी की मौत हो गयी थी। किसानो ने दावा किया था कि उसकी मौत गोली लगने से हुई। इसी आधार पर शुरुआत में पत्रकारों ने ट्वीट किया था। बाद में पुलिस ने दावा किया कि मौत ट्रैक्टर पलटने की वजह से हुई तो इसकी जानकारी देते हुए पुराना ट्वीट हटा लिया गया था। किसी भी हंगामे के दौरान ऐसा होना स्वाभाविक है, लेकिन लगता है कि बीजेपी को मौक़ मिल गया। ये सारे पत्रकार वे हैं जो लंबे समय से बीजेपी के निशाने पर रहे हैं।




26 जनवरी को हुई हिंसा को लेकर बीजेपी सरकारों ने अब देश के कई वरिष्ठ पत्रकारों को निशाना बनाया है। नोएडा पुलिस ने ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए हंगामे के लिए वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडेय सहित छह पत्रकारों और कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है।

इस सिलसिले में नोएडा के सेक्टर-20 थाने में सुपरटेक केपटाउन निवासी अर्पित मिश्रा ने रिपोर्ट दर्ज करायी थी। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में उपद्रव के दौरान कुछ लोगों ने अपमानजनक, गुमराह करने और उकसाने वाली खबर सोशल मीडिया पर प्रसारित की थी कि पुलिस ने ट्रैक्टर चालक किसान की गोली मारकर हत्या कर दी है।  सुनियोजित षड्यंत्र के तहत इस तरह की झूठी सूचनाएं प्रसारित की गईं। प्रदर्शनकारियों को भड़काने के उद्देश्य से जानबूझकर ऐसा किया गया। इस कारण प्रदर्शनकारी लाल किला परिसर तक पहुंच गए और वहां धार्मिक व अन्य झंडे लगा दिए तथा पुलिसकर्मियों पर हमला किया।

एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि अर्पित मिश्रा की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 153ए, 153बी,295ए, 504, 506, 124 (ए)120 बी, आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल जांच की जा रही है।

जिन पत्रकारों पर एफआईआर हुई है उनमें  राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडेय, जफर आगा, परेशनाथ, अनंत नाथ व विनोद जोस शामिल हैं। सभी राजद्रोह और शांति भंग, धार्मिक भावनाएं आहत करने तथा आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

दरअसल, 26 जनवरी को आईटीओ पर एक नौजवान प्रदर्शनकारी की मौत हो गयी थी। किसानो ने दावा किया था कि उसकी मौत गोली लगने से हुई। इसी आधार पर शुरुआत में पत्रकारों ने ट्वीट किया था। बाद में पुलिस ने दावा किया कि मौत ट्रैक्टर पलटने की वजह से हुई तो इसकी जानकारी देते हुए पुराना ट्वीट हटा लिया गया था। किसी भी हंगामे के दौरान ऐसा होना स्वाभाविक है, लेकिन लगता है कि बीजेपी को मौक़ मिल गया। ये सारे पत्रकार वे हैं जो लंबे समय से बीजेपी के निशाने पर रहे हैं।

नोएडा पुलिस की इस कार्रवाई पर एडिटर्स गिल्ड ने कड़ी प्रतिक्रिया जतायी है और एफआईआर तुरंत रद्द करने की मांँग की है।

 

बहरहाल, सरकार के दबाव का आलम ये है कि इंडिया टुडे चैनल ने राजदीप सरदेसाई को दो हफ्तों के लिए ऑफ एयर कर  दिया है और महीने भर की तनख्वाह काट ली है। चर्चा है कि इससे नाराज़ राजदीप ने चैनल से इस्तीफ़ा दे दिया है। हालाँकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

 


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