‘गोदी मीडिया’ की नाक काटते किसानों के चाकू पर एडिटर्स गिल्ड की धार!

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दिल्ली घेर कर बैठे किसानों के निशाने पर मोदी सरकार के अलावा भारत का कथित मुख्यधारा मीडिया भी है। तमाम टीवी चैनल के पत्रकारों को न सिर्फ़ किसान देखते ही खेद दे रहे हैं बल्कि प्लेकार्ड दिखाकर ‘गोदी मीडिया’ को दूर रहने की चेतावनी भी दे रहे हैं। वहीं मीडिया के ऑनलाइन छोटे प्लेटफार्म हाथो हाथ लिये जा रहे हैं। इस सबके बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने कुछ मीडिया संस्थानों की ओर से आंदोलनकारियों को खालिस्तानी और देशद्रोही कहे जाने पर कड़ा ऐतराज़ जताया है।

दिल्ली की ऐतिहासिक घेरेबंदी कर रहे किसानों की शिकायत है कि ज़्यादातर टीवी चैनल और प्रिंट मीडिया उनके आंदोलन को बदनाम कर रहे हैं। यहाँ तक कि कई ने उन्हें खालिस्तानी और देशद्रोही साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसे में ये लोग आंदोलन से जितना दूर रहें , उतना बेहतर। उनका कहना है कि मीडिया विजिल जैसे तमाम छोटे-छोटे मीडिया प्लेटफार्म उनकी बातों को पूरी दम के साथ रख रहे हैं। ये जनता के मीडिया हैं, इनका आंदोलन में पूरा स्वागत है। लेकिन ज़हरबुझे चककम चैनलों को आंदोलन स्थल पर घुसने भी नहीं दिया जायेगा।

इधर, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की अध्यक्ष सीमा मुस्तफ़ा, महासचिव संजय कपूर  और कोषाध्यक्ष अनंत नाथ की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि बिना किसी सबूत के आंदोलनकारी किसानों को खालिस्तानी और देशद्रोही कहने से मीडिया कि साख को कमज़ोर करता है। मीडिया को तथ्यात्मक और निष्पक्ष ढंग से आंदोलन को कवर करना चाहिए।

 

पढ़ें एडिटर्स गिल्ड की ओर से 4 दिसंबर को जारी किया गया पत्र-

 

 

 

 


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