विवाद के बाद भी यूरोपीय सांसदों का बयान खबर है !

संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
मीडिया Published On :


जम्मू कश्मीर में नई सुबह, दो नए केंद्र शासित प्रदेशों ने लिया आकार, इतिहास-भूगोल बदला : केंद्र शासित प्रदेश अब 9, राज्य 28 हुए – अमर उजाला ने बताया यह तो ठीक है। पर प्रायोजित दौरे पर निजी हैसियत से आए विदेशी सांसदों का देश के अंदरुनी मामले में बयान खबर कैसे है? दलालों पत्रकारिता पढ़ो।

भारतीय जनता पार्टी जब सत्ता में नहीं थी तो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करती थी। यह अलग बात है कि दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से बुरी तरह हारने और लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को दिल्ली की एक भी सीट नहीं जीतने देकर भी भारतीय जनता पार्टी अब दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मामले में रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए है। व्हाट्सऐप्प पर जो घूम रहा है वह अपनी जगह। मैं उसकी चर्चा नहीं करूंगा क्योंकि उसका कोई आधार नहीं है या उसके अधिकृत होने की कोई जानकारी मेरे पास नहीं है। फिलहाल तो यह कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करने वाली भाजपा की रणनीति और राजनीति चाहे जो हो, केंद्र में दोबारा सत्ता में आने और 303 सांसदों का बहुमत पाकर संसद में जयश्रीराम का नारा लगाने वाली पार्टी ने कश्मीर को एक अलग राज्य से नीचे कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया है।

स्वतंत्रता के समय से कश्मीर को मिले विशेष अधिकारों को खत्म करने के नाम पर अनुच्छेद 370 हटाने और इसके लिए वहां की जा रही जबरदस्ती तथा कश्मीर के लोगों के अधिकारों को लंबे समय तक बाधित रखने वाली सरकार जनसंपर्क या प्रचार के मामले में इस समय एक मुश्किल स्थिति में है। ऐसे समय में उसका क्रांतिकारी या वीरतापूर्ण निर्णय (जो दूसरे निर्णयों की तरह ही बिना सोचे-समझे लिया गया लगता है) आज से लागू हो गया। सरकार अपने इस निर्णय के बारे में अब चाहे जो सोचती हो आज से इसे लागू होना बड़ी खबर है। लेकिन सरकार को मुश्किल में डालने वाली खबरों को घुमा-फिराकर इधर-उधर कर देने वाले देश के मीडिया के बड़े हिस्से ने आज भी वही किया है। वैसे तो यह संपादकीय आजादी और विवेक का मामला है लेकिन अभिनंदन को रिहा किया जाएगा और रिहा कर दिया गया – दो दिन लगातार लीड बनाने वाले अखबारों ने कश्मीर को दो हिस्से में बांटने की खबर लागू होने के दिन पहले पन्ने पर नहीं छापें तो मामला रेखांकित करने लायक है।

वैसे भी, सरकार की कश्मीर नीति को लागू करने के लिए बिहार से कश्मीर लाए गए राज्यपाल को उनके पद के अनुकूल गोवा का राज्यपाल बनाया गया है और केंद्रशासित क्षेत्रों के लिए दो नए उपराज्यपाल बनाए गए हैं जो आज से कार्यभार संभालेंगे। निश्चत रूप से यह पहले पन्ने की बड़ी खबर है। इसीलिए प्रायोजित दौरे पर निजी हैसियत से कश्मीर घूमने आए यूरोपीय यूनियन के विदेशी सांसदों ने आतंकवाद पर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया है। इस दौरे से संबंधित जो जानकारी पिछले दिनों सामने आई उससे तो यही लगता है कि यह दौरा इसी उद्देश्य से प्रयोजित कराया गया था कि आज कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने की खबर के साथ सरकार के स्टैंड को विदेशी समर्थन भी छपता और भारत में सरकार के विरोधियों को बताया जाता और भक्तों से कहलवाया जाता कि देखो विदेशी सांसद भी सरकार की कार्रवाई को ठीक बता रहे हैं। इस काम के लिए एक घोषित अंतरराष्ट्रीय कारोबारी दलाल की सेवाएं लेने की पोल खुलने से सब गुड़ गोबर हो गया।

इस क्रम में आज द टेलीग्राफ में नई दिल्ली डेटलाइन से प्रकाशित अनिता जोशुआ की एक खबर उल्लेखनीय है। इस खबर का शीर्षक है, “सरदार (बल्लभ भाई पटेल) इतिहास निर्माता (अमित) शाह के लिए सीख”। इसमें कहा गया है, माकपा और भाकपा ने बुधवार को देश को अमित शाह “निर्मित” इतिहास से सतर्क करना चाहा है और कहा है कि यह रिकार्ड का मामला है कि अनुच्छेद 370 का मसौदा तैयार करने में सरदार बल्लभ भाई पटेल भी शामिल थे। भले ही मौजूदा गृहमंत्री कुछ और दिखाना चाहते हैं। वामपंथी पार्टियों की यह चेतावनी जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने की तारीख गुरुवार, 31 अक्तूबर के मौके पर आई है जो देश के पहले गृहमंत्री, सरदार पटेल का जन्म दिन भी है। भाजपा ने इन्हें अपना लिया है और अपने सभी देवताओं के मंदिर में शामिल कर लिया है।

इस खबर के अनुसार माकपा पोलितब्यूरो ने एक बयान में कहा है, इस तारीख का चुनाव करके सरकार इतिहास गढ़ने के अमित शाह के फार्मूला को लागू कर रही है और सच्चाई को खत्म कर दे रही है। यह रिकॉर्ड का मामला है और बल्लभ भाई पटेल के संस्मरण में भी है कि वे न सिर्फ इसमें शामिल थे बल्कि अनुच्छेद 370 का मसौदा तैयार करने से भी जुड़े रहे थे। 15 और 16 मई 1949 को उनके घर पर ही जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने पर जवाहरलाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला के बीच चर्चा हुई थी। …. नेहरू की अनुपस्थिति में पटले ने ही अनुच्छेद 370 को संविधान सभा में पेश किया था। … माकपा ने अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीर की विशेष स्थिति को खत्म करने के केन्द्र सरकार के निर्णय पर अपना विरोध दोहराया है।

कहने की जरूरत नहीं है कि अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ ने पहले पन्ने पर इसे प्रमुखता से छापा है और हम कहां आ गए हैं के तहत पहले पन्ने पर लीड के शीर्षक से ऊपर बड़े अक्षरों में रेखांकित कर लिखा है, “एक राज्य के रूप में जम्मू और कश्मीर के अंतिम दिन मोदी सरकार को एक ऐसे व्यक्ति ने सलाह दी जिस पर वह निर्वाचित भारतीयों से ज्यादा भरोसा करती है। जर्मनी के धुर दक्षिणपंथी दल के यूरोपियन पार्लियामेंट के एक सदस्य निकोलस फेस्ट ने बुधवार को श्रीनगर में कहा, मैं समझता हूं कि अगर आप यूरोपीय यूनियन के सांसदों को आने दे सकते हैं तो भारत में विपक्षी दलों के सांसदों को भी आने देना चाहिए। बाद में कश्मीर की पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया में एक कार्टून ने पुराने समय के घृषित आदेश, ‘कुत्तों और भारतीयों को इजाजत नहीं है’ का उल्लेख किया।” अखबार में पहले पन्ने पर तो कश्मीर है ही अंदर भी है।

हिन्दुस्तान टाइम्स में नए कश्मीर की शुरुआत या पुराने के अंत पर कोई खबर नहीं है। “यूरोपीय यूनियन के सांसदों का दौरा विपक्ष की निन्दा के बीच खत्म” शीर्षक से एक खबर जरूर है। इसके साथ बॉक्स में एक खबर है, माडी शर्मा पर धमाके की तैयारी। जम्मू कश्मीर को आज दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटा जाएगा यह खबर अखबार में अंदर है। आज की दूसरी खबरों के मुकाबले यह खबर पहले पन्ने पर क्यों नहीं है, आप समझ सकते हैं। इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने की खबर का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस प्रकार होगा, “घाटी में राजनीतिक जगह बनाने की
कोशिशों के बीच जम्मू और कश्मीर आज केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा”।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर इस खबर को लीड बनाया है, शीर्षक हिन्दी में होता तो कुछ ऐसा होता, जम्मू और कश्मीर का आज से नया दर्जा, आधिकारिक तौर पर राज्य नहीं रहा।
हिन्दी अखबारों में नवोदय टाइम्स में टॉप सिंगल कॉलम है, आज से नया जम्मू कश्मीर। पहले पन्ने पर ही यूरोपीय संघ के सांसदों के दौरे की खबर, प्रियंका का कटाक्ष और वैश्विक मीडिया ने की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग जैसी खबरें भी है। राजस्थान पत्रिका में पहले पन्ने पर लीड है, “घाटी से लौटे विदेशी सांसद : कहा आतंक के जंग में हम भारत के साथ”। अखबार ने अपनी मुख्य खबर के साथ विपक्षी नेताओं को भी कश्मीर जाने देने की की यूरोपीय यूनियन के सांसद की बात के साथ, भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान भी छापे हैं। शाहनवाज हुसैन ने कहा है, कश्मीर में हालात सामान्य होते ही सभी प्रतिबंधों से रोक हटा ली गई है। हमारे पास छिपाने को नहीं, सिर्फ दिखाने को है। कश्मीर जाना है तो कांग्रेस नेता भी जा सकते हैं।

अमर उजाला ने टॉप पर सात कॉलम में खबर छापी है, शीर्षक है, जम्मू कश्मीर में आज नई सुबह, दो नए केंद्र शासित प्रदेशों ने लिया आकार। इसके साथ ही अखबार ने यह भी बताया है, सरदार की जयंती पर जम्मू कश्मीर और लद्दाख हुए अलग। इतिहास भूगोल बदला : केंद्र शासित प्रदेश अब 9, राज्य 28 (हुए)। मुख्य खबर का शीर्षक है, घाटी में असली समस्या आतंकवाद, दूसरा अफगानिस्तान नहीं बनने देंगे : ईयू सांसद। इसमें विदेशी सांसदों को आमंत्रित करने से संबंधित विवाद का जिक्र नहीं है। प्रियंका गांधी की एक छोटी खबर जरूर है, …. मादी शर्मा को लेकर सरकार को घेरा।

दैनिक जागरण का मुख्य शीर्षक आठ कॉलम में है, एक देश, एक विधान और एक निशान का सपना साकार। इसके अलावा, श्रीनगर डेटलाइन की एक खबर राज्य ब्यूरो की है। इसका शीर्षक है, अनुच्छेद 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला। उपशीर्षक है, यूरोपीय संघ के सांसदों ने पाकिस्तान के दुष्प्रचार की हवा निकाली। अंदर एक खबर होने की सूचना है, दौरे को लेकर विवाद अनावश्यक। इसका मतलब यह भी है कि सरकार जो करना चाहेगी करेगी, करने देना चाहिए, विरोध करने का कोई मतलब नहीं है। हम भी खबर अंदर के पन्ने पर ही छापेंगे। अंतरराष्ट्रीय दलाल की सेवाएं लेने पर सवाल नहीं उठाएंगे।

नवभारत टाइम्स में यह दो कॉलम की खबर है, यूरोपीय सांसद बोले, आंखें खुल गईं, हम भारत के साथ। इसके साथ सिंगल कॉलम में सात लाइनों की खबर है, आज से दो-दो केंद्र शासित प्रदेश। विवादों में विदेशी सांसदों का दौरा, यात्रा के खर्च को लेकर उठे सवाल और कौन हैं, ईयू सांसदों का दौरा आयोजित करने वाली मादी शर्मा – खबरें अंदर होने की सूचना है। दैनिक हिन्दुस्तान ने इस खबर को लीड बनाया है। मुख्य शीर्षक है, 370 पर यूरोपीय सांसदों का साथ। कहने की जरूरत नहीं है प्रायोजित दौरे पर आए सांसदों से यही उम्मीद थी और संवाददाताओं के प्रायोजित दौरे की खबर के साथ ऐसी सूचना रहती है। इस खबर के साथ सूचना भले नहीं है पर लोग जानते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह शीर्षक लीड के लायक नहीं है। और आज के अखबारों में यही सबसे स्पष्ट शीर्षक है जो यूरोपीय सांसदों का दौरा कराने का उद्देश्य रहा होगा। और इसीलिए फ्लैग शीर्षक है, समर्थन : कश्मीर दौरे के बाद बोले – अनुभव आंखें खोलने वाला रहा, विदेशी मीडिया का रवैया पक्षपातपूर्ण। इसके साथ जम्मू- कश्मीर और लद्दाख आज से केंद्रशासित प्रदेश भी खबर है और इसके साथ यह भी बताया गया है कि कौन से बड़े बदलाव होंगे। खबर में सांसदों के दौरे से संबंधित कोई विवाद नहीं है।

दैनिक भास्कर ने भी जम्मू और कश्मीर के राज्य के रूप में अंतिम दिन होने या इन्हें दो नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने और नाम बदले जाने की खबर को पहले पन्ने पर नहीं रखा है। विदेशी सांसदों के बयान के जिस अंश को शीर्षक बनाया है उससे यह खबर दो कॉलम की रह गई है। और इसके साथ प्रियंका गांधी का तंज भी है पर विदेशी सांसदों को प्रायोजित दौरे पर बुलाने से संबंधित विवाद पहले पन्ने पर नहीं है और ना अंदर ऐसी खबर होने की सूचना है। कश्मीर में बंद से एक लाख लोगों का रोजगार थिना और एक लाख करोड़ का नुकसान शीर्षक खबर अंदर के पन्ने पर होने की सूचना है जो दूसरे अखबारों में नहीं दिखी।


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