Republic TV के ब‍हाने टीवी समाचार चैनलों की भूमिका के तीन नए आयाम

मीडिया विजिल मीडिया विजिल
अभी-अभी Published On :


दि इंडियन एक्‍सप्रेस में शैलजा बाजपेयी लंबे समय से मीडिया पर अपना स्‍तंभ लिख रही हैं। 11 मई को लिखे स्‍तंभ में उन्‍होंने दो-तीन मोटी बातें रिपब्लिक चैनल के हवाले से गिनवाई हैं जिन्‍हें पढ़ा जाना चाहिए।

”ऑन द रन” के शीर्षक से लिखे अपने स्‍तंभ में शैलजा एक ज़रूरी बात की ओर इशारा करती हैं जिसकी ओर अब तक हमारा ध्‍यान नहीं गया था। वो ये, कि रिपब्लिक टीवी चौबीस घंटे का प्रसारण केवल एक या ज्‍यादा से ज्‍यादा दो खबरों से ही निकाल दे रहा है और दिन भर की नियमित खबरें नहीं चला रहा। वे लिखती हैं, ”ये लोग बिना दिन भर की खबर दिखाए समाचार चैनल चला रहे हैं।” वे लिखती हैं कि पहले भी ऐसा हुआ था, मसलन तब, जब जे. जय‍ललिता का निधन हुआ, लेकिन वह एक ”डेवलपिंग” स्‍टोरी थी। आज की खबरों से उसका अंतर दिखाते हुए शैलजा लिखती हैं, ”ये खबरें चैनल खुद डेवलप कर रहे हैं।” यह एक बड़ा फर्क है जिसे दर्ज किया जाना चाहिए।

दूसरी अहम बात जिसकी ओर कई टिप्‍पणीकारों का ध्‍यान गया है, वो यह है कि आज की तारीख में तमाम समाचार चैनल एकतरफा तरीके से विपक्ष के नेताओं के खिलाफ़ खबरें चला रहे हैं- सोनिया गांधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव, केजरीवाल, लालू प्रसाद यादव, शशि थरूर। वे कहती हैं कि रिपब्लिक टीवी और उसके प्रस्‍तोता अर्णब गोस्‍वामी ने  अपना समय पूरी विनम्रता से विपक्ष को दिया है, जिसे ”राष्‍ट्रद्रोही” कहना उसे भाता है।

इसी संदर्भ में वे तीसरी अहम बात कह जाती हैं कि जिन चैनलों को शासकों का वॉचडॉग होना चाहिए था, वे अब विपक्ष के वॉचडॉग बन गए हैं। टीवी चैनलों की भूमिका में जुड़ा यह नया आयाम है। पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

Related



मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।