चिली: हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति ने आपातकाल लगाया, 15 लोगों की मौत

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लातिन अमेरिकी देश चिली में चिली में मेंट्रो किराए में वृद्धि के बाद जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. वहां पिछले 6 अक्टूबर से सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन चल रहा है. हिंसक विरोध प्रदर्शन को देखते हुए चिली के राष्ट्रपति ने राजधानी समेत पांच शहरों में शनिवार सुबह से आपातकाल लगा दिया है.

राष्ट्रपति सेबेस्टियन पिनेरा ने कहा, “मैंने आपातकाल की घोषणा कर दी है और हमारे देश के आपातकालीन कानून के प्रावधानों के अनुसार, मेजर जनरल जेवियर इटुरियागा डेल कैंपो को राष्ट्रीय रक्षा प्रमुख नियुक्त किया है.”

इस हिंसक प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति पिनेरा ने विपक्षी दलों के साथ बैठक की है. पिनेरा ने एक बयान में कहा, “आपातकाल लगाने का मकसद बहुत सरल लेकिन बहुत गंभीर है : सैंटियागो के निवासियों के लिए सार्वजनिक व्यवस्था और शांति सुनिश्चित करना.”

इस हिंसक प्रदर्शन में अब तक 15 लोग मारे जा चुके हैं. बीते शुक्रवार को, प्रदर्शनकारियों की शहर के कई हिस्सों में दंगा पुलिस के साथ झड़प हुई और कई स्टेशनों पर हमलों के बाद मेट्रो सेवा को बंद कर दिया गया.शहर में कई जगहों पर हुई हिंसा के दौरान करीब 16 बसों को आग लगा दी गई और एक दर्जन मेट्रो स्टेशन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए.

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि राष्ट्रपति पिनेरा को छात्रों,प्रदर्शनकारियों तथा सभी के मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए. आपातकाल लगाना और सेना को सड़क पर उतारने से मानवाधिकारों के उल्लंघन में बढ़ोतरी होगी.

आपातकाल की घोषणा के बाद सड़कों पर जन प्रदर्शनों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है. बावजूद इसके वहां प्रदर्शन जारी है.

आपातकाल घोषित किए क्षेत्रों में मेट्रोपॉलिटन रीजन (जहां सैंटिआगो स्थित है) तारापाका, एंटोफैगस्टा, कोक्विम्बो, वालपारासियो, मौले, कंसेप्सियन, बायो बायो, ओ-हिगिस, मैगलन और लॉस रियोस शामिल हैं.

दुकानों और शापिंग मालों में लूट शुरू हो चुकी है.चिली के संविधान के मुताबिक आपातकाल 15 दिनों से अधिक जारी नहीं रह सकता है.

चिली में जो कुछ हो रहा है वह वॉल स्ट्रीट और आईएमएफ के इशारे पर काम करने वाली चिली सरकार की नवउदारवादी आर्थिक नीतियों का एक लक्षण है. चिली में अभी जो कुछ हो रहा है वो 1973 की अगस्तो पिनोचे की तानाशाही की याद दिलाता है जिसने सल्वाडोर अलांदे की तख्तापलट कर देश को बर्बाद कर दिया था. सल्वाडोर अलांदे दुनिया के पहले मार्क्सवादी राष्ट्राध्यक्ष थे. वे बदलाव लाना चाहते थे लेकिन कई लोगों को ये पसंद न था.

11 सितंबर 1973 को चिली के राष्ट्रपति सल्वाडोर अलांदे की मृत्यु एक सैन्य तख्तापलट अभियान के दौरान हो गई थी. वे दुनिया के पहले लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मार्क्सवादी राष्ट्राध्यक्ष थे. 1970 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने चिली में कई आर्थिक सुधार किए. उनके सुधार कार्यक्रम में खनन उद्योग का राष्ट्रीयकरण भी शामिल था. राष्ट्रपति अलांदे का ये कदम विपक्ष और अमरीका की तत्कालीन सरकार को नागवार गुजरा था.


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