MP: विजयवर्गीय के चरणों में लोट गया भास्‍कर, चुनाव से पहले अख़बार बने नेतापुत्रों के लॉन्‍चपैड

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मीडियाविजिल प्रतिनिधि / इंदौर

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और इनकी तैयारियां भी नज़र आने लगी हैं। हालांकि ये तैयारी के लिए कोई बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती क्योंकि ये उन माध्यमों को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं जो कई बार जनता के वोट के फैसले को तय करते हैं।

प्रदेश का सबसे ज़्यादा सर्कुलेशन वाला अखबार दैनिक भास्कर भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पैरों में लोटता नज़र आ रहा है। इंदौर के नज़दीक महू संस्करण ने विजयवर्गीय के प्रयासों से विधानसभा के विकास को एक पूरा कलेंडर समर्पित कर दिया है। पत्रकारिता में नैतिकता की सीमाएं लांघते हुए अखबार ने ‘कैलाश विजयवर्गीय के प्रयासों से विकास की ओर अग्रसर आदर्श महविधानसभा महू की गौरवगाथा वाले भास्कर कैलेंडर 2018’ शीर्षक नाम से एक खबर भी 2 जनवरी के अंक में प्रकाशित की है।

खबर की तस्वीर में विजयवर्गीय का बेटा आकाश है और साथ में दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ और रिपोर्टर हैं। कुछ स्थानीय नेता भी यहां मौजूद हैं।

कांग्रेस के वंशवाद की आलोचना करते रहने वाले कैलाश विजयवर्गीय अपने पुत्र आकाश के पैर राजनीति में जमाना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें सबसे मुफ़ीद अपनी ही महू सीट लगती है। आकाश को काम सिखाने और संभालने का ज़िम्मा कुछ स्थानीय नेताओं का है। ये नेता पहले खुद ही विधायक पद के दावेदार माने जाते थे लेकिन इंदौर से कैलाश के आने के बाद इनकी उम्मीदें तकरीबन ख़त्म हो चुकी हैं।

कैलाश विजयवर्गीय द्वारा आकाश को क्षेत्र में लोकप्रिय बनाने का ज़िम्मा दैनिक भास्कर अखबार ने भी उठाया है। इसके लिए लगातार विज्ञापनों और दावतों की डील हुई है। विधायक पुत्र इलाके में चाहे कुछ भी करता हो अखबार का ज़िम्मा उसे छापना है। भास्कर के मुताबिक आकाश क्षेत्र की युवा तरुणाई है।

महू ही नहीं अखबार कई जिलों में मंत्री पुत्रों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लिए हुए हैं। इनमें प्रदेश सरकार के लगभग सभी मंत्री और बड़े भाजपा नेता पुत्रों के लिए मैदान या लॉन्चिंग पैड बनाया जाना है। दमोह से जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ के लिए तो वहीं गढ़ाकोटा (सागर) से गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक के लिए, ग्वालियर क्षेत्र में नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र देवेंद्र के लिए अखबार काम करते नज़र आ रहे हैं।

ऐसे में ज़ाहिर है अखबार इन हाउस मेड युवा नेताओं को जनता पर थोप रहे हैं। भीतरखाने लोग इस सबसे नाराज़ तो हैं लेकिन मुनाफे के सामने अखबार इसे समझने को तैयार नहीं।


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