छपास रोग के मारे, मोदी के मंत्री बेचारे !

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अब यह बात वाकई अजीब लगने लगी है, इसलिए पब्लिक दायरे में शेयर कर रहा हूं। लगभग रोज ही किसी केंद्रीय मंत्री या सत्तापक्ष के किसी न किसी सांसद का फोन आ रहा है- एनबीटी एडिट पेज के लिए लिखना चाहता हूं। या फलां चीज पर एक बहुत अच्छा लेख लिखा है, प्लीज जरा देख लीजिएगा। इस अखबार में यही काम करते मुझे आठ साल होने जा रहे हैं। इससे पहले और कई अखबारों में भी कमोबेश इसी तरह का काम किया। लेकिन नेताओं में ऐसी छपास की बीमारी पहले कभी न सुनी न देखी। आप अगर कभी अपने लिखने-पढ़ने के लिए जाने जाते रहे हों तो भी कोई बात होती। मुझे पता है कि अपने सेक्रेटरी या किसी भाड़े के लेखक से लिखवा कर कुछ भेज देंगे। कोई नितांत मजबूरी न आ जाए तो ऐसी चीजें मैं इस जीवन में छापने से रहा। मेरी चिंता दूसरी है। आखिर बात क्या है जो इतने ताकतवर लोग अचानक छपने के लिए लालायित हो उठे हैं? क्या टीवी से प्रोफाइल नहीं बन पा रहा है? क्या अपने ही पार्टी के लुच्चों ने वहां की सारी जगह छेंक ली है और सो कॉल्ड सीरियस लोग कौड़ी के तीन हो गए हैं? आपकी क्या राय है मितरों?

 

(वरिष्ठ पत्रकार चंद्रभूषण की फ़ेसबुक पोस्ट)


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