लापता नजीब की माँ के विलाप और बहन के श्राप से डरो संपादकों !

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किसी के ग़म से अपना चूल्हा न जलाये मीडिया, बद्दुआ लगेगी ! हमें जेएनयू के छात्रों की ज़िंदगी की क़ीमत पर नजीब नहीं चाहिए !

जेएनयू में बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रहे नजीब अहमद के लापता हुए करीब 10 दिन होने को हैं। छात्रों का ग़ुस्सा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उन्हें हर क़दम जोश के साथ होश न खोने की नसीहत दे रही हैं सदफ़ मुशर्रफ़। सदफ़ यानी नजीब की बहन जो भाई के लापता होने की ख़बर पाने के तुरंत बाद  अपनी माँ के साथ जेएनयू पहुँच गई थीं। अब ये माँ-बेटी छात्रों के इस आंदोलन का हिस्सा हैं और ज़माने भर में बदनाम किए गये जेएनयू कैंपस को सलाम कर रही हैं जिसने उनके घर के लड़के को इस क़दर अपना भाई बना लिया। दुनिया के किसी कोने में ऐसा नहीं होता होगा जैसा जेएनयू में हो रहा है-उनका दावा है।

लेकिन मीडिया के रुख़ से इन्हें बेहद परेशानी है। जिस तरह मीडिया किसी की बात का संदर्भ काटकर एक-दो शब्दों को लेकर खेल करता है, उससे वे बेहद मायूस हैं। कल यानी 23 अक्टूबर को जेएनयू परिसर में छात्रों ने मानव शृंखला बनाकर विरोध जताया था। वीसी गेट पर हुई सभा में सदफ़ ने जो कहा वह एक आम आदमी की बेबसी और मीडिया के बदमाशी का सबूत है। सदफ़ ने कहा—

”मैं मीडिया से गुज़ारिश कर रही हूं कि अल्फाज़ तोड़कर ना दिखाए। मैं उस चीज़ के ख़िलाफ़ पूरी संजीदगी से ऐतराज़ जता रही हूँ कि उसके ख़िलाफ़ कोई एक लफ़्ज़ बोला, उसमें आगे का लफ्ज़ काटके, एक छोटा लफ्ज़ दिखाके पूरा डीबेट कर डाला. वो (मीडिया) अपनी हल्की मानसिकता मत दिखाएँ। किसी के ग़म से अपने घर का चूल्हा ना जलाएँ। ये बहुत ग़लत बात है। आहें लगती हैं। बद्दुआएं भी लगती हैं। उन बद्दुआओं से वो लोग डरें। मां के दिल की आह किसी को लग गई तो बहुत बुरा अंजाम हो जाता है। दुनिया यह जानती है।

5 मिनट आठ सेकेंट का यह वीडियो किसी छात्र ने अपने मोबाइल से बनाकर यूट्यूब पर डाला है। सदफ़ के भाषण के दौरान नजीब की माँ के सब्र का बाँध टूट गया। उस मर्मांतक विलाप के बीच सदफ़ ने छात्रों को क़ानून के दायरे में रहते हुए आंदोलन करने की नसीहत दी ताकि जेएनयू को बदनाम न किया जा सके। सदफ़ कहती हैं कि उन्हें नजीब चाहिए, लेकिन जेएनयू के छात्रों की ज़िंदगी और सेहत की क़ीमत पर नहीं। उन्होंने मीडिया से जो कहा, वह इस वीडियो के अंतिम 30 सेकेंडों में दर्ज है। देखें—


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