‘थर्ड फ्रंट’ के दिन गए, वाम को स्वतंत्र हैसियत बनानी होगी-प्रकाश करात

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प्रश्न-
 सीपीएम का मसौदा प्रस्ताव कहता है कि धर्म निरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों को साथ लाकर भाजपा को हराना पार्टी का मुख्य काम है, लेकिन बिना कांग्रेस को साथ लिए, क्या यह विरोधाभास नहीं है?

प्रकाश करात : यह कोई विरोधाभास नहीं है। ऐसा केवल उन्हें लगता है जो चुनाव को केवल नम्बरों का खेल समझते हैं, जिसके लिए कुछ पार्टियों को साथ में लाना होता है। हमारे लिए यह राजनीतिक लड़ाई है। हमारे लिए इसका मतलब है मोदी सरकार और उसकी आर्थिक-सामाजिक नीतियों से लड़ने के लिए जनता को प्रभावी ढंग से गोलबंद करना। खासतौर पर किसानों, मज़दूरों और मध्यवर्ग को जो सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। कांग्रेस का वर्ग चरित्र वही है जो बीजेपी का है और वह उन्हीं नीतियों पर ज़ोर देती है जिस पर बीजेपी चल रही है। बल्कि इन नीतियों की वही जनक है। ऐसे में जब हम जनता को गोलबंद करने जाएँगे तो काँग्रेस इसमें कभी सहयोगी नहीं हो सकती।

मसौदा प्रस्ताव, इसी राजनीतिक लाइन के आधार पर ज़्यादा से ज़्यादा बीजेपी विरोधी वोट को एकजुट करने के लिए उचित रणनीति बनाने की बात भी करता है

प्रश्न – लेकिन यह सबसे बड़ी धर्मनिरपेक्ष पार्टी के बग़ैर कैसे संभव होगा ?

प्रकाश करात:  1993 में बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के बाद उन राज्यों में चुनाव हो रहे थे जहाँ बीजेपी सरकारें बरख़ास्त कर दी गई थीं, तब पहली बार हमने इस मुद्दे पर चर्चा की थी। हमने कहा था कि बाबरी मस्जिद तोड़ने वाली पार्टी बड़ा ख़तरा है, लेकिन हम कांग्रेस से सहमति नहीं बना सकते। हमने सीमित सीटों पर लड़ने और बाक़ी पर बीजेपी को हराने के लिए प्रचार करने का निर्णय लिया।

प्रश्न – तो आप दोबारा ऐसा करेंगे ?

प्रकाश करात: निर्भर करेगा। ठोस रणनीति अभी तय नहीं की जा सकती।  सही समय पर फ़ैसला होगा। अभी कुछ विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और फिर लोकसभा चुनाव होंगे. तब हम अपनी रणनीति तय करेंगे।

प्रश्न – लेकिन क्या यह रणनीति परोक्ष रूप से कांग्रेस की मदद नहीं करेगी?

प्रकाश करात: यह कुछ पाने और किसी को फायदा पहुंचाने का सवाल नहीं है। हमारी राजनीतिक लाइन है कि पहले पार्टी को स्वतंत्र ताक़त के रूप में विकसित किया जाए।  सीपीएम और वाम कमज़ोर हुआ है। यह ढलान चुनावी स्तर पर नहीं, बल्कि आन्दोलन खड़ा करने और अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के स्तर पर है।

हमारी दूसरी प्राथमिकता वाम लोकांत्रिक विकल्प खड़ा करना है। इस विकल्प में कांग्रेस के लिए जगह नहीं है। जब चुनाव होंगे तब राजनीतिक शक्तियों के अंतर्संबंधों पर विचार करेंगे। सोचेंगे कि कैसे बीजेपी को परास्त करने के लिए अपना हस्तक्षेप कर सकते हैं।

प्रश्न -पिछले चार सालों में बीजेपी लगातार उठान पर है। इसके बावजूद, आपको लगता है कि पिछली पार्टी कांग्रेस में तय की गई लाइन अभी भी कारगर है ?

प्रकाश करात: यह इसलिए कि हम इसको राजनीतिक-वैचारिक लड़ाई के रूप में देखते हैं। अगर हम इसको और प्रभावी तरीके से लड़ पाए तो असर चुनावी नतीजों पर भी दिखेगा। हमारा मसौदा प्रस्ताव कहता है कि भाजपा ने ख़ुद को राजनीतिक रूप से मज़बूत किया है, सवाल यह है कि उसने ऐसा किया कैसे ? हमे लगता है कि सरकार की आर्थिक नीतियों पर सबसे ज़्यादा ज़ोर होना चाहिए।

प्रश्न– असंतोष का मुख्य स्रोत क्या है ? संघर्ष कहाँ हो रहे हैं ?

प्रकाश करात: सबसे ज़्यादा किसानों में…बीजेपी शासित राज्यों में … लोग निकल रहे हैं और जीवन से जुड़े मुद्दों पर गोलबंद हो रहे हैं। यही वह जगह है जहाँ हम व्यापक एकता बना सकते हैं। इस मोर्चे पर कोई भी साथ आ सकता है।

प्रश्न – आप तीन के अलावा अन्य राज्यों में स्वतंत्र रूप से अपना विस्तार करने में क्यों असफल हैं ? बंगाल में भी आपको धक्का लगा है।

प्रकाश करात: हमारा मानना है कि कई राज्यों में बुर्जआ और क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठजोड़ ने हमारा जनाधार खत्म किया। अगर आप अपनी राजनीति को स्वतंत्र रूप से नहीं पेश करेंगे, अगर युवा आपमें और दूसरी पार्टियों में फ़र्क नहीं देखेंगे, तो स्वाभाविक है कि हम उन्हें आकर्षित करने में क़ामयाब नहीं होंगे।

प्रश्न– सीपीआई ने आपके प्रस्ताव को परस्पर-विरोधी कहा है।

प्रकाश करात: हमने उनका प्रस्ताव देखा है।  इसको लेकर उनसे हमारी बात भी हुई है। पिछली कांग्रेस के बाद बीच में ही, पिछले एक साल के दौरान उनकी समझदारी बदली है। हाँ, वे लोकतांत्रिक और सेक्युलर ताकतों की वृहत एकता चाहते हैं जिसमें कांग्रेस के लिए भी जगह हो। हम इससे सहमत नहीं हैं और हमने उन्हें यह बता भी दिया है। सीपीआई और सीपीएम के बीच बुनियादी असहमतियों में एक मुद्दा यह भी रहा है। उन्हें यह परस्पर-विरोधी लगता है, इसी का नतीजा है कि वे कांग्रेस को स्वाभाविक सहयोगी मानते हैं, पर हम नहीं। हमने तमाम मतभेदों के बावजूद साथ काम किया है। हमने अतीत में देखा है कि कांग्रेस को सहयोगी मानने के क्या नतीजे हुए हैं।

प्रश्न- 2019 में अगर 2004 जैसी त्रिशंकु स्थिति हुई तो क्या आप कांग्रेस के साथ दोबारा काम करेंगे ?

प्रकाश करात: 2019 में 2004 जैसी स्थिति के बारे में सोचना फिजूल है। पहले तो हम खुद 2004 जैसी सफलता की उम्मीद नहीं करते। वाम दलों ने 2004 में केरल की 20 में से 18 सीटें जीती थीं। अपने आप में यह एक अपवाद ही था। हम अभी से कुछ नहीं कह सकते कि 2019 में क्या होगा। जब पुल सामने होगा तो हम उसको पार करेंगे। हां, 2004 जैसी एक स्थिति है।2004 की तरह 2019 में भी यह सवाल रहेगा कि केन्द्र में सेक्युलर सरकार आएगी कि नहीं। हम इसको ध्यान में रखेंगे और ऐसी किसी भी परिस्थिति के लिए चुनाव के बाद विचार किया जाएगा।

प्रश्न-क्षेत्रीय पार्टियों के साथ, आपने किसी तरह का राष्ट्रीय गठबंधन बनाने से इंकार किया है?

प्रकाश करात : पहले हम तमाम क्षेत्रीय पार्टियों को एक साथ ला कर तीसरा विकल्प बनाने की कोशिश करते थे..जिसे थर्ड फ्रंट कहने का चलन था… लेकिन हमने अपने अनुभव से जाना है कि यह व्यावहारिक नहीं रहा क्योंकि समय के साथ क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका और चरित्र में  काफ़ी बदलाव आया है। हमारा मुख्य लक्ष्य बीजेपी को रोकना है। हम देखेंगे कि कौन सी पार्टी इसमें भूमिका निभा सकती है और किसके साथ जाने पर हमारे हितों को नुकसान नहीं होगा। सभी लोग कांग्रेस की बात करते हैं, लेकिन तमाम राज्यों में यह क्षेत्रीय पार्टियाँ हैं, जो बीजेपी को रोकने में भूमिका अदा कर सकती हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोकने में क्या काँग्रेस निर्णायक भूमिका अदा करेगी ? या तो यह सपा कर सकती है या बसपा। हर राज्य की अलग स्थिति है।

प्रश्न– मान लीजिए यूपी में सीपीएम, समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करती है और समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ चली जाए ?

प्रकाश करात : हमारे लिए यह बहुत महत्व का मुद्दा नहीं है। जो कोई भी भाजपा को हारते देखना चाहता है, उसे सपा और बसपा को साथ लाने की कोशिश करनी चाहिए। इसका असर पड़ेगा, न कि सीपीएम के किसी के साथ गठबंधन से। असली चीज़ बीजेपी विरोधी ताक़तों को चुनावी युद्ध में साथ लाना है

प्रश्न – क्या आप सपा और बसपा को साथ लाने में भूमिका निभाएंगे ?

प्रकाश करात : ऐसे महात्वाकांक्षी कार्य हमारी क्षमता के बाहर हैं। यह काम ऐसे नहीं हो सकता।

प्रश्न– क्या किसी तरह के राष्ट्रीय गठबंधन के शक्ल लेने की संभावना है ?

प्रकाश करात: मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई गंभीर गठबंधन होगा , लेकिन राज्यों में बीजेपी को रोकने के लिए ऐसा हो सकता है।

प्रश्न– पोलित ब्यूरो में विभाजन है, इसे पार्टी कांग्रेस में कैसे दूर किया जाएगा?

प्रकाश करात : यहां कोई विभाजन नहीं है। हमारी पार्टी में राजनीतिक मुद्दों पर मतभिन्नता हो सकती है। एक ड्राफ्ट पोलित ब्यूरो का था और एक अल्पमत का था। एक ख़ास मुद्दे पर, फौरी रणनीति को लेकर। लेकिन फौरी रणनीतियाँ हमारे लिए बुनियादी महत्व की नहीं होतीं। वह (चुनावी रणनीति) हमारे लिए बेहद कम महत्व रखती है। लेकिन हाँ, राजनीतिक-कार्यनीतिक दिशा हमारे लिए गंभीर विषय है क्योंकि आने वाले तीन सालों तक पार्टी इसी से निर्देशित होती है।

प्रश्न- लेकिन बंगाल लाइन और केरल लाइन तो है ?

प्रकाश करात : मुझे लगता है कि विभाजन की बात बहुत बढ़ा-चढ़ा कर कही जा रही है। पार्टी की केंद्रीय समिति या पोलित ब्यूरो के स्तर पर पूरी पार्टी को लेकर एक समग्र समझ होती है। कोई भी पार्टी के किसी एक हिस्से का प्रतिनिधित्व नहीं करता। ऐसा कोई क्षेत्रीय विभाजन पार्टी में नहीं है।

पार्टी में क्षेत्रीय आधार पर कोई विभाजन नहीं है।

प्रश्न — क्या पोलित ब्यूरो में भी, जहाँ 11 के ख़िलाफ़ 5 वोट पड़े और पाँचों बंगाल के थे।

प्रकाश करात–पार्टी इस पर पहले ही चर्चा कर चुकी है। सभी जानते हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में, हमारी राज्य कमेटी और पार्टी एक ख़ास चुनावी समझदारी की ओर बढ़ना चाहती थी जिसे केंद्रीय कमेटी ने स्वीकार नहीं किया था।

हां, ऐसे मामलों में कई बार मतभिन्नता होती है।  लेकिन इसका मतलब नहीं कि पार्टी में किसी प्रकार का विभाजन है। पार्टी कांग्रेस में इस तरह के सभी मतभेद दूर कर लिये जाएँगे। हमारी पार्टी में पूरी तरह आंतरिक लोकतंत्र है। हम अपने विचार बेहिचक, खुलकर रखते हैं और जो फ़ैसला हो जाता है तो उस पर अमल करते हैं।

प्रश्न– क्या वजह है कि बंगाल, कांग्रेस के साथ सहयोग की लाइन पर चलना चाहता है ?

प्रकाश करात : क्योंकि बंगाल में हालात सामान्य नहीं हैं। बंगाल में ऐसी सरकार है जिसे यकीन है कि सीपीएम को ख़त्म करना उसके अस्तित्व के लिए ज़रूरी है। हमें इसका जवाब देना है।

प्रश्न-आपके और सीताराम येचुरी के मतभेद को लेकर बहुत कुछ कहा गया है।

प्रकाश करात:  हमें भी दूसरी पार्टियों की तरह चित्रित और वर्णित किया जाता है। किसी ज़माने में वे सुन्दरैया बनाम फलां-फलां कहते थे। क्योंकि वे चीज़ों को केवल व्यक्तियों या व्यक्तित्वों के हिसाब से समझ पाते हैं…हमारे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण हैं राजनीतिक मुद्दा जिस पर हम बहस-मुबाहिसा करते हैं।

प्रश्न- क्या अगली पार्टी कांग्रेस में नेतृत्व, महासचिव में कोई बदलाव होगा ?

प्रकाश करात : अभी इस बारे में कोई बात नहीं कर सकते।  पार्टी कांग्रेस में नेतृत्व पर पूरी चर्चा  की जाएगी। एक नई केन्द्रीय समिति बनेगी, नया पोलित ब्यूरो होगा और फिर महासचिव की बात आएगी। राजनीतिक प्रस्ताव और सांगठनिक रिपोर्ट पारित होने के बाद इस पर चर्चा की जाएगी।

प्रश्न-आप त्रिपुरा में वापसी को लेकर आश्वस्त हैं ?

प्रकाश करात : हमें जीत का पक्का भरोसा है। त्रिपुरा मे आठवीं बार वाम मोर्चे की सरकार बनेगी। त्रिपुरा चुनाव से एक बड़ा राजनीतिक संदेश निकलेगा। पहली बार है कि राज्य में लेफ्ट और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है। बीजेपी को हर तरफ़ मिल रही कथित बढ़त को त्रिपुरा में असल जवाब मिलेगा। हम बीजेपी को पराजित करने में क़ामयाब होंगे।

 

( इंडियन एक्सप्रेस से साभार प्रकाशित। सीपीएम पोलित ब्पूरो सदस्य और पूर्व महासचिव प्रकाश करात से यह बातचीत मनोज सीजी ने की जो 20 फ़रवरी को छपी। )

 



 


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