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मीडिया ने फैलाया राष्ट्रपति कोविद के एक मिनट में 30 लाख ट्विटर फ़ालोवर बनने का झूठ !

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रामनाथ कोविद के राष्ट्रपति बनने के एक घंटे के भीतर ही ट्विटर पर उनके 3 मिलियन (तीस लाख) से ज्यादा फ़ालोवर बन गए- 25 जुलाई को मीडिया के एक बड़े हिस्से ने इस ‘ख़बर’ का ढोल बजाया। इसमें टाइम्स ऑफ इंडिया जैसा नंबर 1 अंग्रेज़ी अख़बार भी था और अर्णव रिपब्लिक भी। इकोनामिक टाइम्स और फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस भी पीछे नहीं थे।

ज़ी न्यूज़ को ‘एक घंटे’ की बात कुछ ज़्यादा लग रही थी, तो उसने ऐलान किया कि सिर्फ ‘एक मिनट’ के अंदर तीस लाख से ज़्यादा लोगों ने राष्ट्रपति कोविद को ट्विटर पर फ़लो कर लिया।

यह भक्ति की पराकाष्ठा है जो सारा विवेक हर लेती है। इन बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकारो से लेकर संपादकों तक ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि दरअसल ऐसा हुआ कैसे ? क्या यह मुमकिन है ?

ये सारे संस्थान अरसे से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं। यक़ीन करना मुश्किल है कि उन्हें इससे जुड़ी बुनियादी बात भी नहीं पता होगी।

दरअसल, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और तमाम मंत्रालयों के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट होते हैं जो सीधे सरकार की ‘डिजिटल संपत्ति’ माने जाते हैं। ट्विटर की नीति यह है कि जब कोई पद छोड़ता है तो वह उस एकाउंट की डिजिटल हिस्ट्री को संरक्षित कर देता है और नए पदाधिकारी को उस आधिकारिक अकाउंट से जोड़ देता है। इसी तरीक़े से ओबामा के डेढ़ करोड़ ट्विटर फ़ालोवर अपने आप डोनाल्ड ट्रंप के फ़ालोवर बन गए थे।

यहाँ भी राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के सभी ट्वीट @POI13 के तहत संरक्षित कर दिए गए।

नया @RashtrapatiBhvn अकाउंट बना जिसमें वे सभी फालोवर जोड़ दिए गए जो पहले प्रणव मुखर्जी को फॉलो करते थे। स्वाभाविक है कि मिनट भर में राष्ट्रपति कोविद के तीस लाख से ज़्यादा फ़ालोवर हो गए।

ज़ाहिर है जो राष्ट्रपति मुखर्जी का हैंडल फॉलो करते थे, वे अब अपने आप दो अकाउंट फ़ालो करने लगे। उन्हें ये हक़ है कि वे किसी एक को अनफालो कर दें या फिर यूँ ही चलते रहने दें।

रिटायरमेंट के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का अकाउंट है @CitizenMukherje

हैरानी की बात यह है कि ट्विटर इंडिया की ओर से ‘संक्रमण’ की यह जानकारी सार्वजनिक की गई है, फिर भी मीडिया ने पड़ताल नहीं की।

ज़ाहिर है, मीडिया ने ट्विटर पर मौजूद यह सारी जानकारी छिपाई। राष्ट्रपति कोविद को भी शायद यह जानकर अच्छा ना लगे कि मीडिया झूठ की बुनियाद पर उनकी लोकप्रियता का प्रचार कर रहा है।

 

मूल पड़ताल आल्ट न्यूज़ ने की। साभार प्रकाशित। 

 

 

 

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