Home पड़ताल क्या जज लोया के परिजनों पर आरोप वापस लेने का दबाव है?...

क्या जज लोया के परिजनों पर आरोप वापस लेने का दबाव है? जाँच ज़रूरी!

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जज बृजगोपाल लोया की संदिग्ध मौत को लेकर अंग्रेज़ी पत्रिका कारवाँ में आई सनसनीख़ेज़ स्टोरी के बाद फैले सन्नाटे से अब मीडिया उबर रहा है। पहले एनडीटीवी ने और फिर इन्डियन एक्सप्रेस ने बताया कि संदेह करना ठीक नहीं, जज बृजगोपाल लोया की मौत दिल के दौरे से हुई थी। दिलचस्प बात है कि दोनों के पास एक जैसी ही बातें थीं और उन्होंने ग़लत तारीख़ वाली ईसीजी रिपोर्ट पेश करने की ग़लती भी एक जैसी ही की थी। एक फ़र्क़ था तो ये कि एनडीटीवी ने माना था कि जज को अस्पताल ऑटो से ले जाया गया था जबकि एक्स्प्रेस ने कार ‘उपलब्ध’ करा दी थी। ( कार ने तीन किलोमीटर की दूरी डेढ़ घंटे में तय की थी !)

ज़ाहिर है, कारवाँ की स्टोरी ख़ारिज नहीं हुई। और अब टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापा है कि मरहूम जज लोया के बेटे अनुज ने बंबई हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस से मिलकर कहा कि उसे कोई शक़ नहीं है, पिता की मृत्यु स्वाभाविक थी।

वैसे, यह अनुज ही थे जिन्होंने 18 फरवरी 2015 को पत्र लिखकर अपने परिवार की जान को खतरा बताया था।  इस दिन चीफ़ जस्टिस मोहित शाह परिवार से मिलने आए थे। बृजगोपाल लोया की मौत के 80 दिन बाद। परिवार का आरोप इन पर ही है कि उन्होंने सौ करोड़ रुपेय रिश्वत लेकर सोहराबुद्दीन केस में अमित शाह को छोड़ने का दबाव बृजगोपाल लोया पर डाला था। अनुज ने लिखा था, ”मुझे डर है कि ये नेता मेरे परिवार के किसी भी सदस्‍य को कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं और मेरे पास इनसे लड़ने की ताकत नहीं है।”

अनुज ने मोहित शाह के संदर्भ में लिखा था, ”मैंने पिता की मौत की जांच के लिए उनसे एक जांच आयोग गठित करने को कहा था। मुझे डर है कि उनके खिलाफ हमें कुछ भी करने से रोकने के लिए वे हमारे परिवार के किसी भी सदस्‍य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हमारी जिंदगी खतरे में है।”

अनुज ने ख़त में दो बार लिखा था कि ”अगर मुझे और मेरे परिवार को कुछ भी होता है तो उसके लिए इस साजिश में लिप्‍त चीफ जस्टिस मोहित शाह और अन्‍य लोग जिम्‍मेदार होंगे।”

और कारवाँ की स्टोरी से उठे विवाद के बाद वही अनुज लिखकर दे रहे हैं कि उन्हें किसी पर भी शक़ नहीं है। पिता की मौत स्वाभाविक थी।

यह क्यों न माना जाए कि अनुज परिवार को उन ‘ताक़तवर नेताओं’ से बचाने का, प्रयास कर रहे हैं जो ‘उनके परिवार को नुकसान पहुँचा सकते हैं।’

कारवाँ की स्टोरी को ग़लत साबित करने के तमाम उपाय किए जा रहे हैं। लेकिन कारवाँ की ख़बर का आधार तो पिता और बहन के आरोप हैं जो उन्होंने कैमरे के सामने लगाए हैं। आरोप गंभीर हैं और सीधे-सीधे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को कठघरे में खड़ा करते हैं। हो सकता है कि बेटे के बाद कल ये लोग भी आरोप वापस ले लें, लेकिन इससे शक़ और गहरा जाएगा। मानने वाले यही मानेंगे कि परिवार बेहद दबाव में है।

लातूर में वक़ीलों ने जज लोया की मौत की जाँच की माँग को लेकर प्रदर्शन किया है। देश में कई जगह ऐसे प्रदर्शन हुए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस ए.पी.शाह से लेकर पूर्व एडमिरल रामदास तक यही माँग कर चुके हैं। उधर इलाहाबाद से लेकर अलीगढ़ विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी इसे लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया है।

बृजगोपाल लोया की मौत के बाद बेटे अनुज ने जाँच आयोग बनाने की माँग दो साल पहले ही की थी। बेहतर होगा कि उस पर ध्यान दिया जाए। कारवाँ की स्टोरी को ग़लत साबित करने से बेहतर होगा कि इस दिशा में कोई प्रामाणिक क़दम उठाया जाए, यह ज़्यादा ज़रूरी है। वरना, संदेह के बादल यूँ ही छाए रहेंगे।

कारवाँ की मूल स्टोरी पढ़ें–

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है

 



 

5 COMMENTS

  1. आपकी बात से शत-प्रतिशत सहमत हूँ…

  2. U mesh chandola

    India has a large no of advocates organised in dozens of high court and hundreds of district level bar. At least they must do it. Now that Supreme Court is not serious, Eminent jurist must create a parallel prosecution and judicial system who will first file the F I R AGAINST high court chief justice Sah, whole print and television media besides others. At least a judicial model for law students of the india. It will be for help of future state of india which would someday emerge from vestiges of this rotten system. A real socialist, secular, a real democracy. Democracy of 99%. OF FARMERS, WORKERS, OR DICTATORSHIP OF PROLETARIAT! Please go to you tube and listen to “lectures on nationalism in jnu”…. Lecture of Professor JayatiGhosh on” Anti national policies of government “

  3. U mesh chandola

    Next day it may be turn of any justice of supreme Court. Or any chief Secretary or any honest officer like chaturvedi
    ( IFS officer). Even Prashant bhusan or any honest IPS? Could you as an ordinary citizen afford it. Congrats for the time being Mr Maneater !!

  4. U mesh chandola

    Even if its a normal death. A high level enquiry essential to establish Faith of nation on judiciary as a whole.

  5. U mesh chandola

    No defamation case this time Mr Shah? ArunShorie said if SC can take suomotu action in an editorial and case lasts 25 years why not in this case? No warning to Shorie this time in spite of the fact that he is sceptical about the same supreme Court? Why should c could not dare see we people ( of constitution ) this time ?

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