एक्सिस बैंक को चौथी तिमाही में 1388 करोड़ का घाटा, किया था यस बैंक में 600 करोड़ का निवेश



प्राइवेट सेक्टर के तीसरे सबसे बड़े बैंक एक्सिस बैंक को अपनी 2019-2020 की चौथी तिमाही में 1388 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। जबकि बैंक द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार उसे पिछली साल इसी तिमाही में 1505.06 करोड़ का मुनाफा हुआ था। बैंक द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार जनवरी से मार्च 2020 की चौथी तिमाही में एक्सिस बैंक की कुल आय 20,219 करोड़ रुपये रही जबकि पिछले साल इसी अवधी में एक्सिस बैंक की आय 18,324 करोड़ रुपये थी। अगर बैंक के एकीकृत लाभ की बात करें तो एक्सिस बैंक को चौथी तिमाही में 1250.09 करोड़ का नुकसान हुआ है। एकीकृत आधार पर एक साल पहले की बात करें तो एक्सिस बैंक को साल भर पहले की इसी तिमाही में 1,677.90 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। एक्सिस बैंक की आय भी इस दौरान 18,950.85 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,786.23 करोड़ रुपये पर पहुँच गयी है। एक्सिस बैंक के इस नुकसान की बड़ी ज़िम्मेदारी इनके फंसे हुए क़र्ज़ और आकस्मिक खर्चों की वजह से है। एक्सिस बैंक का ये ख़र्च मार्च 2020 की चौथी तिमाही में 7,730.02 करोड़ रुपये पहुँच गया। जबकि एक साल पहले इसी समय एक्सिस बैंक का इस ख़र्च का प्रावधान 2,711.43 करोड़ रुपये था। एक्सिस बैंक ने अपने एनपीए पर कुछ हद तक काबू किया है। पिछले वर्ष चौथी तिमाही में एनपीए 5.26 प्रतिशत था लेकिन इस बार बैंक का एनपीए 4.86 प्रतिशत रह गया है। कहा जा सकता है कि एनपीए के मोर्चे पर एक्सिस बैंक की स्थिति संभलती नज़र आई। एक्सिस बैंक की इस रिपोर्ट के बाद शुरूआती कारोबार में बैंक के शेयर भी करीब 4 फीसदी तक नीचे गिर गए।

यस बैंक में 600 करोड़ का किया था निवेश

अभी हाल ही में एक्सिस बैंक ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में 29 फ़ीसदी हिस्सेदारी ख़रीदने को मंजूरी दी है। देश में वैसे ही बैंकों की स्थिति इस समय बिगड़ी हुई है और एक्सिस बैंक का इतना बड़ा नुकसान उसके लिए खतरे की घंटी होगा। इसके पहले मार्च में एक्सिस बैंक ने डूबते हुए यस बैंक को बचाने के लिए 600 करोड़ रुपये इन्वेस्ट किये थे। यस बैंक की स्थिति इतनी ख़राब थी कि 5 मार्च को आरबीआई द्वारा एस बैंक पर रोक लगाने के साथ ही ग्राहकों को मात्र 50 हज़ार रुपये महीना तक ही निकासी की सीमा तय कर दी गयी थी।

एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा आरबीआई से मांगी गयी रिपोर्ट में 50 सबसे बड़े बकायेदारों का नाम सामने आया है। जिनके 68,607 रूपये के क़र्ज़ को आरबीआई ने माफ़ करने की बात स्वीकारी है।

बैंक की बैलेंसशीट से साफ है कि इस तिमाही में बैंक द्वारा दिया गया लोन, 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 5,71,424 करोड़ रुपये वार्षिक पर पहुंच गया। रिटेल लोन वार्षिक दर में 24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,05,400 करोड़ रुपये हो गया। कॉरपोरेट लोन ग्रोथ में सालाना 11 फीसदी की वृद्धि हुई। बैंक की बैलेंसशीट, पिछले 1 साल में 14 प्रतिशत बढ़कर 9.15 लाख करोड़ रुपए की हो गई है और कुल डिपॉजिट 19 फीसदी तिमाही और 17 फीसदी वार्षिक की दर से बढ़ी है।

अब हालांकि बैंक ने एलान कर दिया है कि वह 35,00 करोड़ रुपए का फंड जुटाने की योजना पर काम करेगा, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था के वर्तमान हालात को देखते हुए, कौन सी योजना कितना काम करेगी, ये कहना मुश्किल ही होगा।


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