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लेखकों की अपील -नौजवानो ! लाशों पर राजनीति करने वालों की असल मंशा समझो !

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हम हिंदी के लेखक, कलाकार, संस्कृतिकर्मी कासगंज में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से बेहद व्यथित और चिंतित है. गणतंत्र दिवस के दिन ऐसी घटना होना भारतीय लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है. पिछले कुछ समय से हम देश भर में बढ़ते साम्प्रदायिक तनाव और नफ़रत के साक्षी रहे हैं. धर्म के आधार पर ट्रेनों से लेकर घरों तक में घुसकर आमजन और लेखकों, कलाकारों की हत्याएँ जिस तरह आम होती जा रही हैं वह स्पष्ट तौर पर सत्ता व्यवस्था की नाकामी तो है ही लेकिन शासन से जुड़े लोगों का उनके प्रति रवैया और भी दुखद है. इसे केवल क़ानून व्यवस्था की नाकामी कहकर नहीं छोड़ा जा सकता, दरअसल यह दक्षिणपंथी ताक़तों के लगातार विषवमन का परिणाम है जो बेरोज़गारी, मँहगाई और वंचना के लगातार बढ़ते जाने के बरक्स एक आड़ में तब्दील होती जा रही है.

हम इस घटना की निंदा तो करते ही हैं साथ में विशेषतौर पर नौजवानों से यह अपील करते हैं कि लाशों पर रोटी सेंकने वाली साम्प्रदायिक ताक़तों के बहकावे में न आयें और उनकी असल मंशा समझें. वे आपको शिक्षा, रोज़गार और एक सम्मानजनक जीवन देने की जगह बन्दूक, भाले, तलवार और पिस्तौल थमा रहे हैं जिससे आप एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएँ. ज़रा सोचिये कि इन घटनाओं में कभी सत्ताशीन लोगों को कोई नुक्सान क्यों नहीं पहुँचता. ज़रा सोचिये कि इस तरह की मारकाट अंततः किसे लाभ पहुँचाएगी. ज़रा सोचिये कि आँख के बदले आँख की यह दौड़ किस अंधे कुँए में ख़त्म होगी.

हम सरकार से मांग करते हैं कि अफ़वाह फैलाने वाले तत्त्वों पर शीघ्र कार्यवाही करे और आमजन से अपील करते हैं कि अफ़वाह फैलाने वाले लोगों से सावधान रहें और उन्हें बेनक़ाब करें. प्रशासन शीघ्र से शीघ्र तनावग्रस्त इलाक़ों में शान्ति स्थापित करने की कोशिशें करे जिससे किसी के भी जानमाल को और नुक्सान न पहुँचे. हम मीडिया से भी भड़काऊ ख़बरों से बचने तथा साम्प्रदायिक ख़बरों के प्रचार प्रसार पर रोक लगाने की मांग करते हैं.

लेकिन उम्मीद हमें अपनी जनता से ही है कि वह इस देश को साम्प्रदायिक आग से झुलसने से बचाने में अपनी महती भूमिका निभाये और शान्ति तथा सद्भाव से इस माहौल से कासगंज और देश को निकालने में मदद करें.

 

अंकुर पाण्डेय, अक्षत सेठ, अखिलेश शांडिल्य, अटल तिवारी, अनवर अहमद खान, अनीता नेगी, अनु प्रिया, अनुज अग्रवाल, अपर्णा श्रीवास्तव, अब्बास पठान, अभिनव सब्यसाची, अभिषेक, अमित शुक्ला, अमिताभ पाण्डेय, अमिताभ श्रीवास्तव, अम्बर आमेज़, अशोक कुमार पाण्डेय, अशोक भौमिक, असंग घोष, आदित्य दूबे, आदित्य प्रकाश आज़ाद, आनन्द स्वरूप वर्मा, आशीष मिश्रा, आशीष सिंह, आशीष त्रिपाठी, अनूप सेठी, अमिता नीरव, अरुण कुमार, अरुण कुमार सिंह, अरुण देव, अहमद इम्तियाज़, आरिफ़ खान, इंदु पुरी गोस्वामी, इंद्र मणि उपाध्याय, इन्तखाब आलम, इमरान, उज्ज्वल दूबे, उस्मान खान, ए के अरुण, ओम प्रकाश सुंडा, कान्ति शिखा, कुमार मंगलम ,कुलदीप कुमार, कुलभूषण मिश्र , कृष्णा मिश्रा , गुफरान सिद्दीकी , गौरव शुक्ला , घनश्याम देवांश , चंद्रपाल सिंह , चन्दन कुमार , चन्दन पाण्डेय , जलेश्वर उपाध्याय , जवरी मल्ल पारेख , जाय कृष्ण दास , जितेन्द्र सेंगर , डॉ सुनीता , दिनेश राय द्विवेदी , दीपक कुमार शर्मा , दीपू नासेर, देवेश, संयोजक, आग़ाज़ सांस्कृतिक मंच, धीरेश सैनी, नदीमउद्दीन खान, नागेश्वर पंचाल, निकेश मयूर, नितेश मिश्र, निदा नवाज़, निवेदिता दिनकर, नीरज द्विवेदी, नीरज वर्मा, नीलेश रघुवंशी, पंकज चतुर्वेदी (दिल्ली), पंकज मिश्रा, पंकज श्रीवास्तव, परमेन्द्र सिंह, पारितोष कुमार पीयूष, प्रकर्ष मालवीय, प्रियंवदा समर्पण, फ़राह शाकेब फारूक शाह, फ़िरोज़ खान, फैसल अनुराग, बादल सरोज, बाबर बेग, बिशन सागर, ब्रजेश शर्मा, ब्रह्मदत्त शर्मा मंगलेश डबराल, मदन कश्यप, मधु गुप्ता, मनोज कुमार सिंह, मनोज मल्हार , मनोरमा सिंह, मसउद अख्तर, महेश दोनिया, मिथुन कुमार, मीनू जैन, मुसाफिर बैठा, मोहन श्रोत्रिय, मोहम्मद ताबिश खान, मोहम्मद शादाब अली, मोहम्मद साकिब, रचना अग्रवाल, रचना त्यागी, रतन पंडित, रमेश कुमार, रवि भूषण, राजेन्द्र चतुर्वेदी, राजेश चंद्रा , राजेश मल्ल, रिज़वान अंसारी, रोहित कुमार, ललित सारस्वत, वंदना राग, वसीम अकरम, वाज़दा खान, विजय गौड़, विनोद दास, विभाष कुमार श्रीवासतव, विवेक मिश्रा, विशाल विक्रम सिंह, शंभू कुमार, शकील खान, शमशाद इलाही अंसारी, शशि शर्मा, शांतनु श्रीवास्तव, शादाब आज़मी, शिवानन्द मिश्र, शिवानी पाण्डेय, शीबा असलम फ़हमी, शेषनाथ पाण्डेय, शैलेन्द्र झा, शैलेश तिवारी, श्याम विजय, संजय जोठे, संतोष कुमार झा, संदीप सरस, सईद अयूब, सत्येन्द्र शुक्ला, सिद्धांत सूचित, सुजाता, सुजीत सिन्हा, सुधा अरोड़ा, सुयश सुप्रभ, सुरेश साहनी, सूफिया अमीन, सैयद शहरोज़ क़मर, सौम्या त्रिपाठी, हरभगवान चावला, हरीश कुमार कर्मचंदानी, हर्ष देव, हसन उस्मानी, हेमलता माहेश्वर, ऋचा साकल्ले, ऋषि भट्ट, ऋषिकेश सुलभ कार्मेन्दु शिशिर, कुमार अजय, खुर्शीद अहमद, गायत्री माहेश्वरी, गीता गैरोला, गोपाल चौरसिया, चन्द्रकला त्रिपाठी, ताहिरा हसन, दिनेश कुमार यादव, दुर्गा प्रसाद अग्रवाल, नंदकिशोर नीलम, नदीम सिद्दीकी, नितिन ठाकुर, पलाश सुरजन, पुरुषोत्तम अग्रवाल, प्रज्ञा (दिल्ली), प्रज्ञा रावत, प्रेम भारद्वाज, मनीष तिवारी, मनीष दूबे, मुकुल सरल, मुसाफिर बैठा, मेराब खान, रणवीर सिंह रमन, राघव सिंह, राजाराम भादू, राजीव आर सिंह रामबाबू अग्रवाल, राहुल सिंह, लक्ष्मण सिंह देव, लक्ष्मी शर्मा, ललित सुरजन, विंस्टन डी सूजा, शाहिद अख्तर, संजीव कौशल, सत्येंद्र आर्य, साजिद खान, सिनिवाली शर्मा, सुधांशु सुंदरियाल, सुमंत पाण्ड्या, हरिओम राजोरिया, हिमांशु कुमार, हेमराज सिंह चौहान…

 



 

5 COMMENTS

  1. Don’t do idol worship of anybody. But read, analyse shaheedbhagatsingh.in, a reliable website of Bhagat Singh by his nephew and an authority on bhagat Singh, azad, bhagwati charan vohra etc.( 2) Visit another website for this. marxists.org /hindi / bhagat-singh / index. htm in hindi. Religion and our freedom struggle – – – Communal RIOTS and remedy – – – – – – Students and politics – – – – – Manifesto of Hindustan socialist Republic Association. Read and I am sure you will demand ” BAN RSS”.

  2. Now that 2019 Loksabha election are very close experiment like Mujjafarnagar RIOTS 2013 will be repeated. IMPERIALIST AND INDIAN CORPORATE ARE VERY PLEASED WITH MODI. HUGE MONEY WILL FLOW. ADANI S HELICOPTER IS READY FOR MODI JI. WORKERS MUST FOLLOW BHAGAT SINGH. AND TRY TO ” PREVENTION MEASURES.

  3. Could it be possible for working class, peasantry etc to gather on 23 March 18 around Parliament. We can plan statewide rallies in more and more states from 1 March. Or in maximum cities of india. The only relative of HSRA martyrs who is doing revolutionary politics is Comrade Jagmohan Singh, Ludhiana. Who never missed any opportunities to join movement be it Maruti workers movement or so called ultra left. He could join 23 March if it suits him.

  4. A documentary ” ramkenaam” which free to access on you tube can be seen and forwarded, suggested. It exposed 1949 Fabricated story about incarnation of RAM lala. Another nice documentary is ” Mujjafarnagar baki hai ” . Please suggest, share information.

  5. Everytime they do a communal move on Chess board you place your agenda. Say Film padmavati s answer may be Ram ke nam or employment demand of 20 million or ” Long live Shaheed Loya” . Something new is required. Some cultural work like Street play on communal riots on you tube with English subtitles.

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