ओमिक्रॉन: कर्नाटक में मिले दो मामलों से क्या जानकारी आई सामने, जानें डेल्टा से कितना खतरनाक है यह वैरिएंट!

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कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर पूरी दुनिया में दहशत फैल गई है। इस नए वैरिएंट के आने से तीसरी लहर का संकट भी गहरा गया है। नया वैरिएंट ओमिक्रॉन सिर्फ नौ दिन के अंदर ही 30 देशों में फैल चुका है। दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह वैरिएंट अब भारत तक पहुंच गया है। ओमिक्रॉन का फैलाव डेल्टा से कई गुना अधिक बताया जा रहा है, जो और भी चिंता की बात है।

विश्व के बड़े-बड़े वैज्ञानिक इस पर रिसर्च में जुटे हुए हैं। वहीं अब तक इसने 200 से अधिक लोग को संक्रमित किया हैं। भारत के कर्नाटक में पहले दो लोग इसकी चपेट में आए। उसके बाद पांच और लोगों के संक्रमित होने की खबर आई है। आपको बताते है कि ओमिक्रॉन ने अब तक किन देशों में दस्तक दी है भारत में कब आया, कर्नाटक में मिले मामलों से क्या जानकारी सामने आई, मरीजों में क्या लक्षण थे और यह डेल्टा से कितना खतरनाक हैं।

ओमिक्रॉन इन देशों में पहुंच चुका है..

ओमिक्रॉन अब तक जिन देशो में अपने पैर रख चुका है उनमें दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, नीदरलैंड, इजरायल,हांगकांग, बेल्जियम,ऑस्ट्रेलिया, चेक गणराज्य, इटली, जर्मनी, ब्रिटेन, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया , कनाडा, स्वीडन, स्पेन, स्विट्जरलैंड , फ्रांस, जापान, पुर्तगाल, सऊदी अरब, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, यूएसए, नार्वे, आयरलैंड, घाना, नाइजीरिया, यूएई और भारत शामिल हैं।

भारत में यह नया वैरिएंट कब आया ?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 दिसंबर को भारत के कर्नाटक शहर में ओमिक्रॉन के दो मामले सामने आए हैं। इनमें से एक दक्षिण अफ्रीकी नागरिक और दूसरा स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता है। हालांकि मंत्रालय ने लोगों से दहशत का माहौल नहीं बनाने और कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की अपील की है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने कहा कि ओमिक्रॉन से संक्रमित पाए गए 66 वर्षीय एक व्यक्ति ने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था। जबकि अन्य 46 वर्षीय मरीज ने ऐसी कोई यात्रा नहीं की थी और वह स्वास्थ्यकर्मी है। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई राज्य में और प्रतिबंध लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों समेत अन्य विशेषज्ञों के साथ बैठक कर रहे हैं।

कर्नाटक में मिले मामलों से क्या जानकारी सामने आई ?

आपको बता दें कि कर्नाटक में मिले दोनों मरीजों को सिर्फ बुखार की शिकायत थी। सबसे खास बात यह है कि दोनों संक्रमित मरीजों ने वैक्सीन ली हुई थी। एक संक्रमित मरीज को टीके की दोनों खुराक मिल गई थी, जबकि दूसरे मरीज ने पहली खुराक ले ली थी। कर्नाटक के विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्य में ओमिक्रॉन के और मामले हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों की माने तो उनका कहना है कि दोनों मामलों में कोई प्रमुख लक्षण नहीं था।

ओमिक्रॉन डेल्टा से कितना खतरनाक हैं?

ओमिक्रॉन अब तक कुल 53 म्यूटेशन हो चुके हैं, जिनमें से 32 म्यूटेशन तो उसके स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं।

डेल्टा- स्पाइक प्रोटीन में कुल 18 म्यूटेशन हुए। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस शरीर में प्रवेश करता है।

ओमिक्रॉन- रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन में 10 म्यूटेशन हो चुके हैं।

डल्टा-  रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन में महज 2 ही म्यूटेशन हुआ था। रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन वायरस का वह हिस्सा है जो इंसान के शरीर के सेल से सबसे पहले संपर्क में आता है।

ओमिक्रॉन- इसकी आर वैल्यू डेल्टा से करीब छह गुना अधिक है, जिसका मतलब है कि ओमिक्रॉन से संक्रमित रोगी 35-45 लोगों में संक्रमण फैलाएगा।

डेल्टा- इसकी आर वैल्यू 6-7 थी। इसका मतलब ये है कि डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित एक व्यक्ति इस वायरस को 6-7 व्यक्तियों में फैला सकता है

ओमिक्रॉन के लक्षण क्या है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस वैरिएंट में सिर्फ हल्के लक्षण ही रहते हैं। उनमें सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान के लक्षण हैं। वहीं, डब्ल्यूएचओ का कहना है कि फिलहाल इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ओमीक्रोन के लक्षण कोरोना के पहले के वैरिएंट से अलग हैं। वैज्ञानिकों ने अनुसार इनमें 30 म्यूटेशन स्पाइक प्रोटीन पाए गए हैं। आम भाषा में स्पाइक प्रोटीन के जरिए वायरस सेल के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने अब तक जो जांच की है उसके मुताबिक कोरोना के इस वैरिएंट में म्यूटेशन की संख्या सबसे ज्यादा है।


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