भारत में मिली नकली कोविशील्ड, WHO ने की जांच की अपील, 60% सैंपल में कई गंभीर वैरिएंट


जिनेवा स्थित डब्ल्यूएचओ मुख्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत और युगांडा में कोविशील्ड के नकली टीके बरामद किए गए हैं। वहीं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे से जानकारी लेने के बाद डब्ल्यूएचओ ने भारत और युगांडा दोनों देशों से सख्त कार्रवाई की अपील की है


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देश में कोरोना के मामलों में तो गिरावट है, लेकिन अभी भी कई तरह के वैरिएंट भारत में पाए जा रहे हैं। कई राज्यों में डेल्टा ने प्रकोप मचा रखा है। अकेले डेल्टा स्वरूप में 13 बार वायरस ने म्यूटेशन किया है। इससे बचने के लिए वैक्सीनेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन अगर वैक्सीन भी नकली बनने लगे तो क्या किया जाए? वैक्सीन तो फ्री आ गई लेकिन साथ-साथ डुप्लीकेट का भी खतरा मंडराने लगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बात का खुलासा किया है की कोविशील्ड वैक्सीन की नकली खेप भारत और युगांडा में बरामद हुई है।

WHO का खुलासा..

सोचिए आपने वैक्सीनेशन लगवाई और निश्चिंत हो गए की अब आप कुछ हद तक सुरक्षित हैं, लेकिन असल में ऐसा न हो और आप संक्रमण की चपेट में आ जाएं। जी हां, बीते एक महीने में आईं अलग-अलग शिकायतों के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने खुलासा किया की भारत और युगांडा दोनों ही देशों में नकली कोविशील्ड वैक्सीन पाई गई। इन वैक्सीन पर बैच नंबर गलत लिखा हुआ है और वैक्सीन की मात्रा भी 2 एमएल लिखी हुई है। असली वैक्सीन की शीशी में 10 से 12 एमएल वैक्सीन की मात्रा होती है।

WHO की सख्त कार्रवाई की अपील..

जिनेवा स्थित डब्ल्यूएचओ मुख्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत और युगांडा में कोविशील्ड के नकली टीके बरामद किए गए हैं। वहीं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे से जानकारी लेने के बाद डब्ल्यूएचओ ने भारत और युगांडा दोनों देशों से सख्त कार्रवाई की अपील की है।

ऐसे हुई नकली वैक्सीन की पहचान..

डब्ल्यूएचओ के अनुसार , जो नकली वैक्सीन भारत में मिलीं उसमे बैच नंबर, उत्पादन की तारीख और एक्सपायरी डेट नहीं लिखी हुई है। युगांडा से बरामत नकली वैक्सीन पर उत्पादन की तारीख नहीं है। एक तरफ नकली वैक्सीन मिलने की बात सामने आई तो दूसरी तरफ  भारत में वायरस के अलग-अलग स्वरूप के आधे से ज्यादा मरीजों में गंभीर स्वरूप मिले हैं।

30 हजार से भी अधिक लोगो में मिले कई गंभीर वैरिएंट..

प्रधानमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में इन्साकॉग ने जानकारी दी है कि अब तक 72931 सैंपल की सीक्वेंसिंग हुई है। इनमे से 30 हजार से भी अधिक में कोरोना के अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और डेल्टा प्लस जैसे गंभीर वैरिएंट मिले हैं। यह सभी वैरिएंट तेजी से फैलते हैं। वहीं, इनमे से सबसे ज्यादा घातक डेल्टा और डेल्टा प्लस है और इसने केरल, महाराष्ट्र आदि राज्यों में महामारी को बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए..

  • 8471 सैंपल राज्यों से किए गए एमओयू के आधार पर प्राप्त हुए थे।
  • 5178 सैंपल उन लोगों के थे, जो विदेश से लौटे थे।
  • 44689 सैंपल समुदाय स्तर पर प्राप्त हुए थे।

72931 सैंपल में से 30230 सैंपल यानी 60.6% में गंभीर वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इन सभी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गंभीर श्रेणी में माना है।

72931 में इस वैरिएंट के इतने मामले..

  • 20324 में डेल्टा
  • 5407 में कप्पा व डेल्टा-1
  • 4218 में अल्फा
  • 218 में बीटा
  • 90  में डेल्टा प्लस
  • 2 में गामा

इन्साकॉग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक और महामारी विशेषज्ञ ने कहा, “भारत में 60% सैंपल में गंभीर स्वरूप मिलना सामान्य बात नहीं है। इससे पता चलता है कि हर दूसरा मरीज वायरस के एक गंभीर वैरिएंट की चपेट में है जो किसी भी समय दूसरी लहर जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।” वहीं अब ऐसे में टीके की नकली खेप का खुलासा, वो भी WHO द्वारा, चिंता का विषय है।


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