Home काॅलम चुनाव चर्चा: 2019 तक देश की मुद्रा-चुनावी मुद्रा!

चुनाव चर्चा: 2019 तक देश की मुद्रा-चुनावी मुद्रा!

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चन्द्र प्रकाश झा 

 

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ , राजस्थान और मिजोरम राज्यों में अगले चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग की  तैयारियां शुरू हो गयी हैं। इनमें से अभी मिजोरम में कांग्रेस की और अन्य तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार है।  आदिवासी समुदाय  बहुल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह इस पद पर सबसे अधिक समय तक विराजे भाजपा नेता हैं. गैरआदिवासी  और  पेशे से डॉक्टर रमन सिंह पहली बार 2003 में मुख्यमंत्री बने थे।   मध्य प्रदेश में शिवराज  सिंह चौहान 13 बरस से मुख्यमंत्री हैं। राजस्थान में वसुंधरा राजे का मुख्यमंत्री पद पर यह दूसरा कार्यकाल है।

केंद्र में सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) का नेतृत्व कर रही भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस समेत  सभी संसदीय राजनीतिक पार्टियों ने भी  चुनावी शतरंज की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भाजपा ने अपनी किलाबंदी  मजबूत करने के लिए एक बार फिर अपने सर्वश्रेष्ठ चुनाव प्रचारक एवं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का सहारा लिया है।  मोदी जी 8 जून को छत्तीसगढ़ से प्रचार शुरू करने भिलाई जायेंगे।

कुछे राजनीतिक  प्रेक्षकों को अभी भी यह लगता है कि चार बरस पुरानी  मोदी सरकार को इन विधान सभा चुनाव के साथ ही 17 वीं लोकसभा के लिए भी चुनाव करा  सकती है ।  सिक्किम में  32 सदस्यीय और अरुणाचल प्रदेश में 60 सीटों की विधान सभा के नये चुनाव अगले बरस होने हैं।   तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में आगामी मई-जून  में विधानसभा चुनाव कराने की संभावना है।  तेलंगाना में विधानसभा की 119, आंध्र प्रदेश में 175 और ओडिशा में 147 सीटें हैं। इसके बाद सितंबर-अक्टूबर माह में हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हैं।  महाराष्ट्र में 288 और हरियाणा की 90 विधान सभा सीटें हैं।  दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में 2020 में विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली में  70 और जम्मू-कश्मीर में 87 विधान सभा सीटें हैं।

सत्ता पक्ष और विपक्ष भी अपनी  हरेक चाल सोच समझ कर दे रहा है।  वे  देख चुके है कि हाल में कर्नाटक में भाजपा को नई सरकार बना डालने के बाद भी मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस हार कर भी जनता दल -सेकुलर के साथ नया  गठबंधन करके  सत्ता में लौट आयी है।  लोकसभा की चार और विधान सभा की 10 सीटों पर हालिया उपचुनाव में भी जीत के लिए भाजपा की सारी कोशिशें नाकामयाब ही साबित हुईं।

2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से लोकसभा की 15 राज्यों में 27 सीटों पर उपचुनाव हुए। इनमें से भाजपा और उसके सहयोगी  नौ जगह हारे हैं।  वे  एक भी नई सीट नहीं जीत सके है।  उन्हें मई 2014 के चुनाव में कुल 336 सीटें मिली थीं।  इनमें से 282 अकेले भाजपा की थी।  पिछले चार बरस में  विपक्ष ने भाजपा से आठ और उसके सहयोगियों से एक सीट छीनी है। लोकसभा में मनोनीत दो सीटों को अगर भाजपा के खाते में शामिल कर भी लिया जाता है तो अभी सदन में उसके कुल 273 सदस्य ही हैं। सदस्यों के कुल योग की दृष्टी से कांग्रेस में चार , समाजवादी पार्टी में दो तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी , राष्ट्रीय लोक दल और नेशनल कांफ्रेंस में एक -एक सीट  का इजाफा हुआ है।  मोदी राज में मध्य प्रदेश के रतलाम में लोकसभा के पहले ही उपचुनाव में भाजपा को कांग्रेस से मुंह की खानी पड़ी थी।

मौजूदा लोकसभा में भाजपा के अपने दम पर बहुमत होने के दावे पर अब गंभीर प्रश्न चिन्ह लग गया है।  इसके बारे में हम पहले भी विस्तार से चर्चा कर चुके है और आगे भी करेंगे।  लेकिन पहले निर्वाचन आयोग की तैयारियों का एक जायजा लेना बेहतर होगा।

मिजोरम की 60 सीटों की मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल 15 दिसंबर को ख़त्म होगा।  मध्य प्रदेश में  230 सीटों की विधान सभा का मौजूदा कार्यकाल अगले बरस 7 जनवरी को समाप्त होगा।  छत्तीसगढ़ में 90 सीटों और राजस्थान में 200 सीटों की विधान सभा का मौजूदा कार्यकाल क्रमशः  15 और 20 जनवरी 2019 को समाप्त होगा। निर्वाचन आयोग ने  इन चुनावों के मद्देनज़र मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम  में  प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों आदि के नियमन के लिए एक दिशा निर्देश जारी किया है।  आयोग ने मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर फर्जी वोटरों के ‘ पकडे’ जाने की कांग्रेस की शिकायतों के बाद उनकी जांच के लिए अपने अफसरों की टीम नियुक्त कर उनसे हफ़्ते भर में रिपोर्ट मांगी है।

मध्यप्रदेश से मीडिया की ख़बरों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों से मिली जानकारी ख़बरों के मुताबिक़ राज्य में चुनाव जीतने के लिए भाजपा द्वारा तरह -तरह के हथकंडे अपनाये जा रहे हैं।  ऐसे में पिछले एक दशक  में जनसंख्या के अनुपात में मतदाताओं की तादाद में  बेतहाशा बढ़ोत्तरी की ख़बरों से  शक है कि  सरकारी मशीनरी का शिवराज सिंह सरकार  दुरुपयोग कर रही है. पिछले 10 साल में  मध्य प्रदेश की जनसंख्या 24% बढ़ी।  लेकिन वोटरों की तादाद में 40% का इजाफा हो गया।  एक वोटर का नाम 26 लिस्टों में देखा गया है।  एक ही फोटो से 23 वोटर कार्ड बने हैं। इस प्रकार के राज्य में 60 लाख फर्जी वोटर हैं।  जहाँ 10 से 20 हजार वोटो में हारजीत का फैसला हो वहाँ 60 लाख फर्जी वोटर मायने रखते हैं। राज्य के भोजपुर विधानसभा के मतदाता केंद्र 245 में मतदाता कार्ड नंबर आईजेपी 3297140 वाले देवचंद इसी बूथ पर आईजेपी 3297249 से मुकेश कुमार हो गये. बीजेपी भी कह रही है ऐसी लिस्ट की जांच हो और खामियां दूर की जाएं।  ऐसी लिस्ट सिर्फ एक विधानसभा नहीं बल्कि कई विधानसभा क्षेत्रों में मिली है। कांग्रेस का आरोप है कि ये  फर्जी वोटर भाजपा सरकर ने प्रशासन का दुरूपयोग कर  तैयार किया है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह ने इसकी सफाई देते हुए कहा है कि ‘ कुछ तस्वीरें पूर्व के वर्षों की हैं.  कलेक्टर सुपरवाइज करेंगे ये फोटो कटेंगी.”

कांग्रेस ने अपने मोहरों को बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन करने की घोषणा कर दी है।  राज्य में बसपा का वोट शेयर 7 प्रतिशत बताया जाता है.  पिछले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को 37 प्रतिशत और भाजपा को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस के मध्य प्रदेश की ही तरह राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी बसपा  के साथ गठबंधन करने की बातचीत की खबर है। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार का यह लगातार तीसरा  कार्यकाल है। अभी भाजपा के 165, कांग्रेस के 58, बहुजन समाज पार्टी के चार और तीन निर्दलीय विधायक हैं. राज्य  में दलितों का वोट करीब 15.62 प्रतिशत है.

इस बीच, मोदी जी के 14 जून की  भिलाई दौरे पर जाने की खबर मिलते ही पर्यावरण का एक बड़ा मुद्दा खड़ा हो गया है। पता चला कि प्रधानमंत्री मोदी की सड़क यात्रा में समय बचाने उन्हें  सीधे वायु मार्ग से समारोह स्थल तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के लिए भिलाई निवास के पीछे लगे करीब 100 पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है .

 



(चंद्र प्रकाश झा  वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया हल्कों में सिर्फ ‘सी.पी’ कहते हैं। सीपी को 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण, फोटो आदि देने का 40 बरस का लम्बा अनुभव है।)



 

 

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