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अपने प्रधानमंत्री पत्रकारों के ‘ब्‍लड’ के चक्‍कर में क्‍यों रहते हैं? देखें वीडियो!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टीवी9 भारतवर्ष ने अपनी लॉन्चिंग पर आयोजित एक राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में बुलाया था। बात इतवार की है। मोदी पहुंचे तो उनकी अगवानी में हेमंत शर्मा, विनोद कापड़ी और टीवी के साईओ रवि प्रकाश आदि बाहर खड़े थे। मोदी ने पहुंचते ही रवि प्रकाश से ऐसी बात कही जिसका वीडियो अब तेज़ी से वायरल हो रहा है।

‘’आपने ऐसे लोग भरे हैं जिनके ब्‍लड में है मुझे गाली देना’’, मोदी के ऐसा कहते ही पीछे चल रहे शर्मा और कापड़ी ने बेशर्मी से दांत दिखा दिए। सीईओ रवि प्रकाश ने मामले को संभालते हुए जब कहा, ‘’बदलाव ला रहे हैं इसमें’’, तो मोदी ने पत्रकारों की मौज ले ली, ‘’ऐसा मत करो भाई जीने दो इन बेचारों को…. हाहाहा… उनकी आत्मा मर जाएगी तो मज़ा नहीं आएगा।‘’

वीडियो इतना ही है। सवाल मोदी पर तो है ही कि वे हमेशा दूसरों के ब्‍लड के पीछे क्‍यों पड़े रहते हैं? इससे बड़ा सवाल हालांकि उन पत्रकारों पर है जो इस चैनल में बेशर्मी से काम कर रहे हैं। जिसे आपने न्‍योता दिया उसी ने आपको सरेआम बेइज्‍जत कर दिया। हेमंत शर्मा का तो फिर भी समझ में आता है क्‍योंकि 2014 में नरेंद्र मोदी के चुनाव में वे काफी सक्रिय थे और अमित शाह के साथ मिलकर प्रचार का काम देख रहे थे। इसलिए शर्मा तो ठहरे मोदी के ही आदमी।

बाकी का क्‍या? पत्रकार अनिल यादव ने फेसबुक पर इस वीडियो के संदर्भ में वाजिब सवाल उठाया है कि ‘’वह खून किस ग्रुप का होता है जिसमें गाली बहती है?” इस वीडियो को पोस्‍ट करते हुए इंदौर के पत्रकार तरुण व्‍यास क्‍या खूब लिखते हैं:

“ये देश के प्रधानमंत्री हैं… प्रधानमंत्री और सड़कछाप उठाईगीर की भाषा में कुछ तो फर्क होना ही चाहिए। पत्रकारों को काम तो वैसे भी नहीं करने दे रहे हो। अब क्या आपसे पूछकर पत्रकारों को नौकरी पर रखें ? हद भाई”!

 

2 COMMENTS

  1. पत्रकारों के खून से ही मीडिया और लोकतन्त्र मजबूत होते हैं।

  2. सिकंदर हयात

    अज़ीम प्रेम जी महाभले आदमी वो करोड़ो का दान दे देंगे अरबो के ट्रस्ट बना देंगे मगर पुण्य अभिसार रविश abhshek shrivastav आदि आदि को एक चेनेल आदि खोल के नहीं देंगे जहा ये बेहतरीन काम कर सके , असल में पैसे वालो की एक खास साइकि होती हे की ये अपना पैसा वहा देते हे जहा इन्हे लगे की रिटर्न जरूर मिले इस रिटर्न के कई रूप होते हे इससे मिलता हे मन की शांति यश आख़िरत आदि ये धर्मकर्म या समाजसेवा में पैसा लगा देंगे मगर विचारो की दुनिया को चवन्नी नहीं देंगे क्योकि इन्हे लगता हे की इसमें रिटर्न तो कुछ हे ही नहीं———- ? जैसे एक एडिटर साहब जो मुझे दस हज़ार भी देने को राज़ी नहीं थे वो खुद एक दिन बता रहे थे की उनके बिज़नेस का एक कर्मचारी की मौत हो गयी तो क़ानूनी हक़ के आलावा भी उन्होंने उसे ( femly ko ) अपनी जेब से भी दस लाख रूपये दिए जबकि हमारे लेखन विचार और कामकाज को वो भिखारियों से भी कम पैसा देते थे मुझसे अधिक पैसे वो भिखारियों को दे देते होंगे क्योकि उन्हें पता हे की रिटर्न में भिखारी दुआए देगा ब्लेसिंग मिलेगी फिर देने का अलग ही आनंद भी होता हे विचारक लेखक साला क्या रिटर्न देगा कुछ भी तो नहीं ”वो तो रिटर्न में दुआए भी नहीं देगा और अगर देगा भी तो दुआए तो दीन हीन लुंजपुंज लुटे पिटे गरीब विकलांग फटेहालों लोगो की लगती हे ” लेखक विचारक थोड़े ही ना , अब समझिये फंडा और समस्या क्या हे वो वहा दस लाख दे देंगे क्योकि उन्हें पता हे की इसकी रिटर्न में उन्हें पुण्य मिलेगा सवाब मिलेगा ब्लेसिंग मिलेगी आख़िरत में इसका फायदा होगा उन्हें पता हे फिर दुनिया में भी समाज में चार लोगो में फिर कर्मचारियो के बीच भी यश मिलेगा यानी रिटर्न मिलेगा चार लोग तारीफ करेंगे जयजयकार करेंगे ये सब इंसान की ज़बर्दस्त नीड होते हे तो रिटर्न में ये नीड पूरी होगी तो वहा ये दे देंगे लेकिन विचारो की दुनिया में ये ये सोचते हे की भला इस सबमे हमारे लिए रिटर्न क्या हे——- ? कुछ भी तो नहीं हे सही भी हे इसमें रिटर्न कुछ भी नहीं हे सरदर्दी ही हे इसलिए कोई विचारो में निवेश करता ही नहीं हे जबकि समस्याएं विचारो से विचार विमर्श से मनोजगत में क्रांति से ही सुलझ या काबू आ सकती हे वार्ना और कोई रास्ता नहीं हे बाह्य जगत में अब कुछ नहीं हो सकता हे मनोजगत में ही विचार से कोई क्रांति हो सकती हे आद

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