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उच्च शिक्षा के निजीकरण के ख़िलाफ़ संसद मार्च : क्यूंकि ये बिक गई है गोरमिंट…!

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  1. Indian youths badly needed a REVOLUTIONARY COMMUNIST leadership who follow TEACHINGS OF PARIS COMMUNE which is public could not do without SMASHING STATE APPARATUS. It means don’t trust on bourgeois parliament , executive, judiciary. There is no precedence like a COMMUNIST PARTY came to power through bourgeois democracy

  2. मीडिया’ प्रेस भी तो प्राइवेट हातो में है , वो भी तो निजी क्षेत्र में है, वहां भी हजारो पगारी कर्मचारी , जो अपने को पत्रकारं कहलवाते है, अपने मालिक का प्रॉफिट बढ़ाने में व्यस्त है.वहाँ किसी को क्या दिक्कत है? अस्पताल, चिकित्सा भी प्राइवेट हातो में है. इसलिये अब उच्च शिक्षा को भी कालानुरूप होना ही पड़ेगा , बाजार के अनुरूप होंना ही पड़ेगा तभी तो उसमें किये गए खर्च का कोई मतलब है . अब समय आ गया है कि बेमतलब के कोर्स बंद हो, प्रोफेसरों , शिक्षको के लाड बन्द हो, चूंकि उन्हें पालक फीस देते और मालिक पगार, इसलये वे छात्रों को अच्छी व नई शिक्षा , तत्परता से दे, ना कि छात्रों को कोई कालबाह्य आइडियोलॉजी का पाठ पढ़ाकर उन्हें आंदोलनों के लिए उकसाये .

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