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गठबंधन की ताकत को देखकर प्रियंका गांधी ने मैदान छोड़ दिया: शालिनी यादव

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शालिनी यादव बनारस से सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन की उम्‍मीदवार हैं। वे पहले भी सपा की ओर से घोषित उम्‍मीदवार थीं, लेकिन बीच में नामांकन के दिन पार्टी हाईकमान ने उन्‍हें बैठाकर बीएसएफ के बरखास्‍त सिपाही तेज बहादुर यादव को टिकट दे दिया। जब तेज बहादुर यादव का परचा चुनाव आयोग से निरस्‍त हो गया तो शालिनी यादव को फिर से प्रत्‍याशी बनाना पड़ा। अब तेज बहादुर के पास कोई गुंजाइश नहीं बची है क्‍योंकि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है, लेकिन वे शालिनी यादव के समर्थन में प्रचार बेशक कर रहे हैं।

इस समूचे घटनाक्रम समेत अपने चुनावी एजेंडे पर शालिनी यादव ने मीडियाविजिल के शिव दास से दो दिन पहले लंबी बातचीत की और दावा किया कि बनारस की असली जंग मोदी और उनके बीच है क्‍योंकि अजय राय हारे हुए विधायक हैं। प्रस्‍तुत है बातचीत के प्रमुख अंश:

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  1. गर्मी की छुट्टी से पहले…….( संदर्भ कल का लेख ) सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कहना कि महिला का आरोप न्यायपालिका पर हमला है । लेकिन न्यायपालिका पर तो न जाने कब से हमला जारी है। जब दलितों का सामूहिक नरसंहार बिहार में हुआ हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई। ऐसे दर्जनों बड़े और करोड़ों छोटे उदाहरण दिए जा सकते हैं । स्व जज लोया और 100 करोड़ की रिश्वत देने वाला जज और उसका राजनीतिक पिता आज भी इंसाफ की ओर के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर स्वर्ग से नजरें जमाए हुए है । और मारुति के मजदूरों हेतु जब चंडीगढ़ हाई कोर्ट के जज ने कहा था कि अगर मारुति के मजदूरों को जमानत दे दी तो विदेशी निवेश प्रभावित होगा एवं ताजा मामले में गुड़गांव कोर्ट द्वारा बिना एक भी सबूत के 13 मजदूरों को आजीवन कारावास देना यह शायद हमारे मुख्य न्यायाधीश को न तो कानून पर हमला जान पड़ता है न न्यायपालिका पर हमला जान पड़ता है न संविधान पर । आखिर जैसे पूरा देश सिमटकर भाजपा पर चला आया है बल्कि एक व्यक्ति मोदी में आ गया ऐसे ही पूरी न्याय व्यवस्था एक व्यक्ति में घनीभूत हो गई हैं ।
    आप 25 साल बाद तो आडवाणी जोशी के ऊपर चार्जशीट देते हैं। न्याय भी 250 साल में होगा। वो भी मारुति सुजुकी टाइप।
    पी यू डी आर/ पीयूसीएल जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित एक मानवाधिकार संस्था है जिसने 2018 में मारुति के अन्यायी फैसले के खिलाफ एक लेख प्रकाशित किया था ।। पी यू डियर ने मारुति पर 2000 सन के बाद 3 अंग्रेजी और एक हिंदी रिपोर्ट प्रकाशित की है जो साइट पर उपलब्ध है कृपया पढें और खुद फैसला करें कि न्यायपालिका और संविधान पर हमला मारुति मजदूरों के केस में हुआ था या एक महिला द्वारा जो कि एक व्यक्ति मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगा रही थी ना कि एक मुख्य न्यायाधीश की हैसियत से उन पर आरोप लगा रही थी। जज को 500 करोड़ रुपए रिश्वत तो पक्का मिल गया है । भारत के ही नहीं पर दुनिया भर के सारे ही कानून के विद्यार्थियों शिक्षकों को इस मारुति के केस को पढ़ना अनिवार्य बना देना चाहिए ताकि उन्हें पता चले के जज को क्या नहीं करना चाहिए और न्याय कितनी खोखला शब्द है ।https://pudr.org/majadauuraon-kao-kathaora-sajaa-daenae-vaalae-maarauutai-kaesa-kae-anayaayai-adaalatai-phaaisalae

  2. सन्दर्भ कल का भोपाल संबंधी लेख…. मैं उस समय पंतनगर विश्वविद्यालय का बीवीएससी का छात्र था जब भोपाल गैस दुर्घटना हुई । तब विश्व विद्यालय में पर्यावरण मंच चलता था जिसमें पीएचडी छात्र डॉक्टर वीर सिंह , मृदा विज्ञान के सिद्धार्थ शंकर मुखोपाध्याय और मैं ,उमेश चंदोला थे। देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर लोहुमी जी जो कि मूलतः प्राइमरी के शिक्षक थे वह भी इसमें शामिल थे या संभवतः उन्होंने इसकी स्थापना की थी । तब वीर सिंह पत्रकार का भी काम करते थे ।मुझे याद है उस समय हमने एक मीटिंग मानविकी महाविद्यालय में करवाई थी । बायोकेमिस्ट्री के प्रो गर्ग भी इसमें शामिल हुए थे । अगले दिन नवभारत टाइम्स अखबार में मोटे शीर्षक
    से एक लेख प्रकाशित हुआ था जिसका शीर्षक था तीसरी दुनिया के लोग उनके गिनी पिग है । यही आशंका बाद में भी कई वैज्ञानिकों ने व्यक्त की थी कि शायद भोपाल का प्रयोग मानव प्रयोग था जो कि अमेरिकी पेस्टिसाइड कंपनी यूनियन कार्बाइड ने किया था जो कि अब डाउ केमिकल के नाम से प्रसिद्ध है एंडरसन बड़े शान से दुर्घटना के बाद आए और 4 घंटे गेस्ट हाउस में बिताने के बाद अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सहयोग से अमेरिका उड लिए और मौत तक उन्हें कोई ताकत हिला ना सकी । इसके बारे में निसंदेह और जांच की जरूरत है आज भी डॉक्टर वीर सिंह पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय उधमसिंह नगर , उत्तराखंड में कार्यरत हैं।। डा. उमेश चन्दोला ,राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी उत्तराखंड
    9719689540

  3. शायद वियतनाम मे भी यह गैस प्रयोग की गई है। यानि मिक या मिथाइल आइसो साइआनेट

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