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“मेड इन इंडिया” कहे जा रहे “मित्रों” ऐप का क्रिएटर पाकिस्तानी है !

सोशल मीडिया पर आकर चाइना की ऐप डिलीट करने और उसकी रेटिंग गिराने का कैंपेन चलाने लगते हैं। उसके सामानों को न ख़रीदने का आग्रह करते हैं। लेकिन ज़मीनी स्तर पर देखने पर ये सब संभव नहीं लगता। इस तरह के कैंपेन चलाने के पहले हमें खुद को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना होगा। क्वांटिटी के नाम पर क्वालिटी वाले स्कूल और कॉलेज स्थापित करने होंगे।

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शॉर्ट वीडियो शेयरिंग ऐप मित्रों को “मेड इन इंडिया” और भारत का टिकटॉक का जवाब बता कर पिछले कई दिनों से प्रचारित किया जा रहा था लेकिन “मित्रों” की सच्चाई कुछ और है। “मित्रों” मेड इन इंडिया नहीं मेड इन पाकिस्तान है। दरअसल यूट्यूबर कैरी मिनाटी के टिक टॉक को लेकर बनाए गए रोस्ट वीडियो और टिकटॉक पर महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को लेकर ग़ैर-ज़िम्मेदारी भरे वीडियो के सामने आने के बाद, भारतीय यूजर्स और अन्य भारतीय लोगों ने टिकटॉक की रेटिंग काफ़ी नीचे गिरा दी थी। जिसके बाद अचानक से “मित्रों” ऐप सामने आता है। अब तक इस ऐप को 5 मिलियन यानि 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। तमाम मीडिया वेबसाइट और सोशल मीडिया पर इस ऐप को भारतीयता का चोला पहना कर पेश किया जा रहा था।

पाकिस्तान कनेक्शन

भारत का अधिकतर टीवी मीडिया जिस पाकिस्तान के नाम पर टीआरपी बटोरता है। ये मित्रों ऐप भी दरअसल उसी पाकिस्तान के एक डेवलपर का बनाया हुआ है। वोकल फॉर लोकल की तर्ज़ पर प्रचारित “मित्रों” ऐप पाकिस्तान के “टिकटिक” ऐप का रिब्रांडेड और क्लोन वर्ज़न है। इरफ़ान शेख़ जो कि पाकिस्तान की QBoxus नाम की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम के सदस्य हैं। उन्होंने बताया है कि हमने टिकटिक ऐप बनाया है और कोई भी CODECANYON  नाम की एक वेबसाइट से टिकटिक का सोर्स कोड 34 डॉलर (लगभग 2567 रुपए) में ख़रीद सकता है। अभी तक कुल 288 बार इसके सोर्स कोड को ख़रीदा जा चुका है।

Codecanyon से साभार

इमरान बताते हैं कि “मित्रों” भी उसी सोर्स कोड पर बनाया गया और रिब्रांडिंग करके “मित्रों” नाम से भारत में लॉन्च कर दिया गया है। उनका कहना है कि हम मशहूर ऐप्स का क्लोन वर्ज़न बनाकर उन्हें कम दामों पर बेचते हैं। उसके पीछे कारण बताते हुए इरफ़ान कहते हैं कि बहुत से लोग हैं जो ऐप लॉन्च करना चाहते हैं लेकिन पैसे की कमी के चलते ऐप नहीं बना पाते और हमें इससे कोई समस्या भी नहीं है। बस इसके असली क्रिएटर हम हैं तो हमें उस बात का क्रेडिट दिया जाना चाहिए। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इरफ़ान शेख बताते हैं कि “टिकटिक” के सोर्स कोड को ख़रीदकर, बिना किसी बग को हटाए या किसी और अपग्रेड के मित्रों ऐप बना दी जाती है।

मित्रों के फाउंडर का नाम शिवांक अग्रवाल बताया गया है, जो कि आईआईटी रुड़की से पासआउट बताए जाते हैं। काफ़ी सर्च करने पर भी मित्रों ऐप की कोई वेबसाइट नज़र नहीं आती। हालांकि प्ले स्टोर पर जो info@mitron.tv का ईमेल एड्रेस दिखाई देता है उस पर मेल भेजने पर कोई जवाब नहीं आया है। और न ही मेल भेजे जाने पर कोई एरर शो कर रहा है। “मित्रों” ऐप की प्राइवेसी को लेकर भी कोई जानकारी  नहीं है। हमारे अंदर की देशभक्ति जब भी हिलोरे मारती है तो हम सोशल मीडिया पर आकर चाइना की ऐप डिलीट करने और उसकी रेटिंग गिराने का कैंपेन चलाने लगते हैं। उसके सामानों को न ख़रीदने का आग्रह करते हैं। लेकिन ज़मीनी स्तर पर देखने पर ये सब संभव नहीं लगता। इस तरह के कैंपेन चलाने के पहले हमें खुद को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना होगा। क्वांटिटी के नाम पर क्वालिटी वाले स्कूल और कॉलेज स्थापित करने होंगे।


 

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