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गौहर रज़ा मामले में ज़ी न्यूज़ की सज़ा बरक़रार, 16 को चलाना होगा माफ़ीनामा !

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मशहूर शायर और विज्ञानी गौहर रज़ा को देशद्रोही और हर साल दिल्ली में आयोजित होने वाले शंकर शाद मुशायरे को ‘अफ़ज़ल प्रेमी गैंग का मुशायरा’ बताने के मामले में ज़ी न्यूज़ को हफ़्ते भर के अंदर एक लाख रुपये जुर्माना अदा करना होगा और 16 फ़रवरी को रात नौ बजे अपनी स्क्रीन पर माफ़ीनामा चलाना होगा। नेशनल ब्रॉडकास्ट स्टैंडर्ड अथॉरिटी ने यह आदेश देते हुए ज़ी न्यूज़ की पुनर्विचार याचिका को ठुकरा दिया है।

शंकर-शाद मुशायरे में भारत-पाकिस्तान के शायर सम्मिलित रूप से क़लाम सुनाते हैं। यहाँ संदर्भ 5 मार्च 2016 के मुशायरे का है जिसे ‘अफ़ज़ल प्रेमी गैंग का मुशायरा’ बताते हुए ज़ी न्यूज़ ने 9 मार्च से 12 मार्च के बीच जमकर हंगामा किया था। ् 4 अप्रैल को गौहर रज़ा ने इसकी शिकायत एनबीएसए से की। तमाम दलीलों को सुनने के बाद न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड ऑथोरिटी (एनबीएसए) के चेयरपर्सन न्यायाधीश आर.वी. रवीन्द्रन ने 31 अगस्त 2017 को ज़ी न्यूज को आदेश दिया कि वह एक लाख रुपये  का जुर्माना अदा करने के अलावा  8 सितंबर को रात नौ बजे  निम्नलिखित माफ़ीनामा प्रसारित करे–

“ नई दिल्ली में आयोजित वार्षिक शंकर शाद (भारत पाक) मुशायरा के दौरान मार्च 2016 को प्रो.
गौहर रजा द्वारा कविता पाठ के बारे में जी न्यूज चैनल पर से 12 मार्च 2016 को अफजल प्रेमी
गैंग का मुशायरा” के शीर्षक के साथ प्रसारित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचारों एवं इस
कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल की गई टैगलाइन के लिए जी न्यूज़” चैनल को खेद है। इसके अलावा ज़ी
न्यूज चैनल प्रो. गौहर रजा तथा उक्त मुशायरें में भाग लेने वालों के बारे में अफजल प्रेमी गैंग” के
नाम से दिए गए विवरण के लिए भी खेद प्रकट करता है।

लेकिन ज़ी ने यह आदेश नहीं माना और पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। बहरहाल, एनबीएसए ने उसकी तमाम दलीलें ठुकरा दीं और 8 फ़रवरी को अपने पुराने आदेश को पालन करने का आदेश दिया। गौहर रज़ा की ओर से जिरह मशहूर वकील वृंदा ग्रोवर ने की और इस क़ामयाबी की जानकारी फ़ेसबुक पर दी-

अब देखना यह है कि ज़ी न्यूज़ इस बार आदेश मानता है कि नहीं। या फिर वह भी इंडिया टीवी के रजत शर्मा की राह चलेगा जिन्होंने एक बार जुर्माना होने पर संगठन ही छोड़ दिया था। ध्यान देने की बात यह है कि एनबीएसए को किसी और ने नहीं एनबीए (नेशनल ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन) ने बनाया है जो चैनलों की अपनी संस्था है। लेकिन आत्मनियमन के नारे के तहत बनई संस्थाओं का सम्मान करने के लिए भी चैनल तैयार नहीं हैं।

 

 

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