Home टीवी घबराहट छुपाने के चक्कर में डॉ. सुभाष चंद्रा ने पूरी गंभीरता से...

घबराहट छुपाने के चक्कर में डॉ. सुभाष चंद्रा ने पूरी गंभीरता से ”घी में आग” डाल दिया!

SHARE

डॉ. सुभाष चंद्रा का ज़ी न्यूज़ वाकई ”घी में आग” डालता है, ”आग में घी” नहीं. जेएनयू प्रकरण में नारेबाज़ी का कथित फर्जी वीडियो दिखाने के आरोप में जब दिल्ली सरकार ने तीन चैनलों को नोटिस भेजने का एलान किया जिसमें ज़ी न्यूज़ भी शामिल है, तो बेहद शर्मनाक घटनाक्रम में खुद चैनल के मालिक डॉक्टर साहब को अपने संपादकों की करतूतों का बचाव करने के लिए परदे पर उतरना पड़ा, जैसा कि वे पहले भी करते रहे हैं. इस जल्दीबाजी में वे ऐसी बात कह गए, जो इस चैनल की हकीकत है.

दरअसल, सात फरवरी की शाम रिश्वतखोरी के आरोप में जेल की हवा खा चुके पत्रकार सुधीर चौधरी जब डीएनए में अवतरित हुए, तो उनके पास देश भर से मिल रही गालियों का कोई जवाब नहीं था, सिवाय इसके कि वे मालिक की शरण में चले जाते. चौधरी के इंट्रो के बाद परदे पर चैनल का बचाव करने के लिए खुद डॉ. सुभाष चंद्रा आए, तो वे हमेशा के मुकाबले कुछ ज्यादा ही गंभीर दिख रहे थे. अपने चैनल की ”राष्ट्रवादी पत्रकारिता” का बचाव करते हुए उन्होंने डिस्क्लेमर दे डाला कि वे प्रो-इंडिया खबरें दिखाते हैं, जिसे प्रो-बीजेपी नहीं समझा जाना चाहिए.

दुनिया जानती है कि डाक्साब स्वयंसेवक रह चुके हैं, उनके पिता भी स्वयंसेवक थे, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव प्रचार २०१४ में किया था और उनकी जीवनी का लोकार्पण खुद मोदीजी ने अपने आवास पर किया है। बावजूद इसके उन्होंने बीजेपी से कन्नी काटते हुए कांग्रेस पार्टी के भीतर अपने मित्रों तक का हवाला दे डाला.

इसी उत्तेजना में पूरी गंभीरता से सुभाष चंद्रा ने एक ऐसा वाक्य कह डाला, जो उनके दिमाग के भीतर चल रहे ख्यालों को साफ़ बयान करता है. वे बोले: ”अभी इन दिनों में बड़ा वातावरण गरम बना हुआ है. ये प्रारम्भ तो कई दिनों से हो गया था, लेकिन ये जेएनयू में जो इन्सिडेन्स हुआ इसने… इसने घी में आग डालने का काम किया”.

जो बात दिल में होती है, वो जुबां पर आ ही जाती है! बहरहाल, कहते हैं कि डॉ. चंद्रा मोटिवेशनल स्पीकर हैं, छात्रों के बीच ज्ञान देते हैं. उनकी ”प्रतिष्ठा” का उनके रिश्वतखोर संपादकों को ज़रा भी ख्याल होता तो इस वीडियो को तत्काल हटा लिया जाता जो चार दिन से नेट पर पड़ा हुआ है. ऐसा लगता है कि डाक्साब का ज्ञान ज़ी न्यूज़ के भक्त संपादकों को रास नहीं आता या फिर यह भी सवाल हो सकता है कि बिल्ले के गले में घंटी कौन बांधे! डाक्साब को ऐसे नाकारा पत्रकारों को तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए जो ”घी में आग” पड़ता हुआ देख चुप हैं.

डाक्साब को ”घी में आग” डालते हुए सुनना चाहें तो नीचे दिया वीडियो प्ले करें.

LEAVE A REPLY