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‘मंदिर से रुकते हैं हादसे’- अंधविश्वास फैलाने में जागरण से आगे निकला ‘आज तक’

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दीपांकर पटेल

 

क्या पाखण्ड फैलाने के मामले में हिंदी का नंबर एक चैनल आज तक, हिंदी के नंबर एक अख़बार दैनिक जागरण से आगे है ??

देश में लापरवाही के चलते, भ्रष्टाचार के चलते, सरकारी संवेदनहीनता, विकास दिखाने के नाटक की दावेदारी चलते एक दुर्घटना घटती है। बनारस में निर्माणाधीन ओवरब्रिज का बीम खचाखच भरी सड़क पर कच्च से गिर जाता है। राहगीर पिस कर मर जाते हैं, घायलों को निकालने के लिए फौज बुलानी पड़ती है। लेकिन नेशनल मीडिया, मेनस्ट्रीम मीडिया, व्यूअरशिप और रीडर शिप में टॉप पर रहने वाला मीडिया आपको क्या दिखाता है?

वो आपको दिखाता है टूटी गाड़ियां, टनों वजनी कंक्रीट के बीम के नीचे दबे लोग, चीखती आवाजें, अस्पताल के दृश्य, नेताओं के बयान, मुवावजे की घोषणा ??

लेकिन ये सब तो आपको प्राइवेट मेनस्ट्रीम मीडिया के बिना भी सोशल मीडिया से पता चल रहा है। इसके अलावा मेनस्ट्रीम मीडिया आपको क्या दिखा रहा है??

चलिए दिल्ली – दिल्ली में ग्राउंड रिपोर्ट करके धूम मचाने का दावा करने वाले वेब पत्रकारिता की मजबूरी तो समझ आती है।

क्राइसिस रिपोर्टिंग के मामले में लाइक-शेयर- क्लिक के बाजार में हिट पाकर उछल रहे वैकल्पिक मीडिया ने बनारस मामले में अपनी नाक धूल में बोर दी, सोशल मीडिया में वायरल वीडियो को री-वायरल, री-री-वायरल करने के अलावा वो बस री-री करते रहे, संसाधनों की जरूरत सबको समझ में आ रही होगी, ANI,PTI और वायरल कंटेंट के अलावा वेबसाइट चला रही क्यूबिकल पत्रकारिता के पास और है भी क्या ? मीडिया प्लेटफार्म बना लेना स्टार्टअप मॉडल से आगे बढ़े इसके लिए संसाधन तो चाहिए।

लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया ने आपको क्या दिखाया?

क्या मेनस्ट्रीम मीडिया ने अपने संसाधनों का इस्तेमाल करके ऐसी कोई रिपोर्ट दिखाई जिसमें देश भर में बन रहे निर्माणाधीन ओवरब्रिजों की हाल-खबर ली जा सके और बताया जा सके कि ओवरब्रिज के चक्कर में लोग कैसे एक्सीडेंट, जाम, धूल, शोर से परेशान हैं? सुरक्षा मानकों का कितना पालन होता है ?

ऐसी जगहों के दृश्य दिखाए जहां ऊपर बीम की ढ़लाई चल रही है नीचे सवारी की ढ़ुलाई चल रही है?

नहीं दिखाया !!

दरअसल बड़े चैनलों ने भी अपने स्ट्रिंगर बड़ी संख्या में घटाए हैं, सबको मालूम है चैनल चलाने भर का कच्चा माल सोशल मीडिया से उठा लेंगे स्टिंगर को पैसा क्यों दें?

फील्ड रिपोर्टरों में कटौती हुई है, तो अन्दर की खबर कौन निकाल कर लाएगा?

फिर क्राइसिस के वक्त स्टूडियो के एंकर को फील्ड में उतारना पड़ता है। चैनल को दिखाना भी तो है कि उसकी मौजूदगी ग्राउंड जीरो पर है।
राजधानी ट्रेन पर सवार होकर एंकर जब घटना स्थल पर पहुंचता है तो उसे सिर्फ गिरा हुआ बीम दिखता है, उस बीम के गिरने से पहले रचा गया बिम्ब नहीं दिखता। वो चैनल पर दिखाने के लिए नये दृश्य ढ़ूँढ़ता है, वो बस कुछ नया कर देना चाहता है, वो बस नया विजुअल ढूंढ़ लेना चाहता है। पाखण्ड और धर्म सबसे पुरानी चीज है जो किसी दूसरी चीज में मिलाने से हर बार नई दिखती है।

तो..

दैनिक जागरण ने धर्म का सहारा लिया, ग्रहों की दशा खराब होने का हवाला देकर उसे दुर्घटना का कारण बता दिया।

 

अब ‘आज तक’ के प्रोफेशनल एंकर निशांत चतुर्वेदी की बारी थी, टूट चुकी गाड़ियों का डंपिंग ग्राउंड दिखाने के बाद उन्हें कुछ और दिखाना था जो चल सके और धर्म से ज्यादा क्या चलता है?

वो बनारस पर धर्म की अनुकंपा होने की बात करने लगते हैं। निशांत चतुर्वेदी बनारस में गिरे ओवरब्रिज के नीचे खड़े होकर ये बताते हैं कि जहां हनुमान मंदिर था वहां बीम सही सलामत है, जहां मंदिर नहीं था वहां बीम गिर गया है!!!!

वो हनुमान मूर्ति पर जमा धूल का गुबार नहीं देख पाते ..वो बस जल्दी से आस-पास खड़े लोगों से पूछकर अपनी बात की पुष्टि करा देना चाहते हैं। वो लोगों के हवाले से ये बता देना चाहते हैं कि बस हनुमान की मूर्ति ही वो ताकत है जिसने पूरे ब्रिज को गिरने से बचा लिया।

क्या निशांत यही चमत्कार की पत्रकारिता दिखाने बनारस का टिकट कराकर ग्राउंड जीरो गये थे?

इस तर्क के हिसाब से क्या जहाँ भी, जितनी भी दूर में ओवरब्रिज बनना है, उतनी दूर में पहले मंदिर बनवा दिया जाय ???

ये कैसी स्टोरी है ? ये क्या नैरेटिव है ? ये कैसी रिपोर्टिंग हैं? क्या अब चमत्कारी कहानियों के सहारे ग्राउंड रिपोर्टिंग होगी ??

 

 

हँसी तो इस बात पर आती है कि निशांत चमत्कार की बात कर रहे हैं और स्टोरी बैंड पर “सिस्टम की लापरवाही का पर्दाफाश” घोषित करता हुआ टिकर चल रहा है।

आपको नहीं लगता कि ऐसी कहानियों से प्रशासन पर पड़ रहा दबाव कम होगा?

कहीं धर्म-पाखण्ड की आंड में जवाबदेही तो कमजोर नहीं हो रही?

फिर ये सब मीडिया क्यों कर रहा है?

(नोट- इस खबर में निशांत खुद एक व्यक्ति से जाकर हनुमान मंदिर के कारण हुए चमत्कार के बारे में पूछते हैं। उसके पहले वो इस चमत्कार के पक्ष में वाक थ्रू करते हैं, और अपनी तरफ से सवाल पूछकर चमत्कार के पक्ष में उसकी सहमति लेते हैं। इससे ये साबित हो सकता है कि वो खुद चमत्कार के इस तर्क से सहमत हैं)

वीडियो देखिए-



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