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प्रणव मुखर्जी को ‘संघी टोपी’ पहनाने वाले को ट्विटर पर फॉलो करते हैं मोदी!

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7 जून की शाम नागपुर के आरएसएस मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के भाषण के कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हो गई। इस तस्वीर में मुखर्जी भी आरएसएस नेताओं की तरह काली टोपी पहने हुए आसएसएस की शैली में दायाँ हाथ सीने के सामने रखकर सैल्यूट करते नज़र आ रहे थे।

ज़ाहिर है, तस्वीर फ़र्ज़ी थी। प्रणव मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस प्रवक्ता की आशंका सच साबित हो गई थी। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति के नागपुर जाने के फ़ैसले पर असहमति जताते हुए कहा था कि कोई उनका भाषण याद नहीं रखेगा। रह जाएँगी बस तस्वीरें और बीजेपी का डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट उनका इस्तेमाल करेगा। उन्होंने तुरंत ट्वीट पर अपनी आशंका के सच होने पर अाक्रोश जताया।

 

 

फर्ज़ी तस्वीर के वायरल होने और शर्मिष्ठा मुखर्जी के कड़े बयान को देखते हुए आरएसएस ने प्रेस में एक बयान जारी कर कहा कि विभाजनकारी राजनीतिक ताकतों ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की है।

सवाल था कि आख़िर ऐसा किया किसने। कौन हैं विभाजनकारी ताकतें। इंडिया टुडे के वायरल टेस्ट टीम ने दावा किया है कि इसके पीछे मिहिर झा है जिसने ट्विटर पर सबसे पहले अपने मित्र को सही तस्वीरें दिखाते हुए पूछा कि क्या प्रणव मुखर्जी के सिर पर काली टोपी पहनाई जा सकती है और हाथ भी दूसरे आरएसएस नेताओ ंकी तरह मोड़ा जा सकता है..उसने बड़ी सफ़ाई से इसमें कांग्रेस आईटी सेल का नाम भी जोड़ दिया..

 

जल्दी ही, उसके ट्वीटर मित्र अभि झा की ओर से जवाब मिला। मुखर्जी को टोपी पहनाई जा चुकी थी।

 

और मिहिर ने तुरंत बताया कि फोटो आ गई है जिसे उनके दोस्त (अभि) ने खींची है, जो अतिथि के रूप में वहाँ मौजूद थे–

 

आखिर ये “विभाजनकारी” मिहिर झा और अभि झा हैं कौन। जब इसकी पड़ताल हुई तो पता चला कि दोनों को देश के शीर्ष बीजेपी नेता ट्विटर पर फ़ालो करते हैं। छोटे मोटे नहीं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी आईटी सेल के इनचार्ज अमित मालवीय। यानी ये दोनों ही मोदी की नज़र में कुछ ऐसा ज़रूर करते हैं जिसे महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।

 

 

 

सच्चाई सामने आते ही मिहिर झा ने पहले तो मज़ाक में ऐसा करना स्वीकार किया, फिर ट्विटर हैंडल को प्राइवेट कर दिया। अब कोई उसे देख नहीं सकता। उसने यह गर्वोक्ति भी हटा दी कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी उसे फॉलो करते हैं।

ज़ाहिर है, शर्मिष्ठा मुखर्जी की आशंकाएँ सही साबित हुई हैं। यह पहली बार नहीं है कि देश के प्रधानमंत्री ऐसे लोगों को फॉलो करते पाए गए हैं जो समाज में ज़हर फैलाने का काम करते हैं। ऐसे लोग बीजेपी-आरएसएस के लिए रात दिन झूठ फैलाते रहते हैं। भारत का प्रधानमंत्री समाज में ज़हर फैलाने वालों को फ़ॉलो करे, यह अफ़सोस से कुछ ज़्यादा करने की बात है।

 



 

3 COMMENTS

  1. This is absolutely wrong that Mukherjee gone there for rss. It was corporate fascist Complex which Ordered him. That was the reason Nehru felt threatened by 1949 China and urged cia( Ford Foundation) to open first foreign office in a country. So 1952 it all happened.

  2. New York herald tribune editorial 13 October 1962…… Title…. India Declares war on China. India attacked China A new socialist state inspite of the fact that China was least intended to fight even a village leave alone a country as big as India. Why a war torn country needed agriculture, industrial growth which was badly needed. China maintained good relations with all neighbours for it. ( rupe-india.org Himalayan blunder). RSS helped nehru that time. Nehru reciprocated by allowing Killer of Gandhi in Republic day parade.

  3. … 13 /2/2017 thewirehindi.com…. JaniyePradhanmantri Kya padhte hai. Know about his twitter feed. Very interesting.

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