Home टीवी बीजेपी के खेल में वामपंथियों से ‘इंशाअल्लाह’ लगवा दिया संपादकों ने !

बीजेपी के खेल में वामपंथियों से ‘इंशाअल्लाह’ लगवा दिया संपादकों ने !

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मीडिया जेएनयू में हुई राष्ट्रविरोधी नारेबाज़ी का ठीकरा लगातार वामपंथियों के सिर फोड़ने मेंं जुटा रहा। क्या संपादकों को इतनी भी अक्ल नहीं है कि वामपंथी नारों के बारे में जान सकें। क्या कोई वामपंथी इंशाअल्ला जैसा नारा लगा सकता है। यह पहले दिन से साफ़ था कि नारे लगाने वाले कश्मीरी थे। ख़ुफ़िया विभाग के पास भी उनकी जानकारी है। ख़ुद जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के छात्रनेताओं ने जेएनयू में नारेबाज़ी करने वाले छात्रों के बारे में जानकारी दी है। लेकिन कश्मीर में पीडीपी से गलबहियाँ डालने को आतुर  केंद्र सरकार कार्रवाई करने के बजाय विरोधियों को ‘देशद्रोही’ होने का ठप्पा लगाने में जुटी है। आइसा के पूर्व छात्रनेता और झारखंड में लंबे समय तक विधायक रहे विनोद कुमार ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट पर यह लिखा है–

“बारत(भारत) तेरे टुकड़े होंगे
इन्शा अल्ला इन्शा अल्ला ”

अब यह पूरी तरह साफ़ है कि कश्मीरी छात्रों युवाओं ने ९ फरवरी को jnu के साबरमती ढाबे के पास ए बी वी पी के “दूध माँगो खीर देंगे – कश्मीर माँगा चीर देंगे ” के जवाब में ये नारे लगाये । विदेशी पत्र पत्रिकाओं और देशी अख़बारों के eyewitness accounts में ये आया है । कार्यक्रम रद्द होने के रिजेक्शन में जे एन यू में यह नारेबाज़ी हुईं ।

और यह भी साफ़ है कि जे एन्ड के में साझा सरकार बनाने की बीजेपी नेतृत्व की कोशिशों के कारण इन कश्मीरी युवाओं को (फोटोज होने के बावजूद) दिल्ली पुलिस नहीं पकड़ेगी । बहुत दबाव बना तो इक्का दुक्का धरपकड़ दिखा देगी ।

तो इस मामले का सारा ठीकरा वामपंथी छात्रों पर ही फोड़ा जायेगा (जिनका इससे कोई लेना देना नहीं है )और देशभक्ति उत्तर प्रदेश के चुनाव में बेची जायेगी !

हद तो ये है कि ओबीसी छात्रों के एक संगठन द्वारा jnu में मनाये जाने वाले महिषासुर शहीद दिवस का ठीकरा भी नास्तिक वामपंथी ही झेलेंगे । स्मृति ईरानी ने लोकसभा में यह उन्हीं के मत्थे मढ़ा । बीते कई वर्षों में भाजपा सांसद उदित राज इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हुआ करते थे । उनके चित्र कल से ट्विटर पर वायरल हैं !

जिस वजह से यह सब किया गया (एबीवीपी को मज़बूत करने के लिये ) , वह jnu में तो उल्टा पड़ गया पर उत्तर प्रदेश के चुनावों में बीजेपी को आक्सीजन मिल गई । वजह यह है कि सपा अन्दरखाने बीजेपी के साथ है और बी एस पी सड़क पर सोशल मीडिया में और अन्य राजनैतिक गतिविधियों में संगठित कार्रवाई करने वाली पार्टी है नहीं ।