Home टीवी क्या आज तक के ‘तेज़’ संपादक बनेंगे जबलपुर के अगले एम.पी. ?

क्या आज तक के ‘तेज़’ संपादक बनेंगे जबलपुर के अगले एम.पी. ?

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टीवी टुडे ग्रुप के चेयरमैन अरुण पुरी ने पिछले दिनों अफ़सोस जताया था कि वे उदय शंकर की प्रतिभा को ठीक से पहचान नहीं पाए। मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक ने उदय शंकर के अंदर वो टैलेंट देख लिया जिसे समझने में वे चूक गए। तब से लेकर वे अब तक अपने आपको कोस रहे हैं।

उदय शंकर कई सालों तक ‘आज तक’ के मैनेजिंग एडिटर थे बाद में स्टार ग्रुप  से जुड़ गए थे।

पर क्या अरुण पुरी अपने ग्रुप की एक और प्रतिभा को पहचान पा रहे हैं ! यह बात उन्हें जाननी चाहिए कि ‘आज तक’ के सहयोगी ‘तेज़’ चैनल के हेड संजय सिन्हा आभासी दुनिया के सितारे तो हैं ही, जबलपुर के होने वाले सांसद भी हैं। इस ख़बर के ऊपर जो मुख्य तस्वीर है उसमें लाल चौखटे में काली सदरी पहने हुए संजय सिन्हा बैठे हैं। यह तस्वीर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के फ़ेसबुक पेज से उठाई गई है। 2 जुलाई को जब चौहान जबलपुर के लम्हेटाघाट में पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल होने गए तो संजय सिन्हा उनके साथ मंच पर मौजूद थे। संजय सिन्हा लोकसभा में विराजेंगे- यह बात किसी और ने नहीं, संजय को सार्वजनिक रूप से अपना ‘बेटा’ बताने वाले वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ शुक्ल ने कही है। उन्होंने बाक़ायदा एक पोस्ट लिखकर इसका ऐलान किय है।

ऐसा नहीं कि संजय सिन्हा चैनल की ओर से छह करोड़ पौधे लगाने के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की कवरेज के लिए गए थे। तस्वीरें बताती हैं कि वे मुख्यमंत्री चौहान के साथ पौधारोपण करने वाले मुख्य लोगों में थे। उन्होंने इन तस्वीरों को ्अपने फ़ेसबुक पेज पर शेयर किया है।

 

चौहान से उनकी निकटता का अंदाज़ा इस तस्वीर से भी लगाया जा सकता है जिसमें वे मुख्यमंत्री की कार की अगली सीट में बैठे हैं।

यही नहीं जबलपुर की बच्चियों के साथ भी संजय सिन्हा ने अपनी तस्वीर पोस्ट की है।

इसका मतलब यह नहीं कि मीडिया विजिल संजय सिन्हा को जबलपुर से अगला बीजेपी सांसद बता रहा है। इसके लिए तो पहले पार्टी का टिकट पाकर चुनाव लड़ना और जीतना होगा।  उनके ‘पिता’ ने कहा है कि बीजेपी ही क्यों संजय किसी भी पार्टी से लड़कर जीत सकते हैं।

मीडिया विजिल संजय सिन्हा को शुभकामनाएँ देता है और पाठकों से आग्रह करता है कि वे ‘तेज़’ देखते वक़्त ध्यान रखें कि इसकी कमान एक भावी सांसद के हाथ में है जिसकी बीजेपी नेताओं से काफ़ी नज़दीकी है।

संजय सिन्हा ने पिछले दिनों सोशल मीडिया के मित्रों को जोड़कर ‘संजय सिन्हा परिवार’ को औपचारिक रूप दिया है जिसके कई शहरों में कार्यक्रम हो चुके हैं। वे रिश्ते बनाने के लिए जाने जाते हैं और इस पर उन्होंने किताब भी लिखी है। शंभुनाथ शुक्ल ने अपने बेटे के बारे में जो लिखा है, उसे आप नीचे पढ सकते हैं —

 शम्भूनाथ ‘अप्रबुद्ध’ added 4 new photos.

July 3 at 12:41pm ·

यह मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है कि मेरा पुत्र Sanjay Sinha 2019 में लोकसभा में बिराजेगा। संभवत: भारत के ज्ञात इतिहास में यह पहला शख्स होगा जो राजनीतिक दांवपेच से नहीं बल्कि अपने सामाजिक सरोकारों के चलते लोकसभा में जाएगा। उसे जबलपुर की जनता ने जिताने का मन बना लिया है। जिस तरह से उसका जबलपुर में स्वागत किया जाता है और सिर आँखों पर बिठाया जाता है वह दुर्लभ है। हर दल और हर नेता का वह दुलारा है क्योंकि संजय अकेला ऐसा व्यक्ति है जिसे किसी की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि उसका लक्ष्य उस दुखी आदमी के मन को पकडऩा है जो भरे-पूरे समाज में भी अकेला पड़ा है।

संजय सिन्हा के लिए हरदोई आँखें बिछाये बैठा है, पटना भी, मथुरा और काशी से भी उसे निमंत्रण है पर जबलपुर की तो बात ही अलग है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उसे अपना मानते हैं तो नीतिश कुमार भी और बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद भी। मजे की बात कि जिस दिन वह बिहार के राज्यपाल श्री रामनाथ कोविंद महोदय से मिला उसके आधे घंटे के भीतर ही श्री कोविंद को राष्ट्रपति बनाने की घोषणा सत्तारूढ़ एनडीए ने कर दी। यह उनके लिए भी आश्चर्यजनक था कि एक आदमी कितना सौभाग्यशाली हो सकता है कि उसका मिलना ही सौभाग्य लेकर आया।

संजय सिन्हा को मैने पुत्र माना और संजय ने मुझे अपना पिता। इसका किस्सा फिर कभी पर इतना तो मैं जानता हूं कि संजय ने मेरी वह सेवा की है जो शायद सगा पुत्र भी न करता। एक बार कानपुर प्रवास के दौरान मुझे फूड प्वाइजनिंग हो गई। हम लोग सरकिट हाउस में रुके थे। मगर जैसा कि सरकारी अतिथि गृहों में होता है न खाना ठीक न पानी। रात को मेरी तबियत खराब हो गई। उल्टी-दस्त से मुझे लगा कि बस अब गया कि तब। वहां पर कोई स्टाफ नहीं और किचेन बंद। चौकीदार कहीं पड़ा सो रहा होगा। संजय मानों दूसरे की परेशानी ताड़ लेते हैं। वह मेरे सिरहाने बैठा और अपने बैग से कुछ चाकलेट निकालीं तथा सरकिट हाउस के चौकीदार को ढूंढ़ा तथा किचेन खुलवाई। वहां से चुटकी भर नमक लाया और चाकलेट व नमक देकर पानी पिलाया। मुझे कुछ राहत मिली और मैं कोमा से वापस आया। मुझे सुबह तक नींद भी आई और उसके बाद सुबह संजय ने सुनील मिश्रा को बुलाकर दवाएं मंगवाई जिन्हें महमूद भाई लेकर आए। शाम को मैं अपनी बहन मंजू पांडेय के घर गया और तब उसे किस्सा बताया। मेरी छोटी बहन तो रो पड़ी और अपने भतीजे को खूब अशीषा कि आपने मेरे भाई की जान बचा ली। तो ऐसे संजय अब 17 वीं लोकसभा में बिराजेंगे। यह सोचकर ही मेरा मन खुशी से आह्लादित हो रहा है। आप लोग मुझे और संजय दोनों को बधाइयां दीजिए। पुत्र की बढ़त से पिता को अपार प्रसन्नता होती ही है।

 

1 COMMENT

  1. Ye ADHAAR yani utpadak shaktio ,unke sambandho AUR ADIRACHNA( YA MEDIA, RAJYA,DHARMA,VICHAR ADI) KE badalte sambandho ka samay HAI. Yehi MARX NE KAHA HAI. AAJ VIITTIYA AUR EKADHOKAR POOJI AUR RAJYA KE GATHZOD NE OOSE Hindu fascist ROOP DE DIYA HAI. Samgharsh badne oar FIR koi KEJRIVAAL DUNIA ME POOJI KE HITO KI RAXA KAREGA. CHUNAVBAZ COMMUNIST parties BHI HAI

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