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प्रसून के ‘मास्टर स्ट्रोक’ पर ‘मोदी स्ट्रोक!’ 9 बजे और ABP का सिग्नल ग़ायब !

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पत्रकारिता के वाक़ई अच्छे दिन हैं। 90 फ़ीसदी से ज़्यादा चैनल और अख़बार सरकार के सामने लोट रहे हैं और बाक़ी की बात जनता तक पहुँचने की कोशिश के रास्ते सरकार ख़ुद रोड़ा है। अभी तक यह शिकायत एडीटीवी में रवीश कुमर के प्राइम टाइम को लेकर ही थी कि ज़्यादातर जगह उसे दिखाया नहीं जाता, ख़ासतौर पर केबल ऑपरेटरों के ज़रिए। लेकिन एबीपी पर लगातार चर्चित हो रहे पुण्य प्रसून वाजपेयी के कार्यक्रम प्राइम टाइम के साथ तो और भी ग़ज़ब किया गया है। दिन भर ठीक चलने वाला चैनल 9 बजते ही ‘नो सिग्नल’ हो जाता है। यानी मसला सैटेलाइट का है। यह कोई एक दिन की बात नहीं, बार-बार ऐसा हो रहा है। ख़ुद प्रसून ने इस बाबत ट्वीट किया है-

 

चैनल के लिए यह वाक़ई चिंता की बात है। पुण्य प्रसून वाजपेयी अपने ख़ास अंदाज़ और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। कुछ समय पहले ही वे आज तक छोड़कर एबीपी से जुड़े हैं। उनका शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ अपनी तथ्यपरकता और इस कठिन समय में सरकार के सामने तन के खड़े होने की वजह से लगातार चर्चित हो रहा है। लेकिन लगता है कि मोदी जी का झूठ सामने लाना उन्हें भारी पड़ गया। 6 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यकर्म में छत्तीसगढ़ की एक किसान महिला को पेश किया गया था जिसने कहा था कि उसकी आमदनी दोगुनी हो गई है। लेकिन एबीपी के संवाददाता की ज़मीनी रिपोर्टिंग से यह साबित हुआ कि वह झूठ बोल रही है। उसे सिखाया पढ़ाया गया था। इस ख़बर पर काफ़ी हल्ला हुआ और रमन सिंह सरकार ने बाक़ायदा इसके ख़िलाफ़ प्रेस नोट जारी किया–

 

इसके बाद मोदी सरकार के तमाम मंत्रियों ने भी एबीपी न्यूज़ के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला। लेकिन एबीपी अपनी बात पर डटा रहा। ‘मास्टर स्ट्रोक’ में फिर दिखाया गया कि मोदी की मन की बात के लिए कैसा सारा प्रपंच रचा गया था। रिपोर्ट इतनी प्रामाणिक थी कि सरकार के पास चुप रह जाने के अलावा कोई चारा नहीं था। ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी की इससे काफ़ी किरकिरी हुई। राहुल गाँधी ने भी इसे ट्वीट किया था। मास्टर स्ट्रोक का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। (इस ख़बर के अंत में आप उसे देख सकते हैं।)

प्रसून आँकड़ों के ज़रिए रोज़ ‘मास्टर स्ट्रोक’ में मोदी सरकार के दावों की असलियत परखते हैं। सरकार को यह रास नहीं आ रहा है। लेकिन सीेधे कुछ करने के बजाय लगता है कि उसने ‘न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी’ वाला रास्ता अख़्तियार किया है। यही वजह है कि 9 बजते ही एबीपी का सिग्नल ग़ायब हो जाता है। इस बात की तस्दीक टीवी पत्रकारिता से जुड़े रहे कुछ बड़े नाम कर रहे हैं-

 


 

एबीपी की ओर से इस संबंध में एक ज़रूरी सूचना जारी की गई है। चैनल के मैनेजिंग एडिटर मिलिंग खांडेकर ने इसे ख़ुद फ़ेसबुक पर पोस्ट किया है।

 

यह तो साफ़ है कि नौ बजे सिग्नल ग़ायब हो जाना और दस बजे वापस आ जाना, कोई जादू नहीं है। यह मोदी जी का उल्टा ‘मास्टर स्ट्रोक’ है जिसका मक़सद स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता की हर संभावना को नष्ट कर देना है। सैटेलाइट तक हाथ तो महाबली की ही पहुँच सकते हैं।

नीचे देखें वह वीडियो क्लिप जिसमें छत्तीसगढ़ में दोगुनी आय से जुड़े फ़र्ज़ीवाड़े की पोल खोली गई थी।


 

बर्बरीक