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बदल रहा है राज्यसभा टीवी : JNU में ABVP के छोटे से कार्यक्रम को राष्ट्रीय बुलेटिन में जगह !

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उपराष्ट्रपति पद से हामिद अंसारी के हटने और वेंकैया नायडू के बैठते ही राज्यसभा टीवी के रंग बदलने लगे हैं। यह चैनल हामिद अंसारी के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इसके कार्यक्रमों की गंभीरता ने तमाम चैनलों के शोरगुल के बीच अलग पहचान क़ायम की थी। ख़बरों की प्रस्तुति में भी चैनल हमेशा संतुलन बना कर चलता था।

अब तक  राज्यसभा सचिवालय को RSS कहा जाता था तो अर्थ RAJYA SABHA SECRETARIAT  था। लेकिन इसके अधीन चलने वाले RSTV ने बिना किसी तात्कालिक दबाव के इसका अर्थ  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) समझ लिया है और उसका एजेंडा बढ़ाने में जुट गया है। यहाँ के ज़्यादातर पत्रकार कान्ट्रैक्ट पर हैं और नौकरी बचाने की चिंता में घुल रहे हैं। तुरत-फुरत रंग बदलकर वे सुरक्षित होने का जुगत भिड़ा रहे हैं। उन्हें पता है कि नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, को क्या पसंद आएगा। वे चेतक की तरह पुतली फिरने के पहले ही मुड़ जाने की कला सीख रहे  हैं।

राज्य सभा टीवी में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की अगली ही सुबह न्यूज बुलेटिन में एक ऐसी न्यूज चली जिसे देखकर दर्शको और ऑब्जर्वरों को यह साफ़ महसूस हुआ कि RSTV  में रातो रात सम्पादकीय नीति बदल गयी है। यह ख़बर जेएनयू में आयोजित एबीवीपी के एक कार्यक्रम की थी जिसमें केरल में संघ पर हमले के लिए सीपीएम को दोषी ठहराया गया था। एक लॉन में 20-25 छात्र बतौर श्रोता बैठे थे और एबीवीपी नेता गरज रहे थे। मेहमान वक्ता बतौर आरएसएस के स्वयंभू विचारक राकेश सिन्हा और आईआईएमसी के महानिदेशक के.जी.सुरेश  मौजूद थे।

जेएनयू में ऐसे कार्यक्रम आए दिन होते हैं। तमाम छात्र संगठन अपने-अपने हिसाब से कार्यक्रम करते हैं और वक्ताओं को बुलाते हैं। इससे जुड़े पर्चे भी कैंपस में बाँटे जाते हैं, लेकिन जेएनयू से बाहर शायद ही कभी चर्चा होती है। अख़बार तक में इसके बारे मे नहीं छपता। लेकिन अब राज्यसभा टीवी के लिए एबीवीपी का कार्यक्रम राष्ट्रीय महत्व का हो गया ।

कहा जा रहा है कि चैनल के उच्च पदों पर बैठे सम्पादकीय नियंता, जो एक-एक कॉमा फुलस्टाप पर अपना नियंत्रण रखना चाहते हैं, अब संसदीय चैनल की स्वायत्तता पर कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं रख पा रहे हैं। एक दूसरे को कनखियों से देखते हुए वे आश्वस्त हैं कि नए आकाओं को खुश करने के लिए उन्होंने नमूना दिखा दिया है।

ध्यान रहे कि गुरदीप सिंह सप्पल के इस्तीफे के बाद 12 अगस्त को प्रसार भारती के CEO शशि शेखर वेम्पति ने RSTV के CEO के रूप में अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया है। इनफ़ोसिस में रह चुके टेक्नोक्रेट शशि शेखर की पहचान प्रचंड संघ समर्थक की है।  वेंकैया नायडू जब सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे तो उन्हें प्रसार भारती में ले आए थे।

पिछले 3-4 दिनों में RSTV की बहसों को देखें तो उनमे बुलाए जाने वाले मेहमान ही चैनल में आ रहे बदलाव की पोल खोल रहे हैं, हाँलाकि एंकर अभी अपनी तरह से, जहाँ तक हो सकता है, पुराना ढर्रा अपनाए हुए हैं।

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