Home टीवी तमिल पत्रकारिता को बदलने के लिए जुट गए हैं 12 दीवाने !

तमिल पत्रकारिता को बदलने के लिए जुट गए हैं 12 दीवाने !

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रवीश कुमार

अरुण बनना तो चाहता था इंजीनियर मगर परिवार की आर्थिक स्थिति में पढ़ाई पूरी नहीं होने दी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ कर वह अपने गांव से 150 किमी दूर चेन्नई आ गया। दोस्त शिवा की मदद से सीरीयल में कुछ काम मिला, एंकरिंग करने का भी चांस लगा मगर ज़्यादा दिनों तक नहीं चला। अर्जुन रात को चेन्नई की सड़कों पर ऑटो चलाता है और दिन में रूस्टर न्यूज़ के लिए एंकरिंग करता है। मौके पर जाकर रिपोर्टिंग भी। चेन्नई शहर की उस हकीकत को दिखाता है जो वेलकम टू चेन्नई वाले विज्ञापनों का हिस्सा नहीं होता है।

अरुण के पिता और मां खेतिहर मज़दूर हैं। भाई लेदर फैक्ट्री में मज़दूरी करता है। परिवार का एक मात्र पढ़ा लिखा बंदा है। तमिलनाडु के अरियालुर ज़िले से आता है। सरकारी इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ रहा था। मगर दो एरियर लग जाने के कारण पढ़ाई जारी नहीं कर पाया। उसका कहना है कि जब फिर से फीस के पैसे हो जाएंगे तो कोर्स पूरा करेगा। अरुण के दोस्त ने ऊबर के लिए टैक्सी ख़रीद ली तो अपना ऑटो रात में चलाने के लिए दे दिया। अरुण महीने से आटो चला रहा है। रूस्टर न्यूज़ में उसकी रिपोर्टिंग अब दूसरे चैनलों को पसंद आने लगी है।

अरुण के पास एंकरिंग के आफर भी आने लगे हैं। दस हज़ार तक के। अरुण ने फिलहाल ठुकरा दिया है और रूस्टर के साथ ही कुछ और दिन काम करना चाहता है। पैसे ठुकराना अरुण के लिए आसान नहीं है। उसकी ग़रीबी एक एक रुपये का जुगाड़ मांग रही है मगर ज़मीनी पत्रकारिता ने उसे कुछ और दिनों तक के लिए ग़रीबी का सामना करने की हिम्मत दे दी है।

रूस्टर न्यूज़ के एक और कड़ी हैं शिवा। शिवा अरुण का दोस्त है और रूममेट भी। शिवा भी चेन्नई से दूर एक गांव से आता है। माता पिता खेती करते हैं और खेती के कारण भयंकर संकट में हैं। एक भाई बंगलुरू में सब्ज़ी की दुकान लगाता है। एक भाई इंजीनियर बनकर अच्छा कर रहा है। एयरटेल के साथ काम करता है। शिवा ने 2010 में मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। शिवा ने तीन फिल्मों में सहायक निर्देशक का काम भी किया है। निर्देशक बनना चाहता है। अरुण और शिवा एक साथ रहते हैं। शिवा अब फोटोग्राफी के ज़रिए अपना काम चला लेता है। उसके बदले रूस्टर न्यूज़ में सब-एडिटिंग कर देता है।

रूस्टर न्यूज़ की एक और कड़ी हैं कुमुदिनी। कुमुदिनी तमिल चैनलों में फ्रीलांस एंकरिंग करती हैं। लेकिन इस काम के लिए एक पैसा नहीं लेती हैं। आने-जाने तक का किराया भी नहीं। कुमुदिनी को यह काम अच्छा लग रहा है और उन्हें लगता है कि इस काम में हाथ बंटाना चाहिए तो वो कर रही हैं। कुमुदिनी का कहना है कि जब कमाई होने लगेगी तब पैसे की बात करूंगी।

इन सबको सहेजने वाले हैं राहुल। राहुल दिल्ली में रह चुके हैं और हिन्दी बोलते हैं। मेरी मुलाकात राहुल से ही हुई। राहुल ने फोटोग्राफी की दुनिया में ठीक-ठाक जगह बना ली है। सात-आठ साल की फोटोग्राफी के दौरान उन्होंने कुछ उपकरण जुटा लिए थे। एक लैपटाप, एक कंप्यूटर, दो कैमरे। अपने ही घर का एक छोटा सा कमरा इस काम के लिए अलग कर दिया। 10 बाई 9 फीट का कमरा है। इसी कमरे में स्टुडियो बनाया है। 12 लोगों की टीम है। एक को छोड़ सब अलग-अलग पेशे से अपनी जीविका चलाते हैं मगर दिन के एक हिस्से में जमा होकर पत्रकारिता करते हैं।

राहुल को फोटोग्राफी से जो पैसे मिलते हैं, उसी से कुछ पैसे वे शिवा और अरुण को दे देते हैं। अपनी जेब से चैनल खड़ा करने का सपना आसान नहीं होता। मुझे यक़ीन है कि ये नौजवान कुछ कमाल करेंगे। मलेशिया के एक और व्यवसायी ने कुछ 15-20 हज़ार महीने का देने का वादा किया है और उससे काफी राहत हो जाती है। बाकी पैसा राहुल अपनी जेब से लगा देते हैं। तीस चालीस हज़ार के बजट में यह चैनल तैयार है। पूरी टीम काफी मेहनती है। रोज़ यू ट्यूब चैनल पर दो से तीन वीडियो डालती है।

इन सबका कहना है कि चेन्नई में पत्रकारिता की हालत बहुत ख़राब है। लोग भी चैनलों से परेशान हैं। तंदी टीवी को छोड़ कोई भी देखने लायक नहीं है। इसलिए हमने 15 अक्तूबर को तमिल में रूस्टर न्यूज़ शुरु किया है। यह शायद तमिल का पहला यू ट्यूब न्यूज़ चैनल है। राहुल का कहना है कि हमें मालूम नहीं कि आगे क्या होगा। लेकिन जब तक कर सकते हैं, हम ठीक से पत्रकारिता करना चाहते हैं।

रूस्टर न्यूज़ की टीम का जज़्बा बना रहे। वरना कई संगठनों की शुरूआत तो अच्छी नीयत से होती है मगर बीच में सब रास्ता भटक जाते हैं। शायद सत्ता और बाज़ार के बीच किसी के लिए टिकना आसान नहीं होता होगा। उम्मीद करता हूं कि रूस्टर न्यूज़ लंबे समय तक टिका रहेगा। थोड़े समय के लिए ही सही, पत्रकारिता में विकल्प देने के अपने लक्ष्य में बड़ी कामयाबी हासिल करेगा। हम तो यही चाहेंगे कि इनकी पारी लंबी हो। 15 अक्तूबर को कलाम साहब के जन्मदिन पर यू ट्यूब चैनल लाँच किया है तो इनके सपनों में आग जरूर होगी। इरादा पक्का होगा तभी तो महान कवि सुब्रमण्यिम भारती की एक लोकप्रिय कविता के शीर्षक से एक शो का नाम रखा है। अच्चम वेनबदु इल्लैय मतलब डर का कोई मतलब नहीं होता ।

 

 



रवीश कुमार देश के जाने-माने टीवी पत्रकार हैं। यह लेख उनके ब्लॉग कस्बा से साभार।



 

1 COMMENT

  1. U mesh chandola

    Where ever “Public will go” channels, radio, assembly, Parliament will be made.

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