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जब प्रियंका ने कहा, ‘’नाव डोल रही है’’ और जनता ने हर-हर महादेव का उद्घोष कर डाला!

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सुरेश प्रताप सिंह

जब पूरे देश में बेरोजगारी, किसानों व मल्लाहों की समस्या, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के ज्वलंत मुद्दों को छोड़कर “चौकीदार-चौकीदार” बनने की “सतही और हास्यास्पद” राजनीति को विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश की जा रही हो, ऐसे परिवेश में लोगों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठा कर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने काशी से एक नई राजनीति की शुरूआत करने की अपनी 140 किलोमीटर लम्बी गंगा यात्रा के दौरान संकेत दिया है. अपनी यात्रा के दौरान जितनी सहजता व आत्मीयता से वो लोगों से मिलीं उसकी प्रशंसा अब भी लोग कर रहे हैं.

प्रयागराज से 18 मार्च को शुरू हुई गंगा यात्रा का समापन 20 मार्च को बनारस में हुआ. लगभग 140 किलोमीटर का लम्बा सफर! गंगा यात्रा के जरिए वह यूपी में न केवल सटीक संदेश देने में कामयाब रहीं बल्कि अपने सियासी समीकरण भी बखूबी साधे. अपने विरोधियों पर उन्होंने सौम्य भाषा और शालीनता के साथ जमकर निशाना साधा.

तीन दिन की गंगा यात्रा के अंतिम दिन बनारस में पीएम नरेन्द्र मोदी को उनके संसदीय क्षेत्र में ही घेरा. कहा, “यह सरकार किसान, महिला और मजदूर विरोधी और नकारात्मक सरकार है. इसे बदलने का समय आ गया है. जरूरत है नई राजनीति की. इसके लिए काशी से आवाज उठनी चाहिए. बदलाव के लिए काशीवासी आगे आएं.” लेकिन सवाल यह है कि क्या एक ऐसे संगठन जो अपनी जमीन व वोट बैंक खो चुका है के बल पर वो अपने उद्देश्य में सफल हो पाएंगी? पूर्वांचल की राजनीति में कांग्रेस जो अपना पारम्परिक जनाधार खो चुकी है को प्रियंका गांधी पुन: समेटने की कोशिश कर रही हैं. अगर यह कहा जाए कि पूर्वांचल में वो अपनी विरासत को सहेजने के लिए गंगायात्रा की हैं तो गलत नहीं होगा.

रामनगर से अस्सी घाट तक की यात्रा के दौरान कई ऐसे अवसर आए जब प्रियंका गांधी सुरक्षा घेरा तोड़कर महिलाओं, युवतियों और बच्चियों से मिलीं. इस दौरान उनका सहज अंदाज चर्चा का विषय बना है. पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पैतृक आवास की फोटो गैलरी में पहुंच कर कुछ देर के लिए वो ठिठक गईं. इस कक्ष में वह जहां अपने परनाना, अपनी दादी और अपने पिता के पुराने चित्र देखकर भावुक हुईं, वहीं कांग्रेस के विभिन्न सम्मेलनों और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों से जुड़े चित्रों के बारे में जानकर, कांग्रेस के अतीत को समझने का प्रयास की. प्रियंका ने अपने पिता की तस्वीर के साथ फोटो भी खिंचवाई.

प्रियंका गांधी जैसे ही रामनगर में शस्त्री जी के आवास की गली में शामिल हुईं उन पर गुलाबों की पंखुड़ियां बरसाई जाने लगीं. घर की हर मंजिल से उन पर फूल बरसाए जा रहे थे. उत्साहित भीड़ हर-हर महादेव का घोष कर रही थी. शास्त्री चौराहे पर कुछ कांग्रेस की महिलाएं उनके स्वागत में सड़क पर नृत्य कर रही थीं. प्रियंका जब अस्सी घाट पहुंचीं तो वहां नाव पर ही मल्लाहों से बातचीच कीं. नाव पर भीड़ अधिक हो जाने से जब वो डगमगाने लगी तो मंद मुस्कान के साथ प्रियंका बोलीं, “उतर जाइए, नाव डोल रही है.” इस पर लोग हंस पड़े और हर-हर महादेव का उद्घोष करने लगे. बिना किसी नेता या दल का नाम लिए उन्होंने जनता तक अपना संदेश पहुंचा दिया. पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में गंगा में खड़े होकर एक सामान्य घटना को प्रियंका ने राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बना दिया- “नाव डोल रही है”! मांझी समाज ने अपनी समस्याओं से सम्बन्धित मांगपत्र भी उन्हें सौंपा.

अस्सी घाट से स्टीमर से वो दशाश्वमेध घाट पहुंचीं. यहां उन्होंने गंगा की आरती उतारी और गंगाजल से आचमन भी कीं. उसके बाद दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियों से चढ़ते हुए ऊपर चितरंजन पार्क के पास आईं और यहां से बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने कार से मंदिर चली गईं. प्रियंका ने विश्वनाथ मंदिर में षोडसोपचार पूजन व 11 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक किया. बाबा के गर्भगृह में बैठकर प्रियंका ने सप्तयोगी अनुष्ठान किया. काशी के वयोवृद्ध पं. चंद्रशेखर नारायाण दातार के अनुसार सप्तयोगी अनुष्ठान सर्वप्रथम भगवान शिव के निर्देश पर सप्तऋषियों ने की थी.

विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद जब प्रियंका पिपलानी कटरा स्थित सरोजा पैलेस के लिए चलीं तो उनकी यात्रा रोड-शो में तब्दील हो गई. वो अपने वाहन से निकल कर लोगों से मिलने लगीं. छत्ताद्वार से मैदागीन तक घरों की छत पर खड़ी सैकड़ों महिलाओं ने उन पर पुष्प वर्षा की. जवाब में प्रियंका ने भी हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया. उनकी पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था थी.

चौकाघाट स्थित शहीद विशाल पांडे के घर भी प्रियंका गईं और शहीद के पिता, मां, बहन व परिजनों से मिलकर हमेशा साथ खड़े रहने और हर संभव मदद का उन्हें भरोसा दिया. शहीद की छोटी बहन को पायलट बनने की सलाह दी. कहा, इसके लिए तैयारी करो ! हम करेंगे मदद. पुलवामा हमले में शहीद अवधेश कुमार यादव के बहादुरपुर स्थित घर भी वो गईं. शहीद की पत्नी व मां से कहा, “मैं पिता के खोने का दर्द समझती हूं. जब मैं 19 साल की थी तो मेरे पिता (पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी) शहीद हो गए थे.

गंगा यात्रा के तीसरे दिन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सुबह से ही हमलावर दिखीं. मिर्जापुर जनपद के चुनार किले के गेस्ट हाउस में सुबह मीडिया से बात करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया. जनता से कांग्रेस के समर्थन की अपील की. कहा कि अपने भविष्य के लिए मतदान करें.

तीखे तेवर के साथ तीसरे दिन प्रियंका ने पूर्वांचल दौरे का आगाज किया. सबसे पहले चुनार गेस्ट हाउस में कांग्रेस कार्यरर्ताओं से मुलाकात की. वहां पूर्वांचल के कई जिलों में टिकट की दावेदारी करने वाले एवं उनके समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा. कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद वो सीधे मीडिया से मुखातिब हुईं. कहा, जो सत्ता में होते हैं, उनको गलतफहमी होती है कि वह किसी को डरा सकते हैं और बरगला सकते हैं. “मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री को यह सोचना छोड़ देना चाहिए कि लोग बेवकूफ हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि लोग सब समझते हैं.”

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस पहुंचने से पहले ही प्रियंका गांधी ने यह संकेत दे दिया था कि भाजपा के गढ़ में ही वो उसे चुनौती देंगी. बची-खुची कसर उन्होंने बनारस के पिपलानी कटरा के सरोजा पैलेस में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में निकाल दी. यहां प्रियंका गांधी ने बिना नाम लिए मोदी पर सीधे हमला बोलते हुए कहा कि “आजादी से पहले ब्रिटिस सरकार की तानाशाही थी जिसमें गरीबों को सताया और प्रताड़ित किया जाता था. आजकल वही हालात देश में हैं. जनता की आवाज सुनी नहीं, दबाई जा रही है. फर्क सिर्फ यह है कि वर्तमान तानाशाह भारतीय हैं.”

कार्यकर्ता समागम के दौरान बीजेपी के उत्तर प्रदेश के अध्सक्ष महेन्द्र नाथ पांडेय के भाई जितेन्द्र नाथ पांडेय की बहू अमृता पांडेय ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. अमृता का स्वागत करते हुए प्रियंका ने हंसी के अंदाज में मुस्कराते हुए उनसे पूछा- आपके ससुर जी आपसे नाराज तो नहीं होंगे? इस पर अमृता हंसने लगीं. प्रियंका ने इसी अंदाज में कार्यकर्ताओं से जुड़ने के लिए भी सवाल-जवाब किया. हाल में शोर कर रहे कुछ कार्यकर्ताओं को शांत रहने की सलाह देते हुए कहा कि थोड़ा अनुशासन भी सिखाना है…!

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रियंका गांधी की यह गंगा यात्रा अपने उद्देश्य में सफल रही. उन्होंने अपना दल (कृष्णा गुट) की पल्लवी पटेल को विशेष महत्व दिया और उन्हें हमेशा अपने साथ रखीं. कांग्रेस ने अपना दल के इस गुट से गठबंधन किया है. माझी समाज को भी जोड़ने में सफल रहीं. नरम हिन्दुत्व का भी उन्होंने संदेश दिया.

महिलाओं को अपने व्यवहार से आकर्षित करने में वो सफल रहीं. युवा पीढ़ी में भी उनके आकर्षण का जादू देखने को मिला. निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि प्रियंका गांधी अपनी गंगा यात्रा से कार्यकर्ताओं में जोश भरने, राजनीतिक समीकरणों को साधने और अपना संदेश जनता तक पहुंचाने में कामयाब रहीं. राजनीतिक गलियारे में उनकी गंगा यात्रा को लेकर बहस शुरू हो गई है, जो इसकी सफलता को रेखांकित करती है.

(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं। यह पोस्‍ट उनकी फेसबुक वॉल से साभार है)

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