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उप्रः नागरिक सत्याग्रहियों की ज़मानत के लिए ग़ाज़ीपुर के एसडीएम की खतरनाक शर्तें देखिए!

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चौरीचौरा गोरखपुर से राजघाट नई दिल्ली के लिए निकली ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ 200 किलोमीटर की यात्रा करके 11 फरवरी को गाजीपुर पहुंची, जहां स्वागत करने के स्थान पर पुलिस ने सत्याग्रही पदयात्रियों को शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया था। बुधवार को जब इनकी ज़मानत की अर्जी स्थानीय एसडीएम के यहां लगायी गयी तो उसने बेल बॉल्ड भरने का जो आदेश दिया, वह अपने आप में चौंकाने वाला है। 

जेल में बंद 10 सत्याग्रहियों के खिलाफ़ एसडीएम (सदर) ग़ाज़ीपुर ने ज़मानत की शर्त रखी है कि प्रतिव्यक्ति 2.5 लाख के दो बेल बॉन्ड भरे जाएं और साथ ही हर बंदी के लिए गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी ज़मानत दें।

इन दस सत्याग्रहियों को आइपीसी की धारा 107/16 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को जब बेल की अर्जी लगायी गयी तो एसडीएम ने इतनी सख्त शर्तें थोप दीं।

 

सवाल उठता है कि 2.5 लाख के दो बेल बॉन्ड का इंतजाम हो भी गया तो एक गजेटेड अफसर क्यों किसी की बेल देने आएगा, जबकि उसको उसी राज्य सरकार के मातहत काम करना है?

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में आगामी तीन माह के लिए धारा 144 लगा दी है और 19 दिसंबर के सीएएए विरोधी आंदोलन के बाद से ही अलग अलग बिनाह पर गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है।

अब स्थिति यह हो गयी है कि हिंदू मुस्लिम झगड़े के खिलाफ गांधीवादी तरीके से बोल रहे लोगों को भी निशाने पर लिया जा रहा है।

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा का प्रथम चरण बनारस में 16 फरवरी 2020 को सम्पन्न होना तय था। आगे के लिए बनारस से कानपुर के लिए दूसरे चरण की यात्रा की तैयारी और कार्यकर्ताओं में संवाद का कार्यक्रम बनारस पड़ाव में करना पूर्वनिश्चित था। बनारस में प्रेसवार्ता और सामाजिक सांस्कृतिक सहमना संस्थाओं और व्यक्तियों से चर्चा करने की भी योजना रही किन्तु बनारस में प्रधानमंत्री के आगमन का कार्यक्रम भी 16 फरवरी को ही था। ऐसे में सड़कों पर जाम होना और प्रशासनिक व्यस्तता होना स्वाभाविक था। ऐसी असामान्य असहज स्थिति में सत्याग्रहियों का लक्ष्य जो कि अमन और भाईचारे का संवाद करना था, प्रभावित होता तो सत्याग्रहियों ने यह तय किया है कि बनारस 14 फरवरी 2020 की रात तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।

इससे पहले ही 11 फरवरी को ग़ाज़ीपुर में इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार लोगों में छात्र सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल हैं।