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राजस्‍थान: MNREGA में बकाया 778 करोड़ वसूलने के लिए मजदूरों ने करायी सरकार के खिलाफ सामूहिक FIR

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राजस्थान के मनरेगा मजदूरों के हैं लगभग 778 करोड़ रुपये बकाया

राजस्थान के 10 थानों में सचिव ग्रामीण विकास, भारत सरकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने गए मनरेगा मजदूर

देश भर के लगभग 150 से भी अधिक पुलिस थानों में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने गए मजदूर

उच्चतम न्यायालय ने भी देरी से मजदूरी दिए जाने को बेगार माना है

पूरे देश के लिए प्रधानमंत्री से मनरेगा के लिए 25000 करोड़ रुपये जारी किये जाने की मांग की

जयपुर, 28 फरवरी, 2019

राजस्थान सही पूरे देश में मनरेगा में लोग काम करने के लिए तो जा रहे हैं लेकिन उनके किये गए काम का भुगतान नहीं किया जा रहा है. आज राजस्थान के 5 जिलों के महात्मा गाँधी नरेगा मजदूरों ने बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं किये जाने के लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास सचिव को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करने की लिखित शिकायत दी है. बुधवार 28 फरवरी को मजदूरों ने राज्य के 10 से अधिक पुलिस थानों में पहुंचकर भुगतान नहीं होने को साजिश मानते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की (एफआईआर की प्रति संलग्न है).

मजदूरों ने अजमेर जिले की पंचायत समिति जवाजा के पुलिस थाने में भुगतान नहीं होने के लिए पुलिस थाना जवाजा और टॉडगढ़, भीलवाडा जिले में पंचायत समिति मांडल के लिए पुलिस थाना करेडा, उदयपुर जिले में कोटडा और झाडोल, खैरवाडा, डूंगरपुर जिले में सीमलवडा एवं बिच्छीवाडा थानों में शिकायत दी. पाली जिले की बाली पंचायत समिति में 1000 से अभी अधिक आदिवासी इकठ्ठा हुए और उन्होंने अपने थाने में जाकर एफआईआर दर्ज कराने का प्रस्ताव लिया और जंगल में उनके रहने के अधिकार को हर हालत में सुनिश्चित कराने का संकल्प लिया.

पुलिस की तरफ से मिली जुली प्रतिक्रिया मजदूरों को मिली है. करेडा थाने के थानाधिकारी ने शिकायत लेकर थाने पर पहुंचे मजदूरों को रसीद देकर कहा है कि मामले को आगे पहुंचाएंगे, इसी प्रकार अजमेर जिले के जवाजा थाने पर पहुंचे मजदूरों को कार्यवाहक थानाधिकारी ने शिकायत लेकर कहा उच्च अधिकारीयों को बताएँगे और मुकदमा दर्ज करेंगे. जबकि इसी जिले के टॉडगढ़ थाने पर कहा गया कि रसीद नहीं देंगे लेकिन शिकायत जिले के पुलिस को भेजी जाएगी. अन्य थानों पर भी इसी प्रकार की प्रतिक्रिया रही है.

जिन 5 जिलों में मजदूर एफआईआर दर्ज करवाने के लिए गए उनमें बड़ी मात्र में मजदूरों की मजदूरी बकाया है. इनमें अजमेर जिले में लगभग 50 करोड़, पाली में 17, भीलवाडा में 40, डूंगरपुर में 39, और उदयपुर में 42 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है.

राजस्थान में मजदूरों की 778 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया चल रही है जिसमें से 688 रुपये के FTO (Fund Transfer Order) जारी कर दिए गए हैं लेकिन बैंकों के द्वारा प्रोसेस नहीं किया गया है और उसमें से 40 करोड़ के ट्रांजेक्सन तो reject हो गए हैं और 90 करोड़ रुपये का लोगों ने काम तो कर लिया है लेकिन उसके तो अभी तक FTO ही जारी नहीं किये गए हैं. (पांच जिलों की डेटाशीट संलग्न है)

राजस्थान के पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज करवाने गए लोगों में उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किये जाने से उनमें बहुत रोष है और उन्होंने आज हर थाने में यह बात स्पष्ट तौर कहीं कि वे केवल एफआईआर तक ही सीमित नहीं रहेंगे यदि उनकी मजदूरी आने में और देरी हुई तो वे आन्दोलन करने को मजबूर होंगे.

इस मौके पर सभी पुलिस थानों में मजदूरों ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से योजना के विभिन्न मदों में भुगतान के लिए 25000 करोड़ रुपये तुरंत जारी किये जाने की मांग की.


नरेगा संघर्ष मोर्चा व राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन प्रतिनिधि की ओर से

निखिल डे, शंकर सिंह, सुशीला देवी, धर्मचंद खैर, कारुलाल, लक्ष्मी चौहान, मुकेश निर्वासित, नौरतमल (सचिव), बालूलाल (सह सचिव), महेंद्र सिंह उर्फ़ कार्तिक (संभागीय सचिव अजमेर संभाग), रूपसिंह (कोषाध्यक्ष), निखिल शिनॉय, विनीत, सिमरन,

संपर्क सूत्र- 9468862200, 9414004180, 7296958363

राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन (ट्रेड यूनियन क़ानून के तहत पंजीकरण प.सं. RTU 6/ 2018)

नरेगा संघर्ष मोर्चा की राष्ट्रीय समन्वय टीम : मुकेश निर्वासित (राजस्थान), अंकिता अग्रवाल (झारखण्ड), अनुराधा तलवार (बंगाल), ऋचा सिंह और अरुंधती धुरु(U.P.),कामायनी स्वामी (बिहार), गंगाराम पैकरा (छत्तीसगढ़), नैन्सी और आयशा (दिल्ली), नीता हार्दिकर (गुजरात), निर्मला ताइमेनी (तेलंगाना.) और अभय कुमार (कर्नाटक).

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