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EU सांसदों का कश्मीर दौरा: स्वामी ने कहा -राष्ट्रीय नीति के विरुद्ध, विपक्ष ने पूछा सवाल!

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यूरोपीय सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल  कश्मीर का दौरा करेगा. इस प्रतिनिधि मंडल में 28 सदस्य शामिल हैं. प्रतिनिधिमंडल 29 और 30 अक्टूबर को कश्मीर का दौरा करेगा, जहां कश्मीर के हालात पर उनको जानकारी दी जाएगी. प्रतिनिधिमंडल ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात की.

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवादियों का समर्थन या आतंक को प्रायोजित करने वाले या इस प्रकार की गतिविधियों और संगठनों का समर्थन करने वाले या राज्य की नीति के रूप में आतंकवाद का उपयोग करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए.आतंकवाद के लिए शून्य सहिष्णुता होनी चाहिए.

उन्होंने व्यापार को लेकर कहा कि निष्पक्ष और संतुलित द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते (बीटीआईए) का जल्द समापन मेरी सरकार के लिए प्राथमिकता है.

कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 हटाने के बाद किसी विदेशी प्रतिनिधि मंडल का यह पहला कश्मीर दौरा होगा.

प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही सांसदों के भारत के साथ संबंधों को महत्व देने की सराहना की. प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि सदस्यों की जम्मू कश्मीर सहित देश के अन्य हिस्सों में लाभदायक यात्रा हो.

370 के राज्य से हटने के बाद से ही यह विषय दुनिया भर में चर्चा का मुद्दा बना हुआ है. दूसरी ओर पाकिस्तान की तरफ से भी यह मामला लगातार उठाया जाता रहा है. इसी बीच यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण है.

यूरोपीय संसदीय प्रतिनिधि मंडल की कश्मीर यात्रा को लेकर राजनीति तेज हो गई है. विपक्षी दलों के अलावा बीजेपी के नेता सुब्रमणियम स्वामी ने इस यात्रा को अनैतिक करार दिया है और इसे ख़ारिज करने की मांग की है.सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं हैरान हूं कि विदेश मंत्रालय ने कुछ यूरोपीय सांसदों के इस दौरे की व्यवस्था की है, वो भी तब जबकि ये EU का आधिकारिक दौरा नहीं है. ये राष्ट्रीय नीति के विपरीत है, भारत सरकार को इस दौरे को तुरंत रद्द करना चाहिए.”

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार की इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि जब देश के नेताओं को कश्मीर के लोगों से मिलने नहीं दिया जा रहा है ऐसे में यह कदम भारतीय लोकतंत्र का अपमान है.

लगभग यही सवाल सी.पी.आइ.(एम) के नेता सीताराम येचुरी ने भी उठाया है.

वहीं इस दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा मुफ्ती के ट्विटर अकाउंट पर लिखा गया है, ‘कश्मीर और दुनिया के बीच का लोहे का पर्दा उठेगा.’ इसके साथ ही लिखा गया कि ‘जम्मू-कश्मीर को अशांति में धकेलने’ के लिए भारत सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. उम्मीद है कि उन्हें डॉक्टर्स, लोकल मीडिया और सिविल सोसायटी के लोगों से मिलने का मौका मिलेगा.

इसके बाद उनके ट्वीटर हैंडल से सिलसिलेवार कई ट्वीट किये गए हैं.

बता दें कि अनुच्छेद 370 हटने के पहले से ही जम्मू-कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों मुफ्ती मोहम्मद सईद, 83 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला नजरबंद हैं. महबूबा के नजरबंद होने के बाद से उनका ट्वीट हैंडल उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती चला रही हैं.

 

 

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