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‘द टेलीग्राफ’ ने दिखाया मोदी का ‘महात्मा’ अवतार, साथ में नीरव मोदी जैसे यार!

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संजय कुमार सिंह

‘द टेलीग्राफ’ का पहला पन्ना आज भी उल्लेखनीय है। ‘टेलीग्राफ’ ने लखनऊ की खबर, “महात्मा मोदी के कारोबारी संबंध” को लीड बनाया है। खबर के बीच में एक बॉक्स है जिसका शीर्षक है, “जनवरी 1948 से जनवरी 2018 : दो रोल मॉडल (आदर्श)”। इसके साथ बड़े अक्षरों में इंट्रो है, “अगर आपके इरादे अच्छे और साफ हैं तो किसी के साथ खड़े होने भर से आप पर दाग नहीं लग जाएगा। गांधी जी के इरादे इतने साफ थे कि बिड़ला परिवार के साथ रहने में वे कभी नहीं हिचके। पब्लिक में मिलना नहीं, पर्दे के पीछे सब कुछ करना है। वो डरते रहते हैं।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लखनऊ में रविवार को कहा।

इसके साथ बिड़ला हाउस नई दिल्ली की जनवरी 1948 की फोटो है। कैप्शन में लिखा है कि राष्ट्रपिता की उसी साल 30 जनवरी को बिड़ला हाउस (अब गांधी स्मृति) में हत्या हो गई थी। गांधी जी एक धोती में ढंके बैठे हैं। दूसरी फोटो सूट टाई वाले लोगों की है। प्रधानमंत्री भी बंद गला में हैं और बैठे हुए हैं। यह उद्यमियों के साथ दावोस की मशहूर तस्वीर है, 23 जनवरी 2018 की। इसमें नीरव मोदी भी हैं। कैप्शन में बताया गया है कि नीरव मोदी दूसरी पंक्ति में खड़े हैं और बांए से तीसरे है। इसे देखकर मुझे मेहुल भाई यहां बैठे हैं, वाला वीडियो भी याद आया। वही मेहुल भाई जो अब एंटीगुआ के नागरिक हैं। हालांकि, खबर में इसकी चर्चा नहीं है।

लखनऊ से पीयूष श्रीवास्तव की खबर शुरू ही होती है, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद को आधुनिक समय का महात्मा गांधी बना लिया है जिसके अच्छे इरादे उन्हें उद्यमियों के साथ रहने से डराते नहीं थे। यह संकेत है कि राफेल सौदे से संबंधित अनिल अंबानी की फर्म पर राहुल गांधी के निरंतर हमलों ने कमजोर नस को छू लिया है।” इसके बाद वही लाइनें हैं जो ऊपर बॉक्स में हाइलाइट की हुई बताई गई हैं। इसके बाद खबर में कहा गया है कि नरेन्द्र मोदी अभी तक खुद को गरीबों का मसीहा और अमीरों में गलत लोगों को कसने वाला बताते थे और जिन्हें उन्होंने नोटबंदी से ठीक करने की कोशिश की थी वही अब खुद को बदनाम कारोबारियों के रक्षक के रूप में पेश कर रहे हैं। खबर में लिखा है कि स्थान और मौके ने भी प्रधानमंत्री को उद्यमियों के पक्ष में बोल देने के लिए प्रेरित किया होगा। वे उत्तर प्रदेश में 60,000 करोड़ रुपए मूल्य की निवेश परियोजनाओं की शुरुआत के मौके पर बोल रहे थे। अखबार ने लिखा नहीं है पर याद रखने वाली बात है कि अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में राहुल गांधी के आरोप कि प्रधानमंत्री चौकीदार नहीं, भागीदार हैं – के जवाब में प्रधानमंत्री ने गरीबों के दुखदर्द का भागीदार होने का दावा किया था।

 

 

कल लखनऊ में प्रधानमंत्री बोल रहे थे तो स्रोताओं में 200 उद्यमी थे। इनमें गौतम अडानी और कुमार मंगलम बिड़ला शामिल हैं। अखबार ने यह खबर दिल्ली ब्यूरो की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ छापी है और आगे लिखा है कि कांग्रेस ने जवाब में कहा कि पूंजीपति और साथी पूंजीपति (कैपिटलिस्ट और क्रोनी कैपिटलिस्ट) में अंतर होता है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, “कांग्रेस उद्यमियों के खिलाफ नहीं है। वह पूंजीपतियों के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस का मानना है कि देश के विकास में निजी उद्यम और निजी पूंजी की वाजिब जगह है पर हम क्रोनी कैपिटलिस्ट (साथी पूंजीपति) के खिलाफ हैं।” इसी को राहुल गांधी ने भागीदार होना कहा था पर तब सीधे जवाब देने की बजाय उन्होंने कांग्रेस को सौदागर और ठेकेदार कह दिया था। यह अलग बात है कि कांग्रेस ने इसका नोटिस ही नहीं लिया।

आइए अब देखें हिन्दी अखबारों ने इस खबर को कैसे छापा है। ‘दैनिक जागरण’ ने इस खबर को, “उद्योगपतियों के साथ खड़े होने में डर नहीं” शीर्षक से छापा है। दूसरी लाइन में लिखा है, “प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कुछ लोग पर्दे के पीछे सब कुछ करते हैं पर सामने आने से डरते हैं।” अमर उजाला ने इस खबर को, “उद्योगपतियों के साथ खड़े होने से नहीं डरता” शीर्षक के साथ छापा है। शीर्षक के साथ बोल्ड में लिखा है, “पीएम ने फिर दिया विपक्ष को जवाब” और इसके साथ यह भी कि, “राष्ट्र निर्माण में उद्योगपतियों की भूमिका अहम, उनका सम्मान हो, नीयत साफ हो तो किसी के भी साथ खड़े होने से दाग नहीं लगता”। ‘हिन्दुस्तान’ ने भी इस खबर को, “उद्योगपतियों के साथ खड़े होने से नहीं डरता” – शीर्षक से लगाया है। मुख्य शीर्षक से ऊपर फ्लैग है, यूपी में 81 परियोजनाओं के शिलान्यास के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा। ‘नया इंडिया’ का शीर्षक है, “हां, वे कारोबारियों के साथ : मोदी”। दूसरी लाइन है, “रिलायंस पर हमला करने के लिए राहुल पर तीखा हमला। कहा, वे कारोबारियों के साथ खड़े होने से नहीं डरते।” ‘राजस्थान पत्रिका’ में भी यह खबर रूटीन खबरों की ही तरह है। शीर्षक है, “प्रधानमंत्री बोले – मैं कारोबारियों के साथ खड़े होने से नहीं डरता”। इसके ऊपर एक लाइन है, “उत्तर प्रदेश : उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के आरोपों पर पलटवार”।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।