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लखनऊ में गिरफ़्तारी : हिंदुस्तान का कवरेज और प्रेस क्लब का लोटना शर्मनाक !

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कल यूपी की राजधानी लखनऊ में जैसा हुआ, वैसा तो इमरजेंसी में भी नहीं हुआ था। देश भर में दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर विचार करने के लिए प्रेस क्लब में इकट्ठा हुए बुद्धिजीवियों और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया। इनमें रिटायर्ड आईपीएस (यूपी के पूर्व एडीजीपी) एस.आर.दारापुरी और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष प्रो.रमेश दीक्षित भी थे। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि पुलिस प्रेस क्लब में अंदर घुसी।

लेकिन इस ऐतिहासिक घटना की रिपोर्टिंग के नाम पर हिंदुस्तान जैसे राष्ट्रीय अख़बार ने जैसी शर्मनाक हरक़त की, वह भी ऐतिहासिक है। अख़बार के प्रमुख संवाददाता ने इन बुद्धिजीवियों और प्रतिष्ठित सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के प्रति ऐसी हिक़ारत दिखाई जैसे कि वह अपराधियों के बारे में लिख रहा हो। जिस कार्यक्रम के लिए बाक़ायदा प्रेस क्लब बुक कराया गया था, उसे प्रमुख संवाददाता (हद है !) गुपचुप करार दे रहे हैं। पेज नंबर 7 में छपी ख़बर की हेडिंग में कहा गया है कि ‘योगी के आवास जाने की योजना धरी रह गई’…जैसे कि ये लोग शैतानी करना चाहते थे और पकड़ लिए गए.(सच्चाई यह है कि सीएम आवास कूच करने की कोई योजना ही नहीं थी।)..सारी रिपोर्ट किसी पुलिस के दारोग़ा की क़लम से निकली लगती है ना कि किसी ऐसे संवाददाता की क़लम से जिसे लखनऊ की परंपरा, इतिहास और तहज़ीब की कोई जानकारी हो।

क्या योगीराज में धरना, प्रदर्शन तो छोड़िए, विचार गोष्ठी भी प्रतिबंधित होगी। आख़िर धारा 144 सड़क के लिए होती है ना कि क्लब या किसी बंद जगह के लिए। क़ायदे से तो अख़बार में इसके ख़िलाफ़ अग्रलेख छपना चाहिए था, लेकिन हद तो यह है कि इस ख़बर में एस.आर.दारापुरी या प्रो.दीक्षित का बयान तक नहीं है। यानी दूसरे पक्ष का वर्ज़न ग़ायब है जो पत्रकारिता का बुनियादी उसूल है।

इस घटना ने लखनऊ प्रेस क्लब पर अरसे से क़ाबिज़ मठाधीशों की पोल भी खोलकर रख दी। कहाँ तो उन्हें पुलिस क्लब में घुसने का प्रतिवाद करना चाहिए था, कहाँ उन्होंने पुलिस के दबाव में कार्यक्रम की बुकिंग ही कैंसिल कर दी। पत्रकारिता के नाम पर अरसे से झंडाबरदारी करने वालों का योगीराज में यूँ लोटना हैरान कर रहा है। वैसे प्रेस क्लब और उसके पदाधिकारियों को लेकर तमाम सवाल उठते रहे हैं। लखनऊ के पत्रकार नावेद शिकोह ने इस घटना पर जो लिखा है, वह सबकुछ बयान कर देता है..

Naved Shikoh पत्रकार वैश्या के दल्ले की तरह बदकिरदार ( चरित्रहीन) नही है… काचू( डरपेक) नही है। बेबस भी नही हैं। मालिक/संस्थान के इशारे/पालिसी(वो चाहे जैसी भी हो) पर पूरी तरह से नाचने वाला भी नही है। सरकारो के आगे दुम हिलाने वाला भी नही है। सरकार से बहुत कुछ लाभ लेने वाला भी नही है। सरकारी टुकडो पर पत्रकारिता नही की जा रही। सरकार की चाटूकारिता- चमचागीरी और अंधभक्ति की गिरफ्त मे भी नही है पत्रकारिता। मोदी परस्त/अखिलेश परस्त/माया परस्त भी नही है पत्रकार और पत्रकारिता।

तो फिर आखिर क्यों बंद है आँखे?
क्यों ये लब खामोश है?
क्यों मुँह मे ताले पड़ गये?
क्यो होठ सिल गये है ?
क्यो कलम बंद हैं?
आम पत्रकारो और पत्रकारिता के खिलाफ तानाशाही परआखिर क्यों आँखे बंद किये हैं पत्रकार?
कहाँ चली गयी पत्रकार नेताओ की फौज?
कहां है दर्जनो पत्रकार संगठन?
कहां खो गये वोट मांगने वाले?
कल प्रेस क्लब जैसे स्थान पर बर्द्धिजीवीयो की गिरफ्तारी पर पत्रकार,प्रेस क्लब के पदाधिकारी खामोश रहे।
इन कड़वी सच्चाईयों पर चार लाइन का व्यंग्य/काटाक्ष लिखा था-

” छापा पडता है तो दल्ला भागता है। हमले के वक्त कबुतर आँख बंद कर लेता है। पत्रकार ना तो चरित्रहीन ना बेबस। तो फिर इतना खामोश क्यों ?

तीन लाइनो की बात कई लोग समझे नही। कई ने कहा पत्रकारो को दूध का धुला मत बताओ।
मै पत्रकारो के जिक्र में वैश्या.. दल्ला … भक्त…मजबूर… बेबस.. सरकारी दलाल.. इत्यादि जैसे उपमाओ का प्रयोग नही करना चाहता था। लेकिन कुछ लोगो के बचकाने सवालो ने मुझे सीधा-सीधा लिखने पर मजबू कर दिया। जबकि बिना ये सब लिखे ही मै अपनी बात कह चुका था।

5 COMMENTS

  1. AB KISE PAGAL KUTTE NE KATA HAI JO AKHBARO PAR PABANDI LAGAYE ?FEB, 2016 ME JNU ME HINDU Akhbar se behtar Indian express raha .

  2. Thekedarnuma satta AUR Corporate hito KE same 1956 batch ka sadharan class me safar karne vala Dr BD Sharma ,IAS matte matte Bach’s tha !

  3. LAGTA HAI JISKA INTEZAR THA VO HAD ,JUM KI HAD AA CHUKI HAI. BHARAT BALIDAAN HONE LIYE FIR AZAD ,BHAGAT SINGH ,ASFAQ KO DOONDH RAHA HAI. Bismil Azimabadi KE shabdo me . .Khench kar layi HAI hamko katla hone ki ummid ..aashiko ka aaz jamghat koocha e katil me HAI.

  4. Poorane Hindustan Ayr safe corporate akhbar nikalo AUR sadak par jalao ! Asleel sex vigyapan dena HAI ? Are kesi bhi photo do .RATE LAGEGA , CHAPENGE HAM. PES HAI HINDUSTAN KE SABSE BADE AKHBAR . . .PESH KARTE HAI AKHBAR MALIK KA POOJI KE SATH NUDE DANCE !!

  5. एक शेर है शायद इकबाल या अबदुल मन्नान जिरगाम की।

    फूल की पत्ती से कट सकता है हीरे का जिगर ।
    मर्द नादाँ पे कलामे नर्मो नाज़ुक बे अशर ।

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